निवेश का नया केंद्र बन रहा है भारत
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने वैश्विक कंपनियों को अपनी सप्लाई चेन को सुरक्षित और स्थिर बनाने के लिए नए विकल्प तलाशने पर मजबूर कर दिया है। ऐसे में, भारत अपनी तटस्थ स्थिति और मजबूत इकोनमी के चलते एक प्रमुख 'प्लस वन' डेस्टिनेशन के रूप में उभर रहा है। Tata Projects के एमडी Vinayak Pai का भी मानना है कि भारत में डेटा सेंटर और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में जबरदस्त अवसर हैं, जिन्हें सरकार का पूरा समर्थन भी मिल रहा है।
डेटा सेंटर सेक्टर में बंपर ग्रोथ
भारत में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग तेजी से बढ़ रही है, जो क्लाउड सर्विसेज, AI और 5G जैसी तकनीकों से प्रेरित है। अनुमान है कि भारतीय डेटा सेंटर मार्केट 2026 तक 10.8 बिलियन USD से बढ़कर 2035 तक 36.6 बिलियन USD तक पहुंच जाएगा, जिसमें सालाना 14.5% की बढ़ोतरी देखी जाएगी। भारत सरकार द्वारा डेटा सेंटर को इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा देना और डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 जैसे कदम इस क्षेत्र में और निवेश को बढ़ावा दे रहे हैं। Microsoft और Google जैसी बड़ी कंपनियां पहले से ही भारत में भारी निवेश कर रही हैं, और पश्चिम एशिया की अस्थिरता इस ट्रेंड को और तेज कर सकती है।
मैन्युफैक्चरिंग में सरकार का बूस्ट
'मेक इन इंडिया' और प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम्स जैसी सरकारी पहलों से भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर फल-फूल रहा है। फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में मैन्युफैक्चरिंग में फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) पिछले साल के मुकाबले करीब 18% बढ़कर 19.04 बिलियन USD हो गया है। इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोटिव और मेटल्स & माइनिंग जैसे सेक्टर में विस्तार की उम्मीद है। इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्शन 2024-25 में 11.3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, वहीं एक्सपोर्ट पिछले एक दशक में आठ गुना बढ़कर 3.27 लाख करोड़ रुपये हो गया है। सरकार भारत को एक ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है।
मार्केट वैल्यूएशन और ग्लोबल फैक्टर
भारत का IT सेक्टर, Nifty IT इंडेक्स के लिए लगभग 20.21 के पी/ई रेश्यो (P/E ratio) के साथ, अपने पिछले स्तरों की तुलना में उचित दिख रहा है। वहीं, BSE इंडिया मैन्युफैक्चरिंग इंडेक्स का पी/ई रेश्यो करीब 22.6 है। ये आंकड़े भविष्य में ग्रोथ की संभावनाओं की ओर इशारा करते हैं। हालांकि, पश्चिम एशिया संघर्ष सहित वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाएं मार्केट सेंटीमेंट को प्रभावित करती हैं, जिससे मार्केट में वोलेटिलिटी (volatility) और एनर्जी की कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है।
चुनौतियाँ और जोखिम
इन सकारात्मक संकेतों के बावजूद, भारत के सामने इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी, बिजली और कनेक्टिविटी की समस्या जैसी महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं। सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में भी भारी पूंजी लागत, पर्यावरण नियम और एडवांस्ड R&D की आवश्यकता जैसी दिक्कतें हैं। भू-राजनीतिक अस्थिरता निवेशकों को क्षेत्र से जुड़े जोखिमों के कारण हिचकिचाने पर मजबूर कर सकती है।
