India Semiconductor Mission 2.0: भारत का बड़ा दांव, अब चिप डिजाइन और स्टार्टअप्स पर फोकस!

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
India Semiconductor Mission 2.0: भारत का बड़ा दांव, अब चिप डिजाइन और स्टार्टअप्स पर फोकस!
Overview

भारत सरकार ने सेमीकंडक्टर सेक्टर में अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। नए 'India Semiconductor Mission 2.0' (ISM 2.0) के तहत, देश अब चिप डिजाइन, स्टार्टअप्स और डीप टेक इनोवेशन पर सबसे ज्यादा ध्यान केंद्रित करेगा। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत का लक्ष्य ऐसी डिजाइन कंपनियां तैयार करना है जो दुनिया में अपनी पहचान बना सकें।

रणनीति में बड़ा बदलाव: चिप डिजाइन पर जोर

'India Semiconductor Mission 2.0' (ISM 2.0) का लॉन्च, देश की सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के लिए एक नए युग की शुरुआत है। अब तक मैन्युफैक्चरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर देने के बजाय, सरकार की नई नीति स्वदेशी चिप डिजाइन क्षमताओं और डीप-टेक स्टार्टअप इकोसिस्टम को सर्वोच्च प्राथमिकता देगी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस मिशन का विजन पेश करते हुए कहा कि भारत ऐसी डिजाइन कंपनियों और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देगा जो न केवल बेहतरीन प्रोडक्ट्स बना सकें, बल्कि ग्लोबल मार्केट में अपनी मजबूत जगह भी बना लें, ठीक वैसे ही जैसे Qualcomm जैसी कंपनियां जानी जाती हैं। इस नई दिशा का मकसद भारत की अंदरूनी नवाचार शक्ति का इस्तेमाल करके, वैल्यू-जेनरेशन वाले सेगमेंट्स में पकड़ मजबूत करना है। महत्वाकांक्षा इतनी बड़ी है कि अब 2 नैनोमीटर (2nm) जैसी एडवांस्ड चिप्स डिजाइन करने की तैयारी है।

मजबूत डोमेस्टिक इकोसिस्टम का निर्माण

ISM 2.0 का एक मुख्य उद्देश्य भारत के भीतर एक मजबूत और आत्मनिर्भर सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तैयार करना है। इसमें चिप प्रोडक्शन के लिए जरूरी खास इक्विपमेंट, केमिकल्स और गैस बनाने वाले सप्लायर्स को भी शामिल किया जाएगा। एक बड़ा लक्ष्य यह भी है कि चिप यील्ड (Yield) को बेहतर बनाने वाली कंपनियों को भी इस इकोसिस्टम का हिस्सा बनाया जाए, जिससे एक पूरी और मजबूत डोमेस्टिक वैल्यू चेन बन सके। फाइनेंस मिनिस्टर द्वारा बजट में भी इस पहल को सपोर्ट करने की घोषणा, इस एंड-टू-एंड डेवलपमेंट और मैन्युफैक्चरिंग के लिए जरूरी विभिन्न प्लेयर्स को आकर्षित करने की व्यापक रणनीति को रेखांकित करती है।

