India Chip Mission 2.0: भारत का बड़ा कदम! सेमीकंडक्टर सेक्टर के लिए ₹40,000 करोड़ का ऐलान

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AuthorAditya Rao|Published at:
India Chip Mission 2.0: भारत का बड़ा कदम! सेमीकंडक्टर सेक्टर के लिए ₹40,000 करोड़ का ऐलान
Overview

भारत सरकार ने देश के सेमीकंडक्टर (Semiconductor) सेक्टर को मजबूत करने के लिए एक बड़ा ऐलान किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 को लॉन्च किया है, जिसके तहत चिप मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के तहत **₹40,000 करोड़** का प्रस्ताव रखा गया है।

मेक इन इंडिया को बड़ी मजबूती

ग्लोबल सेमीकंडक्टर मार्केट में जबरदस्त मांग देखी जा रही है, जो 2030 तक $1 ट्रिलियन के पार जाने का अनुमान है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में बढ़ती तरक्की के कारण इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में, भारत सरकार 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में कदम उठाते हुए ISM 2.0 के साथ इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। इसका मकसद आयात पर निर्भरता कम करना और देश के अंदर चिप डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन को फुल वैल्यू-चेन के साथ मजबूत करना है।

ECMS के लिए बड़ी फंडिंग

ISM 2.0, पिछले मिशन की सफलता पर आधारित है, जिसने 20,000 से ज्यादा नौकरियां पैदा कीं और कई फैब्रिकेशन प्लांट मंजूर करवाए। नई पहल के तहत, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के लिए आवंटन को काफी बढ़ाया गया है। पहले इस स्कीम का आउटले ₹22,919 करोड़ था, लेकिन अब सरकार ने इसे बढ़ाकर ₹40,000 करोड़ करने का प्रस्ताव दिया है। इस बढ़ी हुई फंडिंग से उत्पादन में तेजी लाने, स्थानीयकरण (localization) को गहरा करने और हाई-वैल्यू इलेक्ट्रॉनिक्स व चिप प्रोडक्शन को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।

रिसर्च और टैलेंट पर भी फोकस

ISM 2.0 सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग पर ही नहीं, बल्कि एक मजबूत इनोवेशन और टैलेंट इकोसिस्टम बनाने पर भी जोर दे रहा है। मिशन के तहत इंडस्ट्री-लेड रिसर्च और ट्रेनिंग सेंटर स्थापित किए जाएंगे, जो अकादमिक इनोवेशन को कमर्शियल मैन्युफैक्चरिंग से जोड़ेंगे। इससे देश के अंदर टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट में तेजी आएगी और इन-हाउस आईपी (Indigenous IP) डिजाइन क्षमताओं को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा, पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज (PSUs) द्वारा हाई-टेक टूल रूम स्थापित किए जाएंगे, जो एडवांस टेस्टिंग, डिजाइन और प्रेसिजन मैन्युफैक्चरिंग के लिए सर्विस ब्यूरो के तौर पर काम करेंगे।

चुनौतियां और अवसर

भारत सेमीकंडक्टर में आत्मनिर्भरता के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है, जो इसे ताइवान और साउथ कोरिया जैसे देशों से प्रतिस्पर्धा करने में मदद करेगा। हालांकि, देश के सामने प्रतिभा की कमी, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत, सप्लाई चेन को मजबूत करना और बड़े ग्लोबल प्लेयर्स से मुकाबला जैसी कई चुनौतियां भी हैं। भारत का सेमीकंडक्टर मार्केट 2030 तक दोगुना होकर लगभग $100 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, और ISM 2.0 इन महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को हासिल करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

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