भारत के AI Startups की ग्लोबल उड़ान! पेरिस में मिली एंट्री, पर राहें मुश्किल

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AuthorAditya Rao|Published at:
भारत के AI Startups की ग्लोबल उड़ान! पेरिस में मिली एंट्री, पर राहें मुश्किल
Overview

भारत अपने AI (Artificial Intelligence) सेक्टर को ग्लोबल स्तर पर ले जाने के लिए बड़े कदम उठा रहा है। IndiaAI Mission ने 10 AI Startups का दूसरा बैच पेरिस भेजा है, जहां वे Station F और HEC Paris में तीन महीने रहेंगे। इसका मकसद उन्हें इंटरनेशनल एक्सपोजर देना और ग्लोबल ग्रोथ के लिए बिजनेस मॉडल को बेहतर बनाना है। हालांकि, डेटा एक्सेस और कंप्यूटिंग पावर जैसी बड़ी चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं।

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भारत का AI ग्लोबल सपने को पंख

IndiaAI Mission अपने दूसरे बैच के दस AI Startups को ग्लोबल एक्सेलेरेशन प्रोग्राम में भेजकर भारत के AI इनोवेशन को दुनिया के मंच पर ले जाने का बड़ा दांव चल रहा है। यह भारत की नेशनल AI स्ट्रैटेजी का एक अहम हिस्सा है, जिसका मकसद देश के तेजी से बढ़ते AI सेक्टर को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ना है। Station F और HEC Paris जैसे यूरोपियन इनोवेशन हब के साथ पार्टनरशिप करके, यह प्रोग्राम चुने हुए Startups को खास मेंटरशिप (Mentorship), निवेशक कनेक्शन (Investor Connections) और बिजनेस डेवलपमेंट (Business Development) के मौके देगा, जिससे वे लोकल से ग्लोबल कंपटीटर बन सकें।

भारत का AI मार्केट और सरकारी निवेश

भारत का AI मार्केट भारी ग्रोथ के लिए तैयार है। उम्मीद है कि यह 2033 तक $32.5 बिलियन से अधिक का हो जाएगा, जिसकी एनुअल ग्रोथ रेट 38.1% रहने का अनुमान है। IndiaAI Mission ने ₹7,000 करोड़ के फंड पाइपलाइन सहित बड़े सरकारी निवेश की योजना बनाई है। इसका उद्देश्य मजबूत AI रिसोर्सेज, जैसे रिसर्च सेंटर, पब्लिक डेटासेट और कोर AI मॉडल तैयार करना है। स्ट्रैटेजी का फोकस AI का इस्तेमाल आर्थिक और सामाजिक प्रगति के लिए करना है, ताकि भारत एथिकल और इंक्लूसिव AI डेवलपमेंट में लीड कर सके। यह एक्सेलेरेशन प्रोग्राम इसी विजन को सपोर्ट करता है, जो Promising Ventures को इंटरनेशनल एक्सपोजर और मार्केट एक्सेस दे रहा है।

पेरिस का एक्सेलेरेशन हब

पेरिस का Station F दुनिया का सबसे बड़ा स्टार्टअप कैंपस है, जहाँ हर साल 1,000 से अधिक Startups आते हैं। यह तीन महीने का अनूठा प्रोग्राम है। HEC Paris, जो एंटरप्रेन्योरशिप के लिए मशहूर टॉप बिजनेस स्कूल है, की पार्टनरशिप सुनिश्चित करती है कि Startups को बिजनेस प्लान को बेहतर बनाने और इंटरनेशनल मार्केट के लिए तैयार होने में एक्सपर्ट सलाह मिले। यह यूरोपियन हब, डेवलपिंग रीजन्स के कई स्टार्टअप सीन के विपरीत, यूरोपियन वेंचर कैपिटल (Venture Capital) और बिजनेस नेटवर्क्स तक पहुंचने का एक स्ट्रक्चर्ड तरीका प्रदान करता है।

