सेक्टर में तेजी के नए पैंतरे: ज़्यादा ऑर्डर, बड़े शहरों तक पहुंच
इंडिया का ऑनलाइन फूड डिलीवरी मार्केट 2030 तक करीब $27 बिलियन तक पहुंचने वाला है। इस ग्रोथ की मुख्य वजहें हैं बार-बार ऑर्डर होना और छोटे शहरों (Tier-2+ cities) में सर्विस का बढ़ना। ये सेक्टर 19% की सालाना दर से बढ़ रहा है। शहरों का विकास, डिजिटल इस्तेमाल में बढ़ोतरी और सुविधा की चाहत इस ट्रेंड को और मजबूती दे रही है। छोटे परिवार और युवा प्रोफेशनल की बढ़ती संख्या भी इस ग्रोथ में अहम भूमिका निभा रही है।
Quick Commerce में घमासान: 'जो बचेगा वही टिकेगा'
लेकिन इस दौड़ में सबसे बड़ा खेल Quick Commerce का है, जिसने कॉम्पिटिशन को और भी खतरनाक बना दिया है। एनालिस्ट्स इसे "survival of the fittest" का मैदान कह रहे हैं, जहाँ हर साल 40% से ज्यादा की ग्रोथ का अनुमान है। Zomato का Blinkit इस रेस में Swiggy के Instamart से काफी आगे दिख रहा है। Blinkit ने फाइनेंशियल ईयर 25 (FY25) में अपने नुकसान को 92% तक कम किया है, जबकि Swiggy Instamart का नुकसान उसी अवधि में 60% बढ़ गया है। Blinkit की मार्केट में हिस्सेदारी करीब 46% है, वहीं Swiggy Instamart की 25%। हालांकि, Swiggy के प्रति यूजर ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू (GOV) काफी कॉम्पिटिटिव बनी हुई है।
प्रॉफिट की पहेली: ऊंचे वैल्यूएशन और घटते मार्जिन
इन सब के बीच, असली सवाल प्रॉफिटेबिलिटी का है। Zomato के लिए वैल्यूएशन की रेंज काफी बड़ी है, जो 97.6 से 1700 तक जा सकती है। फाइनेंशियल ईयर 25 (FY25) में Zomato का नेट प्रॉफिट ₹527 करोड़ रहा, जो पिछले साल से बेहतर है। फूड डिलीवरी से एडजस्टेड EBITDA मार्जिन फाइनेंशियल ईयर 24 (FY24) में 2.8% रहा, जो FY21 के -18% से काफी सुधरा है, लेकिन एक स्थिर प्रॉफिट तक पहुंचने में अभी लंबा सफर तय करना है। वहीं, Swiggy ने FY25 में ₹15,227 करोड़ का रेवेन्यू जनरेट किया, लेकिन ₹3,117 करोड़ का भारी नुकसान उठाया। फूड डिलीवरी EBITDA मार्जिन FY24 में -0.2% रहा। इन नंबर्स के चलते एनालिस्ट्स की नजरें इन कंपनियों पर टिकी हैं।
कॉम्पिटिशन का खतरा और एग्जीक्यूशन रिस्क
Zepto और Amazon जैसे कंप्टीटर्स भारी डिस्काउंट और आक्रामक रणनीतियों से बाजार में अपनी पैठ बना रहे हैं, जिससे Zomato और Swiggy के प्रॉफिट पर सीधा दबाव पड़ रहा है। इसी वजह से, Jefferies ने जनवरी 2025 में Zomato को 'Hold' रेटिंग दी और इसके प्राइस टारगेट को कम कर दिया। Blinkit के वैल्यूएशन मल्टीपल को भी आधा कर दिया गया। हालाँकि फूड डिलीवरी को 'defensible' माना जाता है, लेकिन लगातार बड़े कैपिटल इन्वेस्टमेंट पर निर्भरता और नए वर्टिकल्स में विस्तार एग्जीक्यूशन रिस्क पैदा करते हैं। इसके अलावा, प्रमुख मार्केट पोजिशन के कारण इन कंपनियों पर कमीशन, वर्कर कंडीशंस या डेटा प्राइवेसी जैसे मुद्दों पर रेगुलेटरी जांच का खतरा भी बना रहता है।
एनालिस्ट्स की मिली-जुली राय
ओवरऑल, भारतीय ऑनलाइन फूड डिलीवरी मार्केट में लगातार ग्रोथ का अनुमान है, जहाँ 2030 तक मार्केट साइज $59 बिलियन से ऊपर जाने की उम्मीद है, जिसकी CAGR 14.2% से 21% तक रहने का अनुमान है। लेकिन Zomato के भविष्य को लेकर एनालिस्ट्स की राय बंटी हुई है। Jefferies वैल्यूएशन और कॉम्पिटिशन की चिंताओं के चलते सावधान 'Hold' रेटिंग दे रहा है। दूसरी ओर, Morgan Stanley Zomato को सेक्टर लीडर मानते हुए 'Overweight' रेटिंग दे रहा है। Investec ने अप्रैल 2026 में 'Buy' रेटिंग और ₹375 का टारगेट प्राइस दिया है, जो Zomato के इंटीग्रेटेड मॉडल और Blinkit की स्थिति का समर्थन करता है। यह इस बात पर जारी बहस को दिखाता है कि क्या मार्केट ग्रोथ इन कॉम्पिटिटिव रिस्क और प्रॉफिटेबिलिटी की मुश्किल राह को सही ठहरा पाएगी।
