बजट 2026: भविष्य की तकनीक पर सरकार का फोकस! AVGC, क्वांटम को बम्पर फंड, सुपरकंप्यूटिंग पर भारी कैंची

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AuthorNeha Patil|Published at:
बजट 2026: भविष्य की तकनीक पर सरकार का फोकस! AVGC, क्वांटम को बम्पर फंड, सुपरकंप्यूटिंग पर भारी कैंची
Overview

Union Budget 2026-27 ने भविष्य की टेक्नोलॉजी को लेकर एक बड़ा स्ट्रेटेजिक कदम उठाया है। सरकार ने एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (AVGC) सेक्टर और नेशनल क्वांटम मिशन में फंड बढ़ाया है, वहीं नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन के बजट में भारी कटौती की गई है। साइंस और टेक्नोलॉजी मिनिस्ट्री को कुल मिलाकर बड़ा फंड मिला है, जिसमें AI, डीप टेक और बायोटेक्नोलॉजी में R&D पर जोर दिया गया है।

Union Budget 2026-27 में सरकार ने टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने और इनोवेशन को बढ़ाने का स्पष्ट संकेत दिया है। यह बजट साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथमेटिक्स (STEM) के इस्तेमाल पर जोर देता है, और 'युवा शक्ति' को राष्ट्रीय विकास का इंजन बनाने का लक्ष्य रखता है। बजट में संसाधनों का रणनीतिक पुनर्गठन किया गया है, जिसमें उभरते क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है और मौजूदा महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश कोปรับ (adjust) किया गया है।

बढ़ते एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (AVGC) सेक्टर, जिसे 'ऑरेंज इकोनॉमी' भी कहा जाता है, को इस बजट में बड़ा सहारा मिला है। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने इस सेक्टर की तेजी से बढ़त का जिक्र किया और 2030 तक 20 लाख प्रोफेशनल्स की मांग का अनुमान लगाया। इसे पूरा करने के लिए, बजट में देश भर के 15,000 सेकेंडरी स्कूलों और 500 कॉलेजों में AVGC कंटेंट क्रिएटर लैब्स स्थापित करने के लिए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज, मुंबई को सपोर्ट देने का ऐलान किया गया है। इससे स्किल की कमी को दूर किया जाएगा और क्रिएटिव इंडस्ट्रीज को बढ़ावा मिलेगा। इसी के साथ, प्लैनेटरी साइंसेज में भी बड़ा निवेश किया गया है, जिसमें नेशनल लार्ज सोलर टेलीस्कोप और नेशनल लार्ज ऑप्टिकल इन्फ्रारेड टेलीस्कोप की स्थापना, और हिमालयन चंद्र टेलीस्कोप व कॉसमॉस2 प्लैनेटेरियम को अपग्रेड करना शामिल है।

नेशनल क्वांटम मिशन (National Quantum Mission) के लिए फंड में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है, जो पिछले साल के अनुमानित ₹600 करोड़ से बढ़कर ₹900 करोड़ हो गया है। यह भारत की एडवांस्ड कंप्यूटिंग और सिक्योरिटी टेक्नोलॉजीज के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इसके साथ ही, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीप टेक को बड़ा बढ़ावा मिला है। डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (DST) को कुल ₹28,049.32 करोड़ मिले हैं, जिसमें से ₹20,000 करोड़ रिसर्च, डेवलपमेंट और इनोवेशन (RDI) स्कीम के लिए रखे गए हैं। यह फंड AI, डीप टेक और बायोटेक्नोलॉजी में प्राइवेट सेक्टर की लीडरशिप वाली इनोवेशन को गति देगा।

दूसरी ओर, नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM) के बजट में भारी कटौती की गई है। पिछले साल के अनुमानित ₹265 करोड़ से घटाकर इसे महज़ ₹0.01 करोड़ कर दिया गया है। हालांकि पिछले साल के लिए संशोधित अनुमान ₹535 करोड़ था, यह कटौती दिखाती है कि सरकार अब क्वांटम और AI जैसे टारगेटेड रिसर्च इनिशिएटिव्स पर ज्यादा ध्यान केंद्रित कर रही है, बजाय बड़े पैमाने पर हाई-परफॉरमेंस कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के। नेशनल जियोस्पेशियल मिशन का आवंटन ₹100 करोड़ पर स्थिर है। कुल मिलाकर, मिनिस्ट्री ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के लिए 2026-27 का कुल आवंटन ₹38,260.94 करोड़ है, जो वैज्ञानिक अनुसंधान और विकास के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

बजट की यह वित्तीय रणनीति स्पष्ट रूप से भविष्य की टेक्नोलॉजी पर दांव लगा रही है। AVGC सेक्टर में बड़ी बढ़ोतरी और क्रिएटिव लैब्स का विस्तार, भारत की 'ऑरेंज इकोनॉमी' और रोजगार में बड़ा योगदान देगा। क्वांटम मिशन में बढ़ा हुआ फंड, सुरक्षित कम्युनिकेशन से लेकर एडवांस्ड कंप्यूटेशन तक में क्वांटम टेक्नोलॉजी का उपयोग करने के वैश्विक प्रयासों के साथ जुड़ा है। सुपरकंप्यूटिंग के बजाय क्वांटम और AI पर यह फोकस, अत्याधुनिक रिसर्च और प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी को बढ़ावा देने की एक स्ट्रेटेजिक दिशा दिखाता है। AI और डीप टेक के लिए भारी R&D फंड, पारंपरिक ग्रांट से परे जाकर बड़े पैमाने पर इनोवेशन को गति देने का एक विकसित दृष्टिकोण दर्शाता है। हालांकि, नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन में भारी कटौती, भारत की हाई-परफॉरमेंस कंप्यूटिंग क्षमता और बड़े पैमाने पर सिमुलेशन (जैसे क्लाइमेट मॉडलिंग) करने की उसकी क्षमता पर सवाल खड़े करती है। यह फंडिंग पुनर्गठन एक सोची-समझी रणनीति है, जो क्वांटम और AI की परिवर्तनकारी क्षमता पर भरोसा जता रही है।

कुल मिलाकर, बजट का STEM एजुकेशन और स्किल्स, खासकर AVGC डोमेन में, पर जोर भविष्य के लिए एक तैयार वर्कफोर्स बनाने का लक्ष्य रखता है। AI और डीप टेक के लिए R&D का बड़ा आवंटन प्राइवेट सेक्टर के निवेश और इनोवेशन को बढ़ावा देगा, जिससे नए स्टार्टअप्स और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी का एक नया वेव आने की उम्मीद है। हालांकि सुपरकंप्यूटिंग फंड में कमी से मौजूदा प्रोजेक्ट्स का पुनर्मूल्यांकन करना पड़ सकता है, पर वैज्ञानिक अनुसंधान बजट में कुल बढ़ोतरी और उभरती टेक्नोलॉजीज पर रणनीतिक फोकस, भारत के तकनीकी विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए एक दीर्घकालिक विजन का संकेत देते हैं। सरकार की रणनीति Disruptive Innovation को बढ़ावा देने की ओर झुकी हुई है, जो रिसर्च और डेवलपमेंट को भविष्य के आर्थिक चालकों और राष्ट्रीय सुरक्षा की प्राथमिकताओं के साथ जोड़ती है।

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