भारत ने AI-जनित सामग्री के लिए अनिवार्य लेबलिंग का प्रस्ताव रखा

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AuthorWhalesbook News Team|Published at:
भारत ने AI-जनित सामग्री के लिए अनिवार्य लेबलिंग का प्रस्ताव रखा
Overview

भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने अपने आईटी नियमों में संशोधन का प्रस्ताव दिया है, जिसके तहत डिजिटल प्लेटफॉर्म को AI-जनित या सिंथेटिक सामग्री को स्पष्ट रूप से लेबल करना अनिवार्य होगा। इस पहल का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और उपयोगकर्ताओं को प्रामाणिक व कृत्रिम जानकारी के बीच अंतर करने में मदद करना है। प्रमुख सोशल मीडिया कंपनियों और भारतीय स्टार्टअप्स को इन नए नियमों की समीक्षा करने और प्रतिक्रिया देने के लिए एक समय सीमा दी गई है, जो AI और डीपफेक की बढ़ती परिष्कृतता से उत्पन्न चिंताओं को दूर करना चाहते हैं।

भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 में संशोधन करने की योजना बना रहा है ताकि AI-जनित या सिंथेटिक सामग्री के लिए अनिवार्य लेबलिंग पेश की जा सके। प्रस्तावित नियमों के तहत, डिजिटल प्लेटफॉर्म को स्पष्ट रूप से पहचानना होगा कि सामग्री कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा बनाई गई है या संशोधित की गई है और प्रामाणिक लगती है। इस उपाय का उद्देश्य गलत सूचना, अफवाहों और डीपफेक जैसी उन्नत AI तकनीकों से होने वाले प्रतिष्ठा संबंधी नुकसान को रोकना है। YouTube और Meta जैसे प्रमुख सोशल मीडिया इंटरमीडियरी, साथ ही Invideo जैसे भारतीय स्टार्टअप सहित प्लेटफॉर्म, इन लेबलिंग आवश्यकताओं को लागू करने के लिए जिम्मेदार होंगे। प्रस्तावित दिशानिर्देशों में सुझाव दिया गया है कि सामग्री की AI-जनित प्रकृति को प्रमुखता से चिह्नित किया जाना चाहिए, जो संभवतः दृश्य क्षेत्र या प्रारंभिक ऑडियो के कम से कम 10% हिस्से को कवर करे। बड़े प्लेटफॉर्म को पता लगाने और लेबलिंग के लिए स्वचालित तकनीकी प्रणालियाँ विकसित करनी पड़ सकती हैं। कंपनियों के पास 6 नवंबर तक प्रस्तावित परिवर्तनों की समीक्षा करने और अपनी प्रतिक्रिया प्रस्तुत करने की समय सीमा है। आलोचकों, जैसे कि इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन (IFF), ने चिंता जताई है कि 'सिंथेटिक रूप से उत्पन्न जानकारी' की व्यापक परिभाषा अनजाने में रचनात्मक सामग्री, व्यंग्य और हानिरहित फिल्टर को प्रभावित कर सकती है, जिससे अत्यधिक सेंसरशिप हो सकती है और उपयोगकर्ता की रचनात्मकता बाधित हो सकती है। वे यह भी बताते हैं कि ऐसे जनादेशों को तकनीकी रूप से सटीक रूप से लागू करना मुश्किल हो सकता है और दुर्भावनापूर्ण कर्ताओं द्वारा इनसे बचा जा सकता है। सरकार का यह कदम यूरोपीय संघ और कैलिफोर्निया के नियमों से प्रेरणा लेते हुए वैश्विक रुझानों के अनुरूप है। यह डीपफेक के हाई-प्रोफाइल मामलों के बाद भी आया है, जहां अदालतों ने व्यक्तियों के व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा के लिए निषेधाज्ञा जारी की है।
प्रभाव:
इस नियामक प्रस्ताव से भारत के डिजिटल मीडिया परिदृश्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। इसके लिए प्लेटफॉर्म को नई तकनीकों में निवेश करना होगा और अपनी सामग्री मॉडरेशन नीतियों को अपडेट करना होगा, जो उपयोगकर्ता अनुभव और AI-संचालित सामग्री निर्माण टूल के अपनाने को प्रभावित कर सकता है। सरकार का लक्ष्य पारदर्शिता और जवाबदेही की संस्कृति को बढ़ावा देना है।
Impact Rating: 8/10.

परिभाषाएँ:

  • सिंथेटिक रूप से उत्पन्न जानकारी: ऐसी सामग्री जो एल्गोरिथम रूप से बनाई या संशोधित की गई हो ताकि प्रामाणिक या वास्तविक लगे।
  • डीपफेक: अत्यंत यथार्थवादी, AI-जनित नकली वीडियो या ऑडियो रिकॉर्डिंग जो व्यक्तियों की नकल करते हैं।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI): ऐसे कंप्यूटर सिस्टम जो आमतौर पर मानव बुद्धि की आवश्यकता वाले कार्यों को करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, जैसे सीखना और निर्णय लेना।
  • LLM प्लेटफॉर्म: लार्ज लैंग्वेज मॉडल प्लेटफॉर्म, जो AI सिस्टम हैं जो मानव-जैसे टेक्स्ट और अन्य सामग्री को समझने और उत्पन्न करने में सक्षम हैं।
  • मजबूर भाषण: किसी प्राधिकारी द्वारा एक विशिष्ट संदेश या राय व्यक्त करने के लिए मजबूर किया जाना।
  • मेटाडेटा: डेटा जो अन्य डेटा के बारे में जानकारी प्रदान करता है, जैसे कि उसका मूल या निर्माण तिथि।
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