भारतीय आईटी सेक्टर: 2026 तक $315 अरब के पार! मंदी के बावजूद बंपर कमाई का अनुमान

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
भारतीय आईटी सेक्टर: 2026 तक $315 अरब के पार! मंदी के बावजूद बंपर कमाई का अनुमान
Overview

भारतीय टेक्नोलॉजी सेक्टर के लिए एक बड़ा लक्ष्य सामने आया है। इंडस्ट्री बॉडी Nasscom का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026 (FY26) तक इस सेक्टर का रेवेन्यू **$315 अरब** तक पहुंच जाएगा, जो कि पिछले साल के मुकाबले **6.1%** की बढ़ोतरी दर्शाता है।

Nasscom ने वित्त वर्ष 2025 (FY25) के लिए रेवेन्यू का अनुमान $297 अरब तक बढ़ाया है, जो सेक्टर की मज़बूती को दिखाता है। इस ग्रोथ का एक अहम हिस्सा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और नई पीढ़ी की टेक्नोलॉजीज़ से आ रहा है। अनुमान है कि AI अकेले $10 अरब से $12 अरब तक का रेवेन्यू जुटाएगा। यह पारंपरिक सेवाओं से हटकर हाई-वैल्यू, इनोवेशन-ड्रिवन सॉल्यूशंस की ओर एक बड़ी छलांग है।

ग्लोबल मंदी में भी मजबूती

हालांकि, ग्लोबल इकोनॉमी में मंदी (जिसके 2026 में 3.3% पर आने का अनुमान है) के बावजूद, भारत की डोमेस्टिक इकोनॉमी में 6.8% की ग्रोथ की उम्मीद है, जो आईटी सेक्टर के लिए एक मज़बूत डिमांड बेस तैयार कर रही है। इस सेक्टर में नौकरियां भी बढ़ रही हैं, FY26 तक 2.3% की बढ़ोतरी के साथ कुल रोजगार 59.5 लाख तक पहुंचने का अनुमान है।

वैश्विक बाज़ार से तुलना

भारत के आईटी सेक्टर की 6.1% की ग्रोथ दर, ग्लोबल आईटी स्पेंडिंग के अनुमानों से थोड़ी अलग है। दुनिया भर में आईटी स्पेंडिंग 2026 तक 10.8% बढ़कर $6.15 ट्रिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है, जिसमें AI इंफ्रास्ट्रक्चर, सर्वर और डेटा सेंटर सिस्टम्स का बड़ा योगदान होगा। यह दर्शाता है कि भारत का सेक्टर बढ़ रहा है, लेकिन ग्लोबल आईटी मार्केट की ग्रोथ, खासकर हार्डवेयर और कोर AI टेक्नोलॉजीज़ में, तेज़ गति से हो रही है। ऐतिहासिक रूप से, भारतीय आईटी इंडस्ट्री की ग्रोथ ग्लोबल इकोनॉमिक साइकल्स से जुड़ी रही है; अमेरिका में मंदी के दौर में इस सेक्टर में भी गिरावट और नौकरियों में कटौती देखी गई है।

चुनौतियां और आशंकाएं

सकारात्मक आंकड़ों के बावजूद, कुछ चिंताएं भी हैं। कुछ इंडस्ट्री एनालिस्ट्स FY26 के लिए "म्यूटेड आउटलुक" (धीमी वृद्धि का अनुमान) जता रहे हैं, और FY27 में रिकवरी की उम्मीद कर रहे हैं। इसका कारण क्लाइंट्स द्वारा कॉस्ट कटिंग और फैसले लेने में लगने वाला लंबा समय है। बड़ी (Tier 1) आईटी कंपनियों के रेवेन्यू में 3-5% तक की कमी का अनुमान लगाया जा रहा है, जबकि छोटी (Tier 2) फर्मों में 2-10% तक की कटौती देखी जा सकती है। ग्लोबल जियोपॉलिटिकल अस्थिरता और ट्रेड पॉलिसी में बदलाव भी मांग को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा, AI के बढ़ने से पारंपरिक आईटी नौकरियों पर क्या असर पड़ेगा, यह भी एक बहस का विषय है, जो कुछ सेगमेंट्स में रोजगार वृद्धि के लिए एक हेडविंड बन सकता है। यह भी देखना होगा कि मिड-टियर कंपनियां FY25 में जिस तेज़ी से आगे बढ़ीं, क्या वो momentum FY26 में भी बनाए रख पाएंगी।

भविष्य की राह

Nasscom इस बात पर ज़ोर दे रहा है कि भारतीय टेक इंडस्ट्री अब स्केल-लेड एक्सपेंशन (पैमाने पर विस्तार) से वैल्यू और इनोवेशन (मूल्य और नवाचार) की ओर बढ़ रही है, जो भारत की ग्लोबल पोजिशन को मज़बूत करेगा। सेक्टर का विकास जारी रहेगा, जिसमें AI इंडस्ट्रियलाइजेशन और आउटकम-बेस्ड रेवेन्यू मॉडल्स (परिणाम-आधारित आय मॉडल) प्रमुख होंगे। स्पेशलाइज्ड वर्टिकल्स का बढ़ता महत्व और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) का विस्तार, भारत की एक स्ट्रैटेजिक टेक्नोलॉजी पार्टनर के रूप में भविष्य की भूमिका को आकार दे रहे हैं। यह भविष्य की ओर एक स्पष्ट नज़रिया है, जो मौजूदा जटिलताओं को स्वीकार करते हुए, हाई-वैल्यू ग्रोथ एरियाज़ की ओर बढ़ने का संकेत देता है।

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