India AI Summit 2026: इंसानों पर AI का असर, भारत की नई दिशा

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AuthorAditya Rao|Published at:
India AI Summit 2026: इंसानों पर AI का असर, भारत की नई दिशा
Overview

India AI Impact Summit 2026 का आयोजन भारत में हुआ, जो ग्लोबल साउथ में AI के मानव प्रभाव पर केंद्रित एक ऐतिहासिक घटना है। IIM बोधगया 'माइंडफुल AI' दृष्टिकोण को बढ़ावा दे रहा है, AI और सस्टेनेबिलिटी को अपने पाठ्यक्रम में शामिल कर रहा है। यह संस्थान ग्रामीण बिहार के जमीनी नेताओं के लिए डिजिटल साक्षरता की खाई को पाटने के लिए मल्टी-मोडल, बहुभाषी AI समाधानों, विशेष रूप से वॉयस रिकग्निशन पर जोर दे रहा है। यह 'एप्लाइड AI' दर्शन शासन और सार्वजनिक सेवा वितरण को मजबूत करने का लक्ष्य रखता है।

AI पर बहस का नया रुख, इंसानों पर फोकस

India AI Impact Summit 2026, जो भारत मंडपम में आयोजित हुआ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की चर्चा में ग्लोबल साउथ को एक नई पहचान दिला रहा है। यह समिट सिर्फ तकनीकी प्रगति से आगे बढ़कर, AI के वास्तविक मानवीय प्रभाव पर जोर दे रहा है, जो भारत के 'विक्सित भारत 2047' के विजन के अनुरूप है। इस आयोजन से यह साफ संकेत मिलता है कि सरकार AI का उपयोग शासन (Governance) और सार्वजनिक सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए बड़े पैमाने पर करने की रणनीति बना रही है।

'माइंडफुल AI' और समावेशी विकास

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट बोधगया (IIM Bodh Gaya) इस बदलाव का नेतृत्व कर रहा है। यह संस्थान 'माइंडफुल AI' के सिद्धांतों को अपनी मुख्य विचारधारा में शामिल कर रहा है। इसका मतलब है AI के सबसे कमजोर वर्गों पर पड़ने वाले प्रभाव के प्रति जागरूकता बढ़ाना। समिट के "सूत्रों" – लोग, ग्रह और प्रगति – के साथ तालमेल बिठाते हुए, IIM बोधगया ने AI और सस्टेनेबिलिटी (Sustainability) को सभी विषयों में अनिवार्य कर दिया है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि भविष्य के लीडर्स डेटा-संचालित फैसलों के सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय पहलुओं को समझें। हाल ही में हुए डेटा एनालिटिक्स और साइबर सिक्योरिटी (DACS 2024) सम्मेलन ने AI सुरक्षा और जनता के भरोसे के बीच के संबंध को और मजबूत किया।

डिजिटल खाई को पाटने की पहल

एक बड़ी चुनौती डिजिटल साक्षरता की कमी है। IIM बोधगया के बिहार के ग्रामीण पंचायती राज नेताओं के साथ किए गए काम से पता चला है कि पारंपरिक कीबोर्ड-आधारित इंटरफेस कई लोगों के लिए रुकावट पैदा करते हैं। इस समस्या से निपटने के लिए, संस्थान मल्टी-मोडल और बहुभाषी AI सिस्टम पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। वॉयस रिकग्निशन (Voice Recognition) और ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (OCR) जैसी तकनीकों से ग्रामीण नेता अपनी प्राकृतिक आवाज और क्षेत्रीय भाषाओं का उपयोग करके डेटा के साथ इंटरैक्ट कर सकेंगे। यह 'एप्लाइड AI' (Applied AI) का तरीका टेक्नोलॉजी को सुलभ बनाकर मानव पूंजी को सशक्त बनाने का काम करेगा।

उत्कृष्टता केंद्र और शासन में नवाचार

IIM बोधगया AI और समाज के जुड़ाव पर एक उत्कृष्टता केंद्र (Center of Excellence) स्थापित करने की योजना बना रहा है। यह हब डेटा एनालिटिक्स विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं के बीच सहयोग को बढ़ावा देगा ताकि वास्तविक दुनिया की समस्याओं का समाधान निकाला जा सके। बिहार सरकार के साथ चीफ मिनिस्टर फेलोशिप स्कीम (CMFS) के तहत प्रोटोटाइपिंग पर काम चल रहा है, और सरकारी कर्मचारियों को AI टूल्स में प्रशिक्षित करने के लिए एक कार्यकारी कार्यक्रम (Executive Program) का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य शासन में नवाचार का सीधा रास्ता तैयार करना है, जैसा कि कृषि सलाह के लिए 'किसान ई-मित्र' जैसे प्रोजेक्ट्स से पता चलता है।

राष्ट्रीय क्षमता निर्माण और भविष्य की भलाई

यह संस्थान AICTE–QIP PG सर्टिफिकेट प्रोग्राम (2026–27) और AI और मशीन लर्निंग में अन्य कार्यकारी कार्यक्रम भी आयोजित कर रहा है। इन पहलों का लक्ष्य छात्रों से लेकर वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों तक, सभी स्तरों पर लीडर्स को प्रशिक्षित करना है। समिट का 'प्रगति' सूत्र मानसिक स्वास्थ्य सहित दीर्घकालिक भलाई में AI की भूमिका को रेखांकित करता है। IIM बोधगया व्यक्तिगत निगरानी के माध्यम से माइंडफुलनेस और मानसिक स्वास्थ्य का समर्थन करने में AI की क्षमता की खोज कर रहा है, ताकि भविष्य के लीडर्स लचीले और दयालु बन सकें। संस्थान का सुझाव है कि भारत के AI मिशन की अंतिम सफलता गांवों में इसके प्रभाव से मापी जाएगी, न कि केवल ग्लोबल टेक हब में।

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