ग्लोबल बेंचमार्क और भारतीय सपने

चिप डिजाइन पर भारत का यह नया फोकस वैश्विक trends के अनुरूप है। अमेरिका और यूरोपीय संघ जैसे देश भी अपनी 'CHIPS Act' जैसी पहलों के जरिए मैन्युफैक्चरिंग के साथ-साथ R&D और डिजाइन को प्राथमिकता दे रहे हैं। ताइवान जैसी जगहें, जो मैन्युफैक्चरिंग में एक पावरहाउस हैं, वहां MediaTek जैसी दुनिया की टॉप फैबलेस डिजाइन कंपनियां भी हैं, जिनका मार्केट कैपिटलाइजेशन अरबों डॉलर में है। ग्लोबल सेमीकंडक्टर डिजाइन फर्म्स अक्सर 25x से 40x तक के P/E मल्टीपल्स पर ट्रेड करती हैं, जो इस सेगमेंट के हाई मार्जिन्स और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी वैल्यू को दर्शाता है। वहीं, भारत के IT सर्विसेज सेक्टर ने शानदार ग्रोथ दिखाई है, जिसके लीडिंग फर्म्स के P/E रेश्यो आमतौर पर 20x-30x की रेंज में होते हैं। लेकिन, भारत का प्योर-प्ले सेमीकंडक्टर डिजाइन सेक्टर अभी शुरुआती दौर में है। पिछली सेमीकंडक्टर पहलों को स्केल्ड सक्सेस हासिल करने में दिक्कतें आई हैं, जो अक्सर इकोसिस्टम डेवलपमेंट में बिखराव और असंगत निवेश के कारण हुईं। हालांकि, मौजूदा ISM 2.0, मंत्री द्वारा बताए गए एक बड़े टैलेंट पाइपलाइन पर आधारित है।

चुनौतियां और 'बेयर केस' (Bear Case)

वैश्विक वैल्यू क्रिएशन के साथ सामंजस्य बिठाने के बावजूद, ISM 2.0 के रास्ते में कई बड़ी चुनौतियां हैं। एक नवजात चरण से स्वदेशी डिजाइन दिग्गजों को तैयार करना एक लंबा और कैपिटल-इंटेंसिव सफर है, जिसमें एग्जीक्यूशन रिस्क (Execution Risks) बहुत ज्यादा हैं। भारत को चिप डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग में स्थापित ग्लोबल प्लेयर्स से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा, जिनके पास दशकों का अनुभव, प्रोप्राइटरी टेक्नोलॉजी और मजबूत सप्लाई चेन रिलेशनशिप्स हैं। एडवांस्ड नोड्स जैसे 2nm को टारगेट करने के बावजूद, हाई-वॉल्यूम मैन्युफैक्चरिंग के लिए, कम से कम नियर से मीडियम टर्म में, विदेशी फैब्रिकेशन फैसिलिटीज पर निर्भरता बनी रहेगी, क्योंकि इसके लिए भारी निवेश और तकनीकी विशेषज्ञता की जरूरत होती है। इसके अलावा, खास इक्विपमेंट, स्पेशलाइज्ड मैटेरियल्स और एडवांस्ड R&D सर्विसेज के लिए डोमेस्टिक इकोसिस्टम को वर्ल्ड-क्लास डिजाइन और प्रोडक्शन कैपेबिलिटी को पूरी तरह सपोर्ट करने के लिए काफी विकसित करना होगा। अगर स्वदेशी फैब्रिकेशन टेक्नोलॉजी में बड़े ब्रेकथ्रू या लंबे समय तक नीतिगत समर्थन नहीं मिला, तो स्थापित लीडर्स को पीछे छोड़ने की महत्वाकांक्षा बहुत चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है।

भविष्य का दृष्टिकोण और एनालिस्ट्स की राय

एनालिस्ट्स ISM 2.0 के डिजाइन-सेंट्रिक अप्रोच को सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में हायर वैल्यू कैप्चर करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम मानते हैं। स्टार्टअप्स और इनोवेशन पर जोर देने से भारत के टेक सेक्टर के लिए नए ग्रोथ के रास्ते खुल सकते हैं। हालांकि, इन महत्वाकांक्षाओं का साकार होना प्रभावी नीति कार्यान्वयन, निरंतर निवेश और सहायक रेगुलेटरी माहौल पर निर्भर करेगा। एक मजबूत फैबलेस सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का विकास, जिसमें मजबूत इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी प्रोटेक्शन और ग्लोबल मार्केट्स तक पहुंच शामिल हो, लंबी अवधि की सफलता के लिए महत्वपूर्ण होगा। Qualcomm जैसी ग्लोबल कंपनियों के साथ सरकार की सक्रिय भागीदारी, जो भारत में महत्वपूर्ण R&D उपस्थिति रखती है, एडवांस्ड चिप डेवलपमेंट में सहयोग और ज्ञान हस्तांतरण के संभावित रास्ते खोलती है।

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