सरकारी बूस्ट टेलीकॉम सेक्टर को: कैपिटल इन्वेस्टमेंट स्कीम में 'सुधार' की कसौटी पर मिलेंगे फंड, 'राइट ऑफ वे' की राहें होंगी आसान

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AuthorNeha Patil|Published at:
सरकारी बूस्ट टेलीकॉम सेक्टर को: कैपिटल इन्वेस्टमेंट स्कीम में 'सुधार' की कसौटी पर मिलेंगे फंड, 'राइट ऑफ वे' की राहें होंगी आसान
Overview

भारत सरकार देश के टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठा रही है। स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट (SASCI) स्कीम में अहम सुधार किए गए हैं, जिसका सीधा असर राज्यों को मिलने वाले कैपिटल इन्वेस्टमेंट फंड्स पर पड़ेगा। खास तौर पर "राइट ऑफ वे" (RoW) यानी इंफ्रा निर्माण की मंजूरी से जुड़े नियमों को आसान बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

राज्यों का प्रदर्शन तय करेगा फंड का रास्ता

स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट (SASCI) स्कीम के तहत दिए जाने वाले फंड का लगभग 60% हिस्सा राज्यों की परफॉरमेंस और तय सुधारों को पूरा करने पर निर्भर करेगा। राज्यों को हर साल दिसंबर तक तय किए गए माइलस्टोन को पूरा करना होगा। सेंट्रल लाइन मिनिस्ट्री इन रिपोर्ट्स की जांच करेंगी, जिसके बाद बाकी फंड जारी किए जाएंगे। इसका सीधा मतलब है कि कैपिटल इन्वेस्टमेंट का पैसा जमीनी हकीकत से जुड़ेगा, जैसे कि टेलीकॉम टावर लगाना और फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क बिछाना। अगर राज्य जरूरी सुधारों, जैसे RoW अप्रूवल में तेजी लाने में नाकाम रहते हैं, तो उन्हें ये इंसेंटिव-आधारित फंड नहीं मिलेंगे और भविष्य में फंड आवंटन में कटौती हो सकती है। सरकार ने फाइनेंशियल ईयर 27 (FY27) के लिए ₹67,000 करोड़ का बजट अनुमानित किया है, जिसमें यह उम्मीद साफ है कि फंड का इस्तेमाल पिछली परफॉरमेंस और सुव्यवस्थित फंक्शन के आधार पर होगा।

टेलीकॉम इंफ्रा की बाधाओं को दूर करने की कोशिश

देशभर में टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर के तेजी से विस्तार में "राइट ऑफ वे" (RoW) यानी सरकारी जमीन या संपत्ति पर इंफ्रा बनाने की मंजूरी से जुड़ी अड़चनें एक बड़ी बाधा रही हैं। इससे प्रोजेक्ट्स में देरी और लागत बढ़ जाती है। यह नया रिफॉर्म देशभर में इन प्रक्रियाओं को स्टैंडर्डाइज और तेज करने का लक्ष्य रखता है, ताकि टेलीकॉम नेटवर्क का विस्तार, खासकर दूरदराज और कम सेवा वाले इलाकों में, आसानी से हो सके। फाइनेंशियल ईयर 26 (FY26) में माइनिंग सेक्टर को पांच प्रमुख सुधार क्षेत्रों के साथ शामिल किया गया था। अब FY27 के लिए नए सेक्टर की पहचान के लिए मंत्रालयों के साथ बातचीत चल रही है, जिसमें टेलीकॉम सेक्टर भी शामिल हो सकता है। यह सीधा 'विकसित भारत' विजन के अनुरूप है, जो आर्थिक आत्मनिर्भरता और विकास के लिए एडवांस्ड डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को प्राथमिकता देता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत के टेलीकॉम सेक्टर में डेटा सर्विसेज की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है, लेकिन लंबे समय तक इन्वेस्टमेंट को बनाए रखने के लिए पॉलिसी सपोर्ट और बिजनेस को आसान बनाना बेहद जरूरी है।

आपसी जवाबदेही और भविष्य के इंसेंटिव्स

सरकारी स्कीम्स में हमेशा की तरह, राज्यों को अपनी तरफ से मैचिंग शेयर (matching share) देना होगा, जिससे इस पहिये में उनकी हिस्सेदारी और जवाबदेही बनी रहे। अभी के लिए, ₹95,600 करोड़ का आवंटन सेंट्रल कैलकुलेशन के आधार पर किया गया है, और राज्यों से उनकी हिस्सेदारी की उम्मीद है। फंड के अलावा, राज्यों का यह भी काम है कि वे जमीनी स्तर पर काम को सख्ती से लागू करें, सही हिसाब-किताब रखें और राष्ट्रीय विकास के लक्ष्यों के अनुरूप काम को प्राथमिकता दें। कुछ पुराने SASCI सुधारों की प्रासंगिकता पर विचार किया जा सकता है, लेकिन मुख्य फोकस उन सुधारों को लागू करने पर है जो नागरिकों और देश के लिए जरूरी हैं। फाइनेंशियल ईयर 27 (FY27) के लिए रिफॉर्म-लिंक्ड फंड्स का प्रतिशत और सुधारों की लिस्ट आने वाले हफ्तों में, विभिन्न सेंट्रल लाइन मिनिस्ट्री और डिपार्टमेंट सेक्रेटरी के साथ प्री-बजट मीटिंग्स के बाद फाइनल की जाएगी।

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