EV बैटरी की मांग में तूफानी उछाल
भारत का इलेक्ट्रिक व्हीकल बैटरी मार्केट जबरदस्त ग्रोथ के लिए तैयार है. इंडिया एनर्जी स्टोरेज अलायंस (IESA) के एक नए अध्ययन में यह अनुमान लगाया गया है कि साल 2032 तक देश में EV बैटरी की मांग 10 गुना बढ़कर 200 GWh तक पहुंच सकती है. यह भविष्यवाणी भारत को वैश्विक ऑटोमोटिव सप्लाई चेन में एक प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
लोकलाइजेशन और सप्लाई चेन पर रणनीतिक फोकस
IESA की यह रिपोर्ट, जो जुलाई में 12th India Energy Storage Week (IESW) में जारी की जाएगी, इस बात पर जोर देती है कि भारत के EV सेक्टर में सिर्फ व्हीकल असेंबली से कहीं बढ़कर अवसर हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपोनेंट्स का स्थानीयकरण (Localization) और जटिल सप्लाई चेन का विकास भारत को एक मजबूत वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की कुंजी है.
मार्केट का बदलना स्वरूप और ग्रोथ ड्राइवर्स
भारत का EV मार्केट तेजी से बदल रहा है. जो कभी सरकारी पहलों पर निर्भर था, वह अब एक पूर्ण इंडस्ट्रियल सिस्टम में विकसित हो रहा है. इसमें बैटरी, मोटर, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, एडवांस्ड केमिस्ट्री और बड़े पैमाने पर स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग शामिल हैं, जिन्हें मजबूत सप्लाई चेन इन्वेस्टमेंट का साथ मिल रहा है.
नई टेक्नोलॉजी और सेगमेंट्स का उदय
फिलहाल इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स बिक्री में सबसे आगे हैं, लेकिन अगले चरण में इलेक्ट्रिक पैसेंजर कारें और लाइट कमर्शियल व्हीकल्स (LCVs) से ग्रोथ की उम्मीद है. रिपोर्ट प्रमुख टेक्नोलॉजिकल बदलावों पर भी प्रकाश डालती है. जहां टू-व्हीलर्स के लिए NMC केमिस्ट्री सबसे आम है, वहीं लिथियम आयरन फॉस्फेट (LFP) अन्य सेगमेंट्स में अधिक लोकप्रिय हो रही है. साल 2032 तक LMFP, सॉलिड-स्टेट और सोडियम-आयन बैटरी पर रिसर्च भी फोकस का एक अहम हिस्सा है.
इन्वेस्टर्स और OEMs के लिए गाइडेंस
'India EV & EV Component Market Outlook 2025-2034' नाम की यह रिपोर्ट ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (OEMs) और इन्वेस्टर्स जैसे सभी प्रमुख हितधारकों को इन उभरते अवसरों का सर्वोत्तम लाभ उठाने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार की गई है. यह मार्केट एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है, जो इस सेक्टर के लिए बड़े भविष्य के विकास का संकेत दे रहा है.