फोकस में खास सेक्टर्स

चुनी गई स्टार्टअप्स AI के ब्रॉड एप्लीकेशन को दर्शाती हैं, जो महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर फोकस कर रही हैं। उदाहरण के लिए, AI Health Highway India Private Limited कार्डियो-रेस्पिरेटरी डिसऑर्डर्स (Cardio-Respiratory Disorders) की स्क्रीनिंग के लिए AI डेवलप कर रही है। यह सेक्टर भारत में पहले से ही $435 मिलियन से अधिक का है और 2034 तक $4.7 बिलियन से ऊपर जाने का अनुमान है। Awiros और SkyServe क्रमशः विजन AI (Vision AI) और अर्थ/स्पेस मॉनिटरिंग (Earth/Space Monitoring) पर काम कर रही हैं, जो ऑटोमेशन और डेटा इंटेलिजेंस की बढ़ती मांग को पूरा कर रही हैं। अन्य वेंचर्स इंफ्रास्ट्रक्चर इंटेलिजेंस, ब्यूटी ट्रेंड्स, मेंटल हेल्थ, ESG कंप्लायंस (ESG Compliance) और मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस (Manufacturing Processes) को ऑप्टिमाइज करने पर ध्यान दे रही हैं। यह मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर्स में AI एडॉप्शन ट्रेंड्स को दिखाता है, जो 2034 तक $60.7 बिलियन तक पहुंच सकता है।

स्केल-अप की राह में चुनौतियाँ

प्रोग्राम के लक्ष्यों और भारत के बढ़ते AI मार्केट के बावजूद, ग्लोबल स्केल के लिए Aim कर रहे Startups को अभी भी बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। एक मुख्य मुद्दा भारत के लिए विशिष्ट हाई-क्वालिटी, लेबल्ड डेटासेट्स (Labeled Datasets) की कमी है, और कंप्यूटिंग पावर (Computing Power) की हाई कॉस्ट, खासकर एडवांस्ड AI मॉडल को ट्रेन करने के लिए जरूरी GPUs के लिए। हालांकि IndiaAI Mission GPU एक्सेस में मदद करने की योजना बना रहा है, लेकिन प्रैक्टिकल दिक्कतें बनी हुई हैं। भारतीय Startups को अक्सर ऐसे ग्राहक मिलते हैं जो प्राइस-सेंसिटिव (Price-Sensitive) और रिस्क-एवर्स (Risk-Averse) होते हैं, जो वेस्टर्न मार्केट्स की तुलना में प्राइसिंग पावर को सीमित कर सकते हैं और सेल्स साइकल्स (Sales Cycles) को लंबा कर सकते हैं।

वैश्विक स्तर पर, कोर AI मॉडल, जैसे लार्ज लैंग्वेज मॉडल (Large Language Models), का डेवलपमेंट बड़े पैमाने पर US और चीनी कंपनियों के नियंत्रण में है। भारतीय Startups आमतौर पर पूरी तरह से नए फंडामेंटल मॉडल बनाने की बजाय मौजूदा AI टूल्स का इस्तेमाल करने में बेहतर रहे हैं। एक्सेलेरेशन प्रोग्राम इस गैप को भरने में मदद करेगा, लेकिन स्थापित प्लेयर्स द्वारा रखे गए मजबूत R&D और फाइनेंशियल एडवांटेज को देखते हुए यह एक कठिन चुनौती है। भारत में इन्वेस्टर्स (Investors) अक्सर जल्दी रिटर्न पसंद करते हैं, जबकि डीप-टेक AI (Deep-tech AI) की सफलताओं में दस साल या उससे अधिक समय लग सकता है, जिससे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स को फंड करना मुश्किल हो जाता है। हालांकि भारत स्टैनफोर्ड (Stanford) के 2025 ग्लोबल AI वाइब्रेंसी इंडेक्स (Global AI Vibrancy Index) में तीसरे स्थान पर है, डोमेस्टिक इनोवेशन को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी प्रोडक्ट्स में बदलना इन फंडामेंटल इकोसिस्टम की कमजोरियों को दूर करने पर निर्भर करेगा।

आगे की राह

IndiaAI Startups ग्लोबल एक्सेलेरेशन प्रोग्राम भारत के AI इकोसिस्टम को ग्लोबल अवसरों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इंटरनेशनल हब के माध्यम से एक स्पष्ट रास्ता प्रदान करके, यह इनिशिएटिव भारतीय AI टैलेंट को दुनिया भर में प्रतिस्पर्धा करने के लिए आवश्यक टूल्स और अनुभव देने का लक्ष्य रखता है। हालांकि, स्थायी सफलता भारत के AI इंफ्रास्ट्रक्चर में निरंतर सुधार, बेहतर डेटा उपलब्धता और लंबी अवधि की निवेश रणनीतियों की ओर बढ़ने पर निर्भर करेगी। इससे Startups को न केवल इनोवेट करने में मदद मिलेगी, बल्कि उनके सॉल्यूशंस को ग्लोबल मार्केट्स में सफलतापूर्वक एक्सपैंड करने में भी मदद मिलेगी।

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