India Inc: ट्रेड डील की बहार के बीच IT सेक्टर में AI का साया, शेयर गिरे

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
India Inc: ट्रेड डील की बहार के बीच IT सेक्टर में AI का साया, शेयर गिरे
Overview

आज 4 फरवरी 2026 को भारतीय शेयर बाज़ार की शुरुआत धीमी रही। हाल ही में हुए India-US Trade Deal से मिली ख़ुशी के बावजूद, मार्केट में दिशा की तलाश जारी रही। ट्रेड डील से एक्सपोर्ट-सेंट्रिक सेक्टरों को बड़ा बूस्ट मिला है और इकोनॉमिक ग्रोथ के अनुमान बढ़े हैं, लेकिन IT सेक्टर पर AI से मचे भूचाल और US टेक स्टॉक्स में आई गिरावट का असर दिख रहा है। Infosys जैसी बड़ी IT कंपनियों के शेयर भी दबाव में हैं। एनालिस्ट्स जहां एक ओर इस डील के व्यापक आर्थिक फायदों को देख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सेक्टर-स्पेशिफिक चुनौतियों के कारण मार्केट में सतर्कता का माहौल है।

ट्रेड डील की बहार और IT सेक्टर का डर

4 फरवरी 2026 को भारतीय बाज़ार की शुरुआत भले ही सुस्त रही हो, लेकिन यह पिछले दिन की तेजी के बिलकुल विपरीत थी। पिछले दिन के चौतरफा उछाल की मुख्य वजह India-US Trade Deal थी, जिसने एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड इंडस्ट्रीज और आर्थिक विकास के अनुमानों को पंख लगाए थे। हालांकि, अब ग्लोबल टेक्नोलॉजी सेक्टर में आ रही कमजोरी, खासकर AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के बढ़ते प्रभाव ने IT इंडस्ट्री को मुश्किल में डाल दिया है। इस वजह से बाज़ार में एक दोहरी तस्वीर दिख रही है, जहां एक तरफ मैक्रो-इकोनॉमिक सिग्नल पॉजिटिव हैं, तो दूसरी तरफ सेक्टर-स्पेसिफिक चुनौतियां बढ़ रही हैं।

सेक्टरों में बढ़ा विभाजन: ट्रेड डील की ख़ुशी या AI का डर

2 फरवरी 2026 को हुए India-US Trade Deal ने भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए अमेरिकी टैरिफ को 50% तक से घटाकर 18% कर दिया है। इस ऐतिहासिक समझौते के बाद, गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) ने भारत के GDP ग्रोथ अनुमान को 2026 के लिए 6.9% तक बढ़ा दिया है, वहीं ग्लोबलडेटा (GlobalData) का अनुमान है कि FY2025-26 में यह 7.5% रह सकती है। टेक्सटाइल, लेदर, जेम्स और सी-फूड जैसे एक्सपोर्ट सेक्टर सीधे तौर पर इस डील से लाभान्वित हो रहे हैं, और उनके शेयर अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। डील के बाद भारतीय रुपया भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ है।

लेकिन, IT सेक्टर को अलग तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। AI डेवलपर्स जैसे एंथ्रोपिक (Anthropic) द्वारा नए AI प्रोडक्ट्स लॉन्च करने की ख़बरों से AI-जनित डिसरप्शन (disruption) का डर बढ़ गया है, जिसके चलते US टेक स्टॉक्स में बिकवाली देखी गई। इसका सीधा असर भारतीय IT कंपनियों पर पड़ा है। Infosys के अमेरिकन डिपॉजिटरी रीसीट्स (ADRs) रात भर में 5.5% से ज़्यादा गिर गए। 4 फरवरी को Infosys के शेयर ₹1,552.9 के इंट्राडे लो तक पहुंच गए, जो 6.17% की गिरावट थी। यह ब्रॉडर मार्केट और IT सेक्टर के एवरेज से भी खराब प्रदर्शन रहा। हालांकि कुछ एनालिस्ट्स ने Infosys के डिमांड सेटअप को देखते हुए पहले इसके प्राइस टारगेट्स बढ़ाए थे, लेकिन AI से जुड़ी नई चिंताएं सेक्टर के वैल्यूएशन पर बड़ा खतरा पैदा कर रही हैं। 4 फरवरी 2026 तक, Infosys का P/E रेश्यो 24.0 और EPS 68.99 था।

