India Construction: AI का बोलबाला, पर स्किल्स और लागत की बड़ी रुकावटें!

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AuthorMehul Desai|Published at:
India Construction: AI का बोलबाला, पर स्किल्स और लागत की बड़ी रुकावटें!
Overview

भारत का कंस्ट्रक्शन (construction) सेक्टर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (machine learning) को तेजी से अपना रहा है, जिससे प्रोजेक्ट्स (projects) में एफिशिएंसी (efficiency) बढ़ रही है और लागत (cost) कम हो रही है। भारतीय कंपनियाँ एशिया-पैसिफिक (Asia-Pacific) के कई देशों से आगे निकल रही हैं। हालांकि, इस एडवांसमेंट (advancement) में तीन बड़ी बाधाएँ हैं: कुशल श्रमिकों की कमी (skilled workers shortage), टेक्नोलॉजी (technology) की ऊंची लागत (high tech costs) और इंडस्ट्री (industry) का बिखरा हुआ स्वरूप (fragmented nature)।

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AI की लहर: कंस्ट्रक्शन में डिजिटल क्रांति

भारत का कंस्ट्रक्शन (construction) सेक्टर तेजी से डिजिटल हो रहा है, जहां AI प्रोजेक्ट्स (projects) को सुचारू और स्मार्ट बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है। कंपनियाँ प्रोजेक्ट मैनेजमेंट (project management), कॉस्ट कंट्रोल (cost control) और निर्माण की गति बढ़ाने के लिए AI और मशीन लर्निंग (machine learning) की ओर रुख कर रही हैं। दिलचस्प बात यह है कि भारतीय फर्म्स (firms) एशिया-पैसिफिक (Asia-Pacific) में नई डिजिटल टेक (digital tech) अपनाने के मामले में आगे हैं, औसतन 8.6 अलग-अलग टूल्स (tools) का इस्तेमाल कर रही हैं। डेटा एनालिटिक्स (data analytics), क्लाउड सॉफ्टवेयर (cloud software) और मोबाइल एप्स (mobile apps) जैसे टूल्स (tools) का खूब इस्तेमाल हो रहा है, वहीं AI और मशीन लर्निंग (machine learning) का भी दबदबा बढ़ रहा है। Larsen & Toubro और Tata Projects जैसी बड़ी कंपनियाँ भी AI टूल्स (tools) का इस्तेमाल कर रही हैं, जो इंडस्ट्री (industry) में बड़े बदलाव का संकेत देता है।

डिजिटल खाई को पाटना: चुनौतियाँ और बाधाएँ

हालांकि, भारत के कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री (construction industry) में AI को एक आम टूल (tool) बनाने में कई वास्तविक समस्याएँ हैं। सबसे बड़ी रुकावट सही डिजिटल स्किल्स (digital skills) वाले वर्कर्स (workers) की भारी कमी है। कई कंपनियों को यह भी नहीं पता कि उन्हें किन स्किल्स (skills) की जरूरत है या वे AI को बहुत महंगा मानती हैं। खुद कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री (construction industry) भी काफी फ्रैग्मेंटेड (fragmented) है, जिसमें बड़ी कंपनियों के साथ-साथ कई छोटी फर्में भी शामिल हैं। इससे सभी के लिए नई टेक (tech) को समान रूप से अपनाना मुश्किल हो जाता है, जिससे एक ऐसी खाई बन सकती है जहां केवल बड़ी कंपनियाँ ही एडवांस्ड AI (advanced AI) का खर्च उठा पाएंगी। डेटा क्वालिटी (data quality), उपलब्धता और स्पष्ट नियमों (clear rules) की कमी भी इस प्रक्रिया को धीमा कर रही है, जिसका मतलब है कि ज्यादातर कंपनियाँ अभी भी AI के साथ एक्सपेरिमेंट (experiment) कर रही हैं।

असली तस्वीर: इम्प्लीमेंटेशन रिस्क (Implementation Risk) और शंकाएँ

कंस्ट्रक्शन (construction) के लिए AI के फायदे भले ही स्पष्ट हों, लेकिन इसे असलियत में लागू करने में बड़े जोखिम (risks) और सीमाएँ हैं। दुनिया भर में, बहुत कम कंस्ट्रक्शन (construction) कंपनियाँ वास्तव में AI का व्यापक रूप से इस्तेमाल कर रही हैं; ज्यादातर अभी भी इसकी टेस्टिंग (testing) कर रही हैं या इसका बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं कर रही हैं। यह सतर्कता ऊंची लागत (high costs), पर्याप्त डेटा (data) की कमी और पुराने सिस्टम्स (systems) में AI को इंटीग्रेट (integrate) करने की कठिनाई के कारण है। AI से मिले नतीजे (outputs) अक्सर सटीकता के लिए इंसानी जांच (human checks) की मांग करते हैं, जिसका मतलब है कि AI एक सहायक (helper) की तरह काम करता है, न कि पूरी तरह से स्वतंत्र टूल (independent tool) के रूप में। भारत में AI इन्वेस्टमेंट (AI investment) बढ़ रहा है, लेकिन यह देश ग्लोबल AI फंडिंग (global AI funding) ट्रेंड्स (trends) में बड़ी भूमिका नहीं निभा रहा था। इससे पता चलता है कि भारत में प्रैक्टिकल (practical), स्टेप-बाय-स्टेप (step-by-step) AI उपयोगों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, बजाय इसके कि अत्याधुनिक AI मॉडल्स (AI models) विकसित किए जाएँ। इसलिए, AI से एफिशिएंसी (efficiency) में सुधार की उम्मीद है, लेकिन इसके पूरे असर को वास्तविक दुनिया की समस्याओं और बेहतर सपोर्ट सिस्टम (support systems) की आवश्यकता से रोका जा रहा है।

भविष्य की राह

AI भारत के कंस्ट्रक्शन सेक्टर (construction sector) में अपनी जगह बनाता रहेगा, क्योंकि इसके ऑपरेशन्स (operations) को बेहतर बनाने, साइट्स (sites) को सुरक्षित बनाने और पैसे बचाने की क्षमता स्पष्ट है। लेकिन इस ग्रोथ (growth) को बनाए रखने के लिए, इंडस्ट्री (industry) को प्रमुख मुद्दों से निपटना होगा। इसमें वर्कर्स (workers) को नए स्किल्स (skills) में ट्रेनिंग (training) देना और टेक्नोलॉजी (technology) को व्यापक रूप से अपनाने के लिए एक स्पष्ट योजना बनाना शामिल है। लक्ष्य सिर्फ AI को एक टूल (tool) के रूप में इस्तेमाल करने से आगे बढ़कर, इसे उन कंपनियों के लिए एक कोर स्ट्रेंथ (core strength) बनाना है जो कॉम्पिटिटिव (competitive) बने रहना चाहती हैं। यह स्मार्टर (smarter), अधिक सस्टेनेबल (sustainable) जगहों के निर्माण में मदद करेगा। इसे हकीकत बनाने के लिए, सरकारी संस्थाओं (government bodies), स्कूलों (schools) और इंडस्ट्री (industry) की कंपनियों (companies) को मिलकर स्किल्स (skills) का निर्माण करना होगा और एक ऐसा माहौल बनाना होगा जहां AI को अधिक व्यापक और निष्पक्ष रूप से अपनाया जा सके।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.