ग्लोबल AI क्रांति का गवाह बनेगा भारत?
यह महत्वाकांक्षी नीतिगत ढांचा भारत को तेजी से बढ़ते डेटा सेंटर और AI इंफ्रास्ट्रक्चर बाजार में लाने के लिए तैयार किया गया है। यह उस समय आया है जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का विकास विकसित देशों में ऊर्जा की बढ़ती कीमतों और नियामक जांच जैसी समस्याओं का सामना कर रहा है। ऐसे में भारत एक स्वागत योग्य विकल्प के रूप में खुद को पेश कर रहा है, जिसका लक्ष्य ग्लोबल कैपिटल और क्षमता को हासिल करना है।
पश्चिमी देशों में AI पर क्यों है दबाव?
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एक बड़ा भू-राजनीतिक और आर्थिक शक्ति बन गया है। हालांकि, इसकी अत्यधिक ऊर्जा-गहन प्रकृति के कारण अमेरिका जैसे बाजारों में डेटा सेंटर के विस्तार में दिक्कतें आ रही हैं। वहां बिजली की कीमतों और पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर जांच बढ़ गई है। भारत इस स्थिति का फायदा उठाकर इस ग्लोबल निवेश को अपनी ओर खींचना चाहता है।
कौन-कौन से दिग्गज कर रहे हैं भारी निवेश?
देश के बड़े औद्योगिक घराने पहले ही बड़े निवेश की घोषणा कर चुके हैं। Reliance Industries अपनी ज्वाइंट वेंचर Digital Connexion के तहत अगले 5 सालों में आंध्र प्रदेश में 1 GW AI डेटा क्षमता स्थापित करने के लिए $11 बिलियन का निवेश करने की योजना बना रही है। वहीं, Tata Group नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास अपने 'इनोवेशन सिटी' प्रोजेक्ट के लिए लगभग इतना ही $11 बिलियन का निवेश करेगा, जिसमें बड़े डेटा सेंटर शामिल होंगे। Adani Enterprises अगले दशक में महाराष्ट्र में 1 GW हाइपरस्केल डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए ₹50,000 करोड़ खर्च करने का वादा कर चुकी है।
नई नीति और विकास का अनुमान
यूनियन बजट 2026-27 में विदेशी कंपनियों के लिए 2047 तक टैक्स हॉलिडे का प्रस्ताव है, बशर्ते वे भारतीय रीसेलर के माध्यम से घरेलू ग्राहकों को भी सेवा दें। साथ ही, संबंधित विदेशी कंपनियों को सेवा देने वाली भारतीय कंपनियों के लिए 15% सेफ हार्बर मार्जिन भी पेश किया गया है। इन उपायों से उद्योग में भारी वृद्धि की उम्मीद है। उद्योग के अनुमानों के अनुसार, भारत की इंस्टॉल की गई डेटा सेंटर पावर क्षमता 2026 तक 2 GW से अधिक और 2030 तक 8 GW से अधिक हो सकती है, जिसके लिए $30 बिलियन से अधिक के कैपिटल एक्सपेंडिचर की आवश्यकता होगी। सरकार के AI मिशन 2.0 के तहत ₹10,371.92 करोड़ के आवंटन से कंप्यूटिंग पावर तक पहुंच और मजबूत होगी, जिसमें GPU क्षमता पहले ही 38,000 यूनिट तक बढ़ाई जा चुकी है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि मौजूदा $70 बिलियन के निवेश दोगुने हो सकते हैं, जो बाजार के मजबूत आत्मविश्वास को दर्शाता है। डेटा सेंटर्स को 'स्ट्रेटेजिक इंफ्रास्ट्रक्चर स्टेटस' का दर्जा भी दिया गया है, जिससे उन्हें लंबी अवधि के वित्तपोषण तक पहुंचने में आसानी होगी।
बाजार प्रदर्शन और भविष्य की राह
बड़े निवेश की घोषणाओं के बावजूद, प्रमुख खिलाड़ियों के बाजार प्रदर्शन में भिन्नता है। जनवरी 2026 के अंत तक, Reliance Industries का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹18.66 ट्रिलियन था और P/E रेशियो लगभग 22.4 था। Adani Enterprises का P/E रेशियो करीब 44.4 है, जिसका मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹23,308 करोड़ है, हालांकि कुछ स्रोतों के अनुसार यह ₹2.55 ट्रिलियन तक भी जाता है। एडवांस्ड टेक्निकल एनालिसिस के आधार पर Adani Enterprises के हालिया स्टॉक प्रदर्शन ने 'स्ट्रांग सेल' संकेत दिया है। भारत के डेटा सेंटर सेक्टर के लिए दीर्घकालिक दृष्टिकोण मजबूत है, जो AI वर्कलोड, क्लाउड एडॉप्शन और 5G रोलआउट से प्रेरित है। हालांकि, ऊर्जा की खपत और पानी के उपयोग जैसी चुनौतियों के लिए स्थायी समाधानों की आवश्यकता होगी। इकोनॉमिक सर्वे 2026 के अनुसार, भारत वैश्विक डेटा सेंटरों का केवल लगभग 3% होस्ट करता है, जो विकास की काफी गुंजाइश और एक प्रतिस्पर्धी अंतर को दर्शाता है।