रुपये में आई रिकॉर्ड गिरावट ने भारतीय IT सेक्टर के लिए जैसे संजीवनी का काम किया है। 18 मई 2026 को समाप्त हुए पिछले दो ट्रेडिंग सत्रों में Nifty IT इंडेक्स करीब 4% की छलांग लगा चुका है। सोमवार को ही इसने 2.43% का उछाल दर्ज किया। यह तेजी इस सेक्टर के लिए इसलिए अहम है क्योंकि इससे पहले वाले हफ्ते में यह इंडेक्स 5.7% लुढ़क गया था।
इस रिकवरी का सबसे बड़ा कारण है भारतीय रुपये का अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होना। भारत का 315 अरब डॉलर का IT सेक्टर अपनी लगभग 57% कमाई अमेरिका से करता है। ऐसे में, जब रुपया गिरता है, तो डॉलर में होने वाली कमाई का भारतीय मुद्रