India Electronics Mfg: ₹40,000 Cr ECMS स्कीम पर 'पॉलिसी अड़चनें'? मैन्युफैक्चरर्स ने MeitY से की खास मांगें

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
India Electronics Mfg: ₹40,000 Cr ECMS स्कीम पर 'पॉलिसी अड़चनें'? मैन्युफैक्चरर्स ने MeitY से की खास मांगें
Overview

India Electronics Mfg: देश के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरर्स ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के साथ **₹40,000 करोड़** की महत्वाकांक्षी इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के विस्तार को लेकर अहम बैठक की। इंडस्ट्री लीडर्स ने आगाह किया है कि कुछ बड़ी पॉलिसी और ऑपरेशनल दिक्कतें इस स्कीम के असली मकसद - डोमेस्टिक वैल्यू एडिशन बढ़ाने - को कमजोर कर सकती हैं।

### क्या हैं मुख्य चिंताएं?

बजट के बाद हुई इस अहम बैठक में, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरर्स ने साफ किया कि ₹40,000 करोड़ के ECMS एक्सपेंशन (expansion) से जो उम्मीदें हैं, वे कुछ स्ट्रक्चरल कॉस्ट प्रॉब्लम्स (structural cost problems) और ऑपरेशनल देरी के कारण प्रभावित हो सकती हैं। इंडस्ट्री प्रतिनिधियों ने सरकार के बढ़े हुए आउटले (outlay) का स्वागत करते हुए कहा कि स्कीम के उद्देश्यों - डोमेस्टिक वैल्यू एडिशन (domestic value addition) को बढ़ाने और मजबूत कैपिटल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग (capital equipment manufacturing) को बढ़ावा देने - के लिए टारगेटेड पॉलिसी रिफाइनमेंट्स (targeted policy refinements) बेहद जरूरी हैं।

### अंदरूनी 'लागत की अड़चनें'

सबसे बड़ी चिंताओं में से एक 'इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर' (inverted duty structure) है। कैपिटल इक्विपमेंट (capital equipment) के लिए जरूरी इनपुट्स (inputs) और सब-असेंबली (sub-assemblies) पर कस्टम ड्यूटी (custom duty) अक्सर उस फिनिश्ड मशीनरी से ज्यादा होती है, जिनमें ये पार्ट्स लगते हैं। यह स्थिति लोकल प्रोडक्शन को महंगा बनाती है और कॉस्ट कॉम्पिटिटिवनेस (cost competitiveness) पर बुरा असर डालती है।

इसके अलावा, बॉन्डेड वेयरहाउसिंग प्रोविजन्स (bonded warehousing provisions) से भी लागत बढ़ रही है। नॉन-रेजिडेंट वेयरहाउस के लिए 2% के 'सेफ-हार्बर मार्जिन' (safe-harbour margin) के कारण टैक्स लगने के बाद करीब 0.7% का अतिरिक्त खर्च आता है। इंडस्ट्री का कहना है कि यह एक बड़ा बोझ है और इसे पूरी तरह से एग्जेम्प्ट (exempt) किया जाना चाहिए ताकि कॉम्पिटिटिव पैरिटी (competitive parity) बनी रहे।

### लॉन्ग-TERM विजन की जरूरत

कैपिटल गुड्स (capital goods) के विदेशी सप्लायर्स के लिए 5 साल की टैक्स छूट का स्वागत हुआ, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में लंबे जेस्टेशन साइकल्स (longer gestation cycles) होते हैं। इसलिए, इंडस्ट्री चाहती है कि इन इंसेंटिव्स (incentives) को लंबी अवधि के लिए अलाइन (align) किया जाए, जिससे इन्वेस्टमेंट को लेकर ज्यादा निश्चितता मिले और डीप टेक्नोलॉजी इंटीग्रेशन (deep technology integration) को प्रोत्साहन मिले। वियतनाम और चीन जैसे देश अक्सर ज़्यादा लंबी या फ्लेक्सिबल इंसेंटिव स्कीमें देते हैं, जो भारत को एक असमान मैदान में खड़ा करती हैं।

### वैल्यू एडिशन और ऑपरेशनल चुनौतियां

ECMS एक्सपेंशन की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि क्या सरकार इन सिस्टमैटिक कॉस्ट डिसएडवांटेजेस (systematic cost disadvantages) को दूर कर पाती है। अगर इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर जैसी समस्याएं बनी रहीं, तो डोमेस्टिक वैल्यू एडिशन (domestic value addition) को बढ़ाना मुश्किल होगा और स्कीम का असल मकसद अधूरा रह जाएगा।

ऑपरेशनल हर्डल्स (operational hurdles) भी कम नहीं हैं। मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस सेट करने और उसे स्थिर करने के लिए जरूरी विदेशी टेक्नीशियंस (foreign technicians) के वीजा मिलने में देरी प्रोजेक्ट्स को लेट कर सकती है और निवेशकों का भरोसा कम कर सकती है। Dixon Technologies (DIXON) जैसी बड़ी कंपनियाँ, जिनका P/E 48.6x है, इस इकोसिस्टम की अड़चनों से प्रभावित हो सकती हैं, क्योंकि उन्हें अपनी उम्मीदों के मुताबिक ग्रोथ हासिल करने के लिए इन सभी पर काबू पाना होगा।

### भविष्य का रास्ता

इंडस्ट्री की 'कैलिब्रेटेड पॉलिसी एडजस्टमेंट्स' (calibrated policy adjustments) की मांग यह दर्शाती है कि केवल फंड का भारी-भरकम आउटले (financial outlay) पर्याप्त नहीं है। ECMS की भविष्य की सफलता MeitY की इन जटिल फिस्कल (fiscal) और ऑपरेशनल मुद्दों को सुलझाने की क्षमता पर टिकी है। जब तक इन बारीकियों को ठीक नहीं किया जाता, तब तक डीप-कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग (deep-component manufacturing) की ओर सेक्टर का ट्रांजिशन (transition) एक मुश्किल राह पर रहेगा।

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