AI की लहर में भारत की बड़ी चाल: डेटा सेंटरों में ₹5.8 लाख करोड़ का महा-निवेश!
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती मांग को भुनाने के लिए भारत अपनी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की नींव मज़बूत कर रहा है। सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं के तहत, देश के डेटा सेंटर सेक्टर में $70 बिलियन (लगभग ₹5.8 लाख करोड़) से अधिक का निवेश आने की उम्मीद है। यह बड़ा कदम AI क्रांति को गति देने, घरेलू क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत करने और हज़ारों नई नौकरियाँ पैदा करने के लक्ष्य से उठाया जा रहा है।
ग्लोबल हब बनने की राह: 2047 तक टैक्स छूट और लोकल रूल्स
भारत का लक्ष्य डेटा सेंटर के क्षेत्र में एक प्रमुख ग्लोबल हब बनना है। इस दिशा में, सरकार 2047 तक एक लंबी टैक्स हॉलिडे (करों में छूट) की पेशकश कर रही है। इसके साथ ही, विदेशी क्लाउड प्रोवाइटर्स को भारतीय-निर्मित और संचालित सुविधाओं का उपयोग करने के लिए सख्त लोकल होस्टिंग नियम लागू किए गए हैं। इन नियमों के तहत, भारतीय ग्राहकों को दी जाने वाली सेवाओं के लिए लोकल रीसेलर्स से गुज़रना अनिवार्य होगा। यह नीति वैश्विक बाज़ारों की तुलना में थोड़ी अलग है, लेकिन यह स्थानीय टेक इकोसिस्टम को विकसित करने में मदद कर सकती है।
निवेश का पैमाना और ग्लोबल AI बूम
यह निवेश 2030 तक $200 बिलियन तक पहुँचने का अनुमान है। दुनिया भर में डेटा सेंटरों का आकार सालाना लगभग 14% की दर से बढ़ने की उम्मीद है, जिसका मुख्य कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) वर्कलोड्स हैं। अनुमान है कि AI, सभी डेटा सेंटर ऑपरेशंस का आधा हिस्सा होगा। भारत वर्तमान में दुनिया के लगभग 20% डेटा को हैंडल करता है, लेकिन ग्लोबल डेटा सेंटर क्षमता का केवल 3% ही इसके पास है। यह बड़ा अंतर भारत के लिए एक बड़ी चुनौती और अवसर दोनों पेश करता है।
AI हार्डवेयर की ज़रूरतें और PLI स्कीम
सरकार IT हार्डवेयर के लिए प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम की भी समीक्षा कर रही है, खासकर AI सर्वर्स को बेहतर समर्थन देने के लिए। AI सर्वर लागत का 90% तक ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स (GPUs) पर आता है, और इन GPUs के लिए आयात पर भारत की निर्भरता, डोमेस्टिक वैल्यू बढ़ाने में एक बड़ी बाधा है।
GST का असर: सीमेंट और ऑटो सेक्टर में तेज़ी
डेटा सेंटर के अलावा, हाल के गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) में हुए बदलावों ने मैन्युफैक्चरिंग और कंज्यूमर स्पेंडिंग को भी बड़ा सहारा दिया है। सीमेंट प्रोडक्शन में करीब 9% की बढ़ोतरी देखी गई है, जिसका श्रेय सीमेंट पर GST को 28% से घटाकर 18% करने को जाता है (यह बदलाव प्रभावी सितंबर 2025 से होगा)। इससे सीमेंट की मांग में सालाना 8-9% की वृद्धि और मैन्युफैक्चरर्स के मुनाफे में सुधार की उम्मीद है। इसी तरह, पैसेंजर व्हीकल सेल्स में फरवरी में 26.1% की मज़बूत उछाल दर्ज की गई, जो टैक्स दरों में कमी के कारण वाहनों के अधिक अफोर्डेबल होने से जुड़ा है।
आने वाली चुनौतियाँ: पावर, पानी और इंपोर्ट पर निर्भरता
हालांकि, भारत की डेटा सेंटर महत्वाकांक्षाओं के रास्ते में कुछ बड़ी बाधाएँ भी हैं। अनुमान है कि 2030 तक डेटा सेंटरों की बिजली की खपत कुल राष्ट्रीय खपत का 3% हो सकती है, जिसके लिए बड़े पावर इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड की आवश्यकता होगी। जल संरक्षण भी एक अहम मुद्दा है, क्योंकि एक 20-MW का डेटा सेंटर प्रतिदिन 14 लाख लीटर पानी की खपत कर सकता है। इसके अलावा, AI हार्डवेयर, खासकर GPUs के लिए वैश्विक प्रतिस्पर्धा ज़बरदस्त है। चीन जैसे देश अपने घरेलू चिप निर्माण में भारी निवेश कर रहे हैं। भारत की आयात पर निर्भरता, PLI स्कीम के तहत स्थानीय मूल्य सृजन की गहराई पर सवाल खड़े करती है।
भविष्य का नज़रिया
भारत का क्लाउड कंप्यूटिंग मार्केट 2034 तक $266.90 बिलियन तक पहुँचने का अनुमान है। सरकार का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) पर ज़ोर, डिजिटल इनोवेशन की नींव रख रहा है। भारत को ग्लोबल AI परिदृश्य में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने के लिए, इंफ्रास्ट्रक्चर की सीमाओं को पार करना, घरेलू तकनीकी उन्नति को बढ़ावा देना और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा का रणनीतिक प्रबंधन करना ज़रूरी होगा।