India Smartphone PLI: सरकार की बड़ी तैयारी! स्मार्टफोन इंडस्ट्री के लिए दूसरा PLI स्कीम लाने पर विचार

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AuthorMehul Desai|Published at:
India Smartphone PLI: सरकार की बड़ी तैयारी! स्मार्टफोन इंडस्ट्री के लिए दूसरा PLI स्कीम लाने पर विचार
Overview

भारत सरकार स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा कदम उठाने पर विचार कर रही है। खबर है कि सरकार इस सेक्टर के लिए एक **दूसरी प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेटिव (PLI) स्कीम** लाने की सोच रही है। यह अपने आप में एक खास कदम होगा, क्योंकि सरकार आम तौर पर किसी सेक्टर के लिए एक से ज्यादा PLI स्कीम नहीं लाती।

स्मार्टफोन PLI पर सरकार का नया दांव

सरकार इस समय अपनी प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेटिव (PLI) स्कीम को लेकर नए सिरे से विचार कर रही है, खासकर स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार एक दूसरी PLI स्कीम लॉन्च करने के लिए सैद्धांतिक रूप से तैयार है। यह इसलिए भी खास है क्योंकि आमतौर पर किसी सेक्टर को एक ही PLI स्कीम का लाभ मिलता है, लेकिन वैश्विक व्यापार में आ रहे बदलावों और घरेलू इंडस्ट्री के सामने खड़ी चुनौतियों को देखते हुए सरकार इसमें अपवाद करने पर विचार कर रही है। मौजूदा PLI स्कीम अगले महीने खत्म होने वाली है, और नई स्कीम को अप्रैल से शुरू करना होगा ताकि इंडस्ट्री की रफ्तार बनी रहे। सरकार का मानना है कि सेक्टर-विशिष्ट मुद्दों के लिए नियमों में ढील देना जरूरी हो सकता है।

चीन से मुकाबला और बढ़ी मुश्किलें

वैश्विक व्यापार नीतियों में हालिया बदलावों ने भारतीय स्मार्टफोन निर्माताओं के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। खासकर, चीनी एक्सपोर्ट पर जीरो टैरिफ (शून्य शुल्क) लगने से भारतीय कंपनियों को मिलने वाला बड़ा कॉम्पिटिटिव एज (प्रतिस्पर्धी लाभ) लगभग खत्म हो गया है। हालांकि, चीन की तुलना में भारत की मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट का अंतर कुछ कम हुआ है, जो कुछ साल पहले 18-19% था, अब 11-14% के करीब है, लेकिन यह अब भी बिना सरकारी मदद के मुकाबला करने के लिए बड़ा बैरियर है। चीन पर अमेरिकी की ओर से लगाए गए टैरिफ में नरमी से भारत की मोल-भाव करने की ताकत कम हुई है। इस स्थिति में, अगर लगातार इंसेंटिव नहीं मिलते तो इस सेक्टर में लगी इन्वेस्टमेंट पर असर पड़ सकता है। वैसे, भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर 2025 में 44 अरब डॉलर से अधिक का एक्सपोर्ट कर चुका है, जिसमें स्मार्टफोन सबसे बड़ा हिस्सा है।

एक्सपोर्ट में टॉप पर स्मार्टफोन सेक्टर

स्मार्टफोन सेक्टर का महत्व इस बात से भी पता चलता है कि यह भारत का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट सेक्टर बन गया है। 2025 में इसने 30.13 अरब डॉलर का एक्सपोर्ट किया, जिसने ऑटोमोटिव डीजल फ्यूल जैसे सेक्टर को भी पीछे छोड़ दिया। इस सफलता में Apple का योगदान बहुत बड़ा है, जिसने 2025 में भारत से 23 अरब डॉलर के स्मार्टफोन एक्सपोर्ट किए, जो कुल निर्यात का लगभग 76% है। अमेरिका इन एक्सपोर्ट्स के लिए सबसे बड़ा मार्केट बना हुआ है। PLI स्कीम जैसे सरकारी इंसेंटिव्स ने इस ग्रोथ को बढ़ाने में मदद की है, जिससे इन्वेस्टमेंट बढ़ा है और प्रोडक्शन में इजाफा हुआ है। सरकार चाहती है कि यह ग्रोथ मोमेंटम बना रहे ताकि इंडस्ट्री को कोई झटका न लगे। यह भी जानना जरूरी है कि 2026-27 के यूनियन बजट में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को और मजबूत करने पर जोर दिया गया है। इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के लिए ₹40,000 करोड़ का प्रावधान बढ़ाया गया है, और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 भी लॉन्च किया गया है।

बड़ी कंपनियों का वैल्यूएशन (Valuation) कैसा है?

