AI डील ने IT शेयरों को दी संजीवनी!
Nvidia और Meta के बीच हुई एक मल्टी-ईयर AI चिप सप्लाई डील ने भारतीय IT स्टॉक्स में जान फूँक दी है। इस डील की खबर आते ही, 19 फरवरी 2026 को IT शेयरों में करीब 1.5% का उछाल देखा गया, जिसने AI से होने वाले संभावित बड़े व्यवधान (disruption) के डर को कुछ हद तक कम कर दिया। निफ्टी IT इंडेक्स में प्रमुख कंपनियां जैसे Tata Consultancy Services और Infosys ने बढ़त दर्ज की।
वैल्यू-बाइंग से मिला सहारा
पिछले हफ्ते 8.2% और पिछले महीने करीब 15% की भारी गिरावट झेलने के बाद, IT इंडेक्स फिलहाल अपनी ऐतिहासिक औसत वैल्यूएशन से नीचे कारोबार कर रहा है। निफ्टी IT इंडेक्स का मौजूदा P/E रेश्यो करीब 23.2x है, जो पिछले 5 साल के औसत 29.6x और 10 साल के औसत 24.5x से कम है। एनालिस्ट्स का मानना है कि यह एक 'टैक्टिकल बाउंस' है, जो ओवरसोल्ड टेरिटरी (RSI करीब 25) में वैल्यू-बाइंग के कारण आया है। Infosys, TCS और HCL Technologies जैसे बड़े स्टॉक्स में करीब 2% की तेजी देखी गई, जबकि Coforge जैसे कुछ मिड-कैप स्टॉक्स 2% से ज्यादा चढ़े।
AI: व्यवधान या अवसर?
AI (Artificial Intelligence) का IT सेक्टर पर लॉन्ग-टर्म असर क्या होगा, इस पर एनालिस्ट्स बंटी हुई राय रख रहे हैं। कुछ, जैसे J.P. Morgan, मानते हैं कि AI मुख्य रूप से एक प्रोडक्टिविटी टूल के तौर पर काम करेगा, जो पुराने कोड को मॉडर्नाइज करने, AI एजेंट्स बनाने और फिजिकल AI सिस्टम्स को इंटीग्रेट करने जैसे नए काम पैदा करेगा। उनका कहना है कि IT फर्म्स 'टेक की दुनिया के प्लंबर' की तरह हैं, जो कॉम्प्लेक्स सिस्टम्स को जोड़ते हैं।
दूसरी ओर, जनरेटिव AI को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं कि यह ट्रेडिशनल एप्लीकेशन डेवलपमेंट और मेंटेनेंस (ADM) व टेस्टिंग के 25-30% काम को ऑटोमेट कर सकता है, जिससे ओवरऑल रेवेन्यू पर 10-12% का असर पड़ सकता है। Nomura का मानना है कि निवेशक IT सर्विसेज सेक्टर को 'AI लूजर' के तौर पर देख रहे हैं, लेकिन यह एक सरलीकृत नज़रिया है। उनका अनुमान है कि FY27 तक AI से रेवेन्यू जनरेशन से रिकवरी आ सकती है। TCS ने पहले ही AI-संबंधित रेवेन्यू से सालाना करीब ₹12,500 करोड़ कमाने की बात कही है।
मार्जिन पर दबाव और स्ट्रैटेजिक लैग का खतरा
इन उम्मीदों के बावजूद, IT सेक्टर पर मार्जिन कम्प्रेशन का बड़ा जोखिम है। क्लाइंट्स पर बजट का दबाव है और AI कम लागत में ज्यादा आउटपुट दे सकता है, जिससे ट्रेडिशनल IT सर्विसेज के लिए टोटल एड्रेसेबल मार्केट कम हो सकता है। भारत के IT सेक्टर को अपने टैलेंट पूल और बिजनेस मॉडल को AI की जरूरत के हिसाब से ढालने में भी चुनौतियां आ सकती हैं, जिससे 'टैलेंट मिसमैच' का संकट पैदा हो सकता है।
सेक्टर का Nifty इंडेक्स में वेटेज लगातार घट रहा है, जो बैंकिंग जैसे सेक्टर्स की तुलना में अंडरपरफॉर्मेंस को दिखाता है। TCS (P/E 19.06) और Infosys (P/E 19.89) जैसे बड़े नाम Coforge (P/E 36.65) और Persistent Systems (P/E 48.42) जैसे मिड-कैप IT स्टॉक्स की तुलना में डिस्काउंट पर ट्रेड कर रहे हैं। सेक्टर का वैल्यूएशन बढ़ाने के लिए यह साबित करना जरूरी है कि AI से रेवेन्यू जनरेशन सिर्फ पायलट फेज से आगे बढ़ चुका है।
आगे की राह
भारतीय IT सेक्टर के लिए आगे की राह मिली-जुली लग रही है। एनालिस्ट्स का अनुमान है कि FY27 तक रेवेन्यू ग्रोथ मामूली रूप से बढ़कर लगभग 4.5% तक पहुंच सकती है, जिसमें AI को अपनाना एक बड़ा ड्राइवर होगा। हालांकि, सेक्टर की AI-संचालित बदलावों, प्राइजिंग मॉडल और वर्कफोर्स रैशनलाइजेशन के प्रति अनुकूलन क्षमता, तथा AI एक्सपेरिमेंटेशन से स्केलेबल रेवेन्यू स्ट्रीम्स में ट्रांजिशन की स्पीड, भविष्य के वैल्यूएशंस को तय करेगी। IT सेक्टर का Nifty में घटता वेटेज और बैंकिंग सेक्टर का बढ़ता प्रभाव, निवेश के बदलते परिदृश्य को दर्शाता है।