सरकार का बढ़ा शिकंजा: ऑनलाइन कंटेंट पर मज़बूत कंट्रोल
India की सरकार ऑनलाइन कंटेंट पर अपनी पैनी नज़र और मज़बूत कर रही है। Ministry of Home Affairs (MHA) को अब एक नए 'सहयोग पोर्टल' (Sahyog Portal) के ज़रिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से कंटेंट हटवाने का ज़्यादा अधिकार मिला है। यह सेंट्रलाइज्ड सिस्टम सरकारी अधिकारियों, यहां तक कि पुलिस को भी, कंटेंट हटवाने के आदेश जारी करने की इजाज़त देता है, जबकि पहले यह पावर कुछ ही मंत्रालयों के पास थी।
टेक कंपनियों का विरोध: X Corp. ने ठोका कोर्ट में केस
लेकिन, India के बड़े इंटरनेट प्लेटफॉर्म्स इस बढ़ती सेंसरशिप के ख़िलाफ़ आवाज़ उठा रहे हैं। X Corp. ने सरकार के 'सहयोग पोर्टल' के ख़िलाफ़ कोर्ट में एक केस फाइल किया है। कंपनी का तर्क है कि यह पोर्टल कंटेंट ब्लॉक करने के लिए एक समानांतर सिस्टम बना रहा है, जो Information Technology Act, 2000 के सेक्शन 69A के तहत ज़रूरी सख्त कानूनी सुरक्षा उपायों को दरकिनार करता है और 2015 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले से मिले ऑनलाइन फ्री स्पीच के सिद्धांतों को कमज़ोर करता है।
कोर्ट का फैसला सरकार के पक्ष में, पर X Corp. की अपील जारी
इस कानूनी जंग में, Karnataka High Court ने सितंबर 2025 में ज़्यादातर सरकारी पक्ष का समर्थन किया। कोर्ट ने कहा कि प्लेटफॉर्म्स को कंटेंट मॉडरेशन की ज़िम्मेदारी लेनी होगी, खासकर महिलाओं के ख़िलाफ़ होने वाले अपराधों के मामलों में। X Corp. ने इस फैसले के ख़िलाफ़ अपील करने का ऐलान किया है। इसी बीच, IT Act के इंटरमीडियरी गाइडलाइन्स में 2021 में हुए अमेंडमेंट्स ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के लिए सेक्शन 79 के तहत 'सेफ हार्बर' सुरक्षा को पहले ही कम कर दिया है।
डेटा प्राइवेसी और प्रेस फ्रीडम पर बढ़ती चिंताएं
यह पूरा मामला तब और उलझ जाता है जब India के Digital Personal Data Protection Act (DPDP Act) 2023 को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट में कानूनी चुनौतियां चल रही हैं। आलोचकों का कहना है कि DPDP Act और Right to Information (RTI) Act में हुए हालिया संशोधन, प्रेस की आज़ादी पर भी रोक लगा सकते हैं। ये बदलाव पत्रकारों को संवेदनशील जानकारी छापने से पहले सरकार से प्री-अप्रूवल लेने के लिए मजबूर कर सकते हैं, जिससे जवाबदेही कम होने का डर है।
टेकडाउन रिक्वेस्ट्स का पैमाना और ट्रांसपेरेंसी का अभाव
कंटेंट हटाने के अनुरोधों (take-down requests) की संख्या भी काफी बड़ी है। X Corp. ने 2025 की पहली छमाही में लगभग 29,118 ऐसे अनुरोध मिलने की रिपोर्ट दी, जो रोज़ाना औसतन करीब 160 बैठते हैं। 'सहयोग पोर्टल' को इसी प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है, ताकि विभिन्न राज्य और केंद्रीय सरकारी एजेंसियां, साथ ही कंपनियां, इससे जुड़ सकें। हालांकि, इन टेकडाउन रिक्वेस्ट्स पर पब्लिक डेटा की कमी और RTI सवालों के सीमित जवाब, सरकार की इन बढ़ी हुई पावर्स के आसपास ट्रांसपेरेंसी को लेकर चिंताएं बढ़ाते हैं।
