एडवांस चिप डेवलपमेंट पर खास फोकस
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के तहत, भारत सरकार ग्लोबल चिप इंडस्ट्री के हाई-वैल्यू सेक्टर्स में अपनी पैठ मजबूत करने की तैयारी में है। ₹1 लाख करोड़ का यह फंड विशेष रूप से रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D), चिप डिजाइन और 3nm व 2nm जैसी अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर नोड्स के लिए इंसेंटिव्स (Incentives) को प्राथमिकता देगा। इस पहल का मकसद भारत की इम्पोर्ट (Import) पर निर्भरता कम करना है, खासकर मौजूदा भू-राजनीतिक (Geopolitical) और सप्लाई चेन (Supply Chain) की अनिश्चितताओं को देखते हुए। यह कदम पहले चरण के ₹76,000 करोड़ के फ्रेमवर्क पर आधारित है, जिसने बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए प्रतिबद्धताएं हासिल की थीं। उम्मीद है कि अप्रैल 2026 के अंत तक इसे कैबिनेट की मंजूरी मिल जाएगी।
भारत भी उतरा ग्लोबल सेमीकंडक्टर की दौड़ में
एडवांस चिप नोड्स पर यह फोकस भारत को अमेरिका, दक्षिण कोरिया, ताइवान और चीन जैसे वैश्विक दिग्गजों के साथ प्रतिस्पर्धा में खड़ा करता है। इन देशों ने US CHIPS Act और EU Chips Act जैसे बड़े इंसेंटिव पैकेजों के साथ अपनी पोजीशन मजबूत की है। मिशन के पहले चरण में भारत के फैब्रिकेशन प्लांट्स (Fabrication Plants) और असेंबली यूनिट्स के लिए ₹1.60 लाख करोड़ से ज्यादा का इन्वेस्टमेंट आया था। हालांकि, दूसरे चरण में अत्याधुनिक नोड्स पर जोर देने का मतलब है टेक्नोलॉजिकल और कैपिटल (Capital) की डिमांड में भारी बढ़ोतरी। फिलहाल, ग्लोबल चिप मार्केट एक मंदी से उबर रहा है, खासकर AI और एडवांस कंप्यूटिंग की मांग मजबूत है, लेकिन सप्लाई चेन को प्रभावित करने वाले भू-राजनीतिक तनावों का असर अभी भी देखा जा रहा है।
एडवांस चिप लक्ष्यों के सामने बड़ी चुनौतियां
हालांकि, 3nm और 2nm चिप टेक्नोलॉजी विकसित करने में भारत को बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इन एडवांस नोड्स को बनाने के लिए भारी भरकम इन्वेस्टमेंट की जरूरत है, जो कि ISM 2.0 द्वारा प्रदान की गई राशि से कहीं ज्यादा है। TSMC और Samsung जैसे ग्लोबल लीडर्स के पास इस क्षेत्र में दशकों का अनुभव और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (Intellectual Property) है। भारत में चिप डिजाइन और फैब्रिकेशन में स्पेशलाइज्ड टैलेंट (Specialized Talent) की भी कमी है, जिसके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हायरिंग (Hiring) और व्यापक ट्रेनिंग की आवश्यकता होगी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अत्याधुनिक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए लंबे समय तक, निरंतर इन्वेस्टमेंट और मैटेरियल्स (Materials), इक्विपमेंट (Equipment) व R&D के लिए एक मजबूत सपोर्टिंग इकोसिस्टम (Ecosystem) की ज़रूरत होगी। सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री की साइक्लिकल (Cyclical) प्रकृति भी एक जोखिम पैदा करती है, क्योंकि मंदी कैपिटल-इंटेंसिव (Capital-Intensive) प्रोजेक्ट्स की वित्तीय सेहत को प्रभावित कर सकती है।
भारत की चिप महत्वाकांक्षाओं का आउटलुक (Outlook)
ISM 2.0 की सफलता सही इन्वेस्टमेंट आकर्षित करने और इनोवेशन (Innovation) को बढ़ावा देने पर निर्भर करेगी। R&D और एडवांस नोड्स पर फोकस वैल्यू चेन में एक स्ट्रेटेजिक (Strategic) मूव है, लेकिन टेक्नोलॉजिकल सोफिस्टिकेशन (Sophistication) के मामले में ग्लोबल लीडर्स की बराबरी करना भारत के लिए अल्पावधि (Short-term) से मध्यावधि (Medium-term) में एक बड़ी चुनौती है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अत्याधुनिक स्तर पर भारत की प्रतिस्पर्धा क्षमता टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (Technology Transfer) के साथ विदेशी डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (Foreign Direct Investment) आकर्षित करने और घरेलू टैलेंट पूल (Talent Pool) विकसित करने पर निर्भर करेगी। यह प्रोग्राम अपने दीर्घकालिक (Long-term) लक्ष्यों को हासिल कर पाएगा या नहीं, और क्या यह बड़ी चुनौतियों से पार पाकर एक एडवांस, आत्मनिर्भर सेमीकंडक्टर बेस बना पाएगा, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।