बायबैक बनी वजह, निवेशकों को हुआ भारी नुकसान
भारत की दिग्गज IT कंपनियों, जैसे Tata Consultancy Services (TCS), Infosys और Wipro, द्वारा किए गए शेयर बायबैक अब शेयरधारकों के लिए महंगा सौदा साबित हो रहे हैं। जब इन कंपनियों के शेयर अपने हाई प्राइस पर थे, तब इन्होंने बायबैक प्रोग्राम चलाए। आज की तारीख में, इन कंपनियों के शेयर बायबैक प्राइस से काफी नीचे ट्रेड कर रहे हैं।
उदाहरण के तौर पर, TCS ने ₹3,000, ₹4,500 और ₹4,150 के भाव पर शेयर वापस खरीदे, जबकि आज इसका शेयर करीब ₹2,400 पर है। Infosys ने ₹1,750, ₹1,850 और ₹1,800 पर बायबैक किया, लेकिन शेयर अब ₹1,155 के आसपास चल रहा है। Wipro का हालिया बायबैक प्राइस ₹250 था, जो अभी के ₹204 के भाव से काफी ऊपर है। इन कंपनियों के निवेशकों को बायबैक प्राइस से 8% से लेकर 47% तक का नुकसान उठाना पड़ा है।
AI में निवेश से चूक, भविष्य पर बड़ा संकट
यह भी चिंताजनक है कि इन तीन IT दिग्गजों ने बायबैक पर कुल ₹1.24 लाख करोड़ खर्च कर दिए। यह भारी-भरकम रकम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर, प्लेटफॉर्म और एक्विजिशन जैसे अहम क्षेत्रों में निवेश की जा सकती थी। भारत अगले दो सालों में AI में $200 बिलियन से ज़्यादा का निवेश करने का लक्ष्य रख रहा है, और Gartner का अनुमान है कि 2026 में भारत का IT खर्च $176 बिलियन को पार कर जाएगा। ऐसे में, बायबैक पर खर्च हुए फंड्स ने कंपनियों को इस AI शिफ्ट में पीछे छोड़ दिया है।
Nifty IT इंडेक्स में बड़ी गिरावट
इन कंपनियों की स्ट्रैटेजी का असर Nifty IT इंडेक्स पर भी साफ दिख रहा है। यह इंडेक्स इस साल अब तक लगभग 25% गिर चुका है और 28,530.60 पर बंद हुआ है, जो सेक्टर की मौजूदा चुनौतियों को दर्शाता है। फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) ने भी इन IT शेयरों में अपनी हिस्सेदारी घटाई है, जो निवेशकों के घटते भरोसे का संकेत है।
वैल्यूएशन और बायबैक का गलत तालमेल
बायबैक अक्सर तब किए गए जब कंपनियों के वैल्यूएशन (Valuation) बहुत ज्यादा थे। TCS ने 34x, 39x और 30x के P/E मल्टीपल पर बायबैक किया, जबकि आज इसका P/E सिर्फ 17.54 है। Infosys और Wipro ने भी अपने शेयर प्राइस पर प्रीमियम देकर बायबैक किए। यह रणनीति शेयर के वास्तविक मूल्य से कम पर खरीदने के बजाय, 'पीक-साइकिल' सेंटिमेंट से प्रेरित लगती है।
भविष्य की राह: AI पर फोकस
अब इस सेक्टर का भविष्य AI-संचालित सेवाओं की ओर बढ़ने पर निर्भर करता है। TCS के लिए एनालिस्ट (Analyst) अभी भी पॉजिटिव हैं, लेकिन Infosys के लिए आउटलुक मिला-जुला है। FY27 के लिए 1.5% से 3.5% की धीमी रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान है। यह भी चिंता है कि जेनेरेटिव AI ट्रेडिशनल IT सर्विसेज में अगले कुछ सालों में 2% से 3% की सालाना गिरावट ला सकता है। हालांकि, AI 2030 तक $300-400 बिलियन का नया मार्केट खड़ा कर सकता है। इन कंपनियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे AI के अवसर का प्रभावी ढंग से उपयोग करें और ट्रेडिशनल सर्विस प्रोवाइडर से AI-संचालित इनोवेशन के लीडर बनें।
