India Deep Tech: इनोवेशन का दम, पर बड़े 'स्पेशलिस्ट फंड' की कमी! US-China से पिछड़ रहा भारत

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AuthorAditya Rao|Published at:
India Deep Tech: इनोवेशन का दम, पर बड़े 'स्पेशलिस्ट फंड' की कमी! US-China से पिछड़ रहा भारत
Overview

इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में यह बात सामने आई कि भारत का डीप टेक सेक्टर इनोवेशन में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, जिसका मुख्य कारण 'कम खर्च में बेहतर करने की आदत' (Frugality) और शानदार इंजीनियरिंग है। लेकिन, इस सेक्टर को ग्लोबल लेवल पर ले जाने के लिए ग्रोथ-स्टेज कैपिटल (Growth-Stage Capital) और बड़े 'स्पेशलिस्ट फंड' की भारी कमी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है, जो हमें अमेरिका और चीन जैसे देशों से काफी पीछे धकेल रही है।

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कम खर्च में इनोवेशन, पर ग्लोबल रेस में रुकावट

इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान एक्सपर्ट्स ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत की 'कम खर्च में बेहतर करने की आदत' और मुश्किलों से निपटने की ज़बरदस्त इंजीनियरिंग क्षमता डीप टेक सेक्टर में बड़े इनोवेशन की नींव रख रही है। यह 'जुगाड़' वाली सोच ही कंपनियों को कम लागत में ज़्यादा असरदार टेक्नोलॉजी बनाने में मदद कर रही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2025 में AI से जुड़ी कंपनियों को $1.22 अरब की फंडिंग मिली, जो पिछले साल के मुकाबले 58% ज़्यादा है। वहीं, डीप टेक सेक्टर में 2016 से अब तक करीब $28 अरब का इन्वेस्टमेंट हो चुका है। AI कंपनियों का कुल वेंचर कैपिटल (VC) फंडिंग में हिस्सा बढ़कर 12.3% हो गया है, जो 2020 में सिर्फ़ 4.5% था।

अमेरिका और चीन से बड़ी खाई

हालांकि, जब ग्लोबल लेवल की बात आती है, तो भारत काफी पीछे है। अमेरिका ने डीप टेक में कुल $591 अरब जुटाए हैं, जबकि चीन ने $99.1 अरब। भारत का आंकड़ा पिछले दशक में सिर्फ़ $27.9 अरब रहा है। चीन अपने कुल VC फंडिंग का 35% डीप टेक में लगाता है, जबकि भारत का यह आंकड़ा महज़ 15% के आसपास है।

2025 में भारत का कुल VC फंडिंग थोड़ा कम होकर $9.9 अरब रहा, लेकिन AI स्टार्टअप्स ने अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई। यह अंतर बताता है कि दूसरे देश डीप टेक को कितनी ज़्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं।

ग्रोथ-स्टेज फंडिंग और स्पेशलिस्ट फंड की कमी

सबसे बड़ी अड़चन ग्रोथ-स्टेज की फंडिंग में है। शुरुआती दौर (Early-Stage) में भले ही पैसा आ रहा हो, लेकिन जब कंपनियों को बड़े पैमाने पर विस्तार (Scaling) करना होता है, तो उन्हें बड़ी रकम जुटाने में दिक्कत आती है। भारत में ऐसे बड़े 'स्पेशलिस्ट डीप टेक फंड' की भी भारी कमी है जो कंपनियों को लगातार कई राउंड्स में फाइनेंस कर सकें। इस वजह से कई भारतीय स्टार्टअप्स को ग्लोबल लेवल पर जाने के लिए विदेशी फंडिंग पर ही निर्भर रहना पड़ता है।

स्ट्रक्चरल दिक्कतें और भविष्य की राह

भारत में डीप टेक के लिए बाज़ार तैयार होने में समय लगता है। साथ ही, इनवेस्टर्स अक्सर जल्दी रिटर्न की उम्मीद करते हैं, जबकि डीप टेक प्रोजेक्ट्स में 7-10 साल तक का समय लग सकता है। इस रिस्क से बचने की प्रवृत्ति और लोकल VC की गहराई कम होने के कारण, भारतीय स्टार्टअप्स को अमेरिका और चीन के ज़्यादा फंडेड प्रतिद्वंद्वियों से मुकाबला करना पड़ता है।

सरकार इस दिशा में 'RDI फंड' जैसे ₹1 लाख करोड़ के इनिशिएटिव और कंपनियों के लिए स्टार्टअप रिकग्निशन पीरियड को 20 साल तक बढ़ाकर मदद करने की कोशिश कर रही है। लेकिन, इस सेक्टर की असली ग्रोथ के लिए लंबी अवधि के लिए तैयार, जोखिम लेने वाले कैपिटल (Patient Capital) की सख़्त ज़रूरत है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.