भारत के स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट सीन में कुछ बड़ी ग्लोबल कंपनियां भी शामिल हैं। Apple Inc. (AAPL) का मार्केट कैप 4.01 ट्रिलियन डॉलर है और इसका P/E रेश्यो 34.70 है। यह 26 फरवरी 2026 तक के आंकड़े हैं। Samsung Electronics (005930.KS) का मार्केट कैप 1414.87 ट्रिलियन KRW है और P/E 28.74 है, जो दिसंबर 2025 तक के नतीजों पर आधारित है। Foxconn (2317.TW), जो एक बड़ी कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर है, का P/E रेश्यो 17.0 और मार्केट कैप 3.39 ट्रिलियन TWD है। वहीं, भारत की लोकल कंपनी Dixon Technologies (India) Ltd (NSE: DIXON) जैसी कंपनियां भी प्रोडक्शन में अहम भूमिका निभा रही हैं। Lava International, एक और भारतीय ब्रांड, जो प्राइवेट है, उसका अनुमानित मार्केट कैप ₹2,597 करोड़ और P/E रेश्यो लगभग 70.3 है।

इंसेंटिव्स और लागत का खेल: आगे क्या मुश्किल हो सकती है?

स्मार्टफोन एक्सपोर्ट में अच्छी ग्रोथ के बावजूद, कुछ खतरे अभी भी बने हुए हैं जो भारत की लॉन्ग-टर्म कॉम्पिटिटिवनेस को प्रभावित कर सकते हैं। PLI स्कीम जैसी सब्सिडी पर लगातार निर्भरता फिस्कल सस्टेनेबिलिटी (वित्तीय स्थिरता) को लेकर चिंता पैदा करती है। क्या इंसेंटिव खत्म होने के बाद इंडस्ट्री खुद सक्षम हो पाएगी? Apple का PLI विंडो मार्च 2026 में खत्म हो रहा है, और उसका एक्सपोर्ट में बड़ा योगदान सेक्टर को पॉलिसी बदलावों के प्रति संवेदनशील बनाता है। इसके अलावा, भले ही भारत ने चीन के साथ लागत का अंतर कम कर लिया हो, लेकिन 11-14% का मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट डिसएडवांटेज अभी भी बना हुआ है, जिससे बिना सरकारी मदद के मुकाबला करना मुश्किल है। वैश्विक व्यापार की स्थिति भी अनिश्चित है; अमेरिका-चीन संबंधों में सुधार से भारत के 'China+1' एडवांटेज पर असर पड़ सकता है और लागतें फिर से बदल सकती हैं। भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर सुधरा है, लेकिन पोर्ट्स और लॉजिस्टिक्स की दिक्कतें अब भी हैं, जो प्रोडक्शन को तेजी से बढ़ाने में बाधा डाल सकती हैं। सरकार अब कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग पर ध्यान दे रही है, जिसके लिए ECMS और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 में बड़ी राशि रखी गई है। लेकिन लोकल वैल्यू एडिशन, खासकर हाई-एंड कंपोनेंट्स के लिए, एक लंबी प्रक्रिया है, क्योंकि अभी भी करीब दो-तिहाई मोबाइल फोन कंपोनेंट्स इंपोर्ट किए जाते हैं।

भविष्य की राह: वैल्यू चेन को और मजबूत करना

2026 के बजट में सरकार का इरादा साफ है कि वह सिर्फ असेंबली-आधारित मैन्युफैक्चरिंग से आगे बढ़कर इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में गहरी वैल्यू क्रिएशन की ओर बढ़ना चाहती है। कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग और सेमीकंडक्टर मिशन के लिए बजट बढ़ाने का मतलब है कि सरकार सप्लाई चेन को सुरक्षित करना और इम्पोर्ट पर निर्भरता कम करना चाहती है। मौजूदा PLI स्कीम प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट बढ़ाने में कामयाब रही है, लेकिन लॉन्ग-टर्म सफलता के लिए कंपोनेंट्स और स्वदेशी डिजाइन कैपेबिलिटीज़ का एक मजबूत इकोसिस्टम बनाना जरूरी होगा। डोमेस्टिक डिमांड और ग्लोबल डाइवर्सिफिकेशन की वजह से यह सेक्टर आगे भी ग्रो करेगा, लेकिन इसे अपनी कॉस्ट-कॉम्पिटिटिवनेस बढ़ाने और बाहरी सपोर्ट पर निर्भरता कम करने की जरूरत है।

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