वैल्यूएशन मेट्रिक्स और निवेशकों की चाल

फिलहाल, निफ्टी (Nifty) और सेंसेक्स (Sensex) दोनों ही ऊंचे वैल्यूएशन मल्टीपल्स पर ट्रेड कर रहे हैं। निफ्टी का P/E रेश्यो लगभग 22.4 है, जबकि कुछ रिपोर्ट्स इसे 21.76-21.8 के आसपास बता रही हैं। यह ऐतिहासिक औसत और इमर्जिंग मार्केट (Emerging Market) के मुकाबले काफी ज्यादा है, जहां MSCI इमर्जिंग मार्केट का औसत P/E 12-14x है। भारत का फॉरवर्ड P/E रेश्यो 23.3 है, जो प्रमुख बाज़ारों में सबसे ज़्यादा है। इन ऊंचे वैल्यूएशन्स के बावजूद, फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) ने 3 फरवरी 2026 को ₹5,236 करोड़ का नेट इनफ्लो किया, जो हालिया आउटफ्लो को पलट रहा है। यह दिखाता है कि भले ही ट्रेड डील जैसे मैक्रो फैक्टर्स पॉजिटिव हों, लेकिन ऊंचे वैल्यूएशन्स और IT सेक्टर की स्पेसिफिक हेड्विंड्स (headwinds) को देखते हुए मार्केट में सतर्कता ज़रूरी है।

टेक्निकल आउटलुक और अगले कुछ दिन

पिछले दिन की बड़ी तेजी के बाद, 4 फरवरी को मार्केट में कुछ प्रॉफिट-बुकिंग (profit-booking) देखने को मिली। निफ्टी के लिए इमीडिएट सपोर्ट लेवल 25,600 के आसपास है, जबकि 25,840 पर रेजिस्टेंस (resistance) है। इसे पार करने पर यह 25,923-26,020 तक जा सकता है। 6 फरवरी को होने वाली रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) की मीटिंग में ब्याज दरों में कोई बदलाव की उम्मीद नहीं है और उनका रुख नरम रहने की संभावना है, जिससे तत्काल कोई बड़ा बूस्ट नहीं मिलेगा, पर स्थिरता बनी रहेगी।

ऐतिहासिक संदर्भ और बड़े आर्थिक रुझान

भारत की इकोनॉमी मजबूत ग्रोथ पाथ पर है, और ट्रेड प्रोस्पेक्ट्स में सुधार के कारण 2026 के लिए अनुमानों को बढ़ाया गया है। हालांकि, वैश्विक साथियों की तुलना में भारतीय बाज़ारों का वैल्यूएशन अभी भी खिंचा हुआ है। ऐतिहासिक रूप से, भारतीय बाज़ारों ने US फेडरल रिजर्व की पॉलिसी साइकल्स के प्रति लचीलापन दिखाया है, लेकिन 2025 की मार्केट क्रैश जैसी बड़ी घटनाएं, जो वैश्विक आर्थिक चिंताओं और FII आउटफ्लो के कारण हुई थीं, बाहरी कारकों के प्रति संवेदनशीलता को उजागर करती हैं। वर्तमान AI क्रांति IT सेक्टर के लिए एक स्ट्रक्चरल शिफ्ट (structural shift) पेश कर सकती है, जिसके लिए ग्रोथ एजम्प्शन (growth assumptions) और वैल्यूएशन्स का सावधानीपूर्वक आकलन ज़रूरी है, भले ही पारंपरिक एक्सपोर्ट ड्राइवर ट्रेड डील से लाभान्वित हो रहे हों। भारत AI रेगुलेशन पर सावधानी से आगे बढ़ रहा है, इनोवेशन और जोखिम के बीच संतुलन बनाने के लिए मौजूदा फ्रेमवर्क्स पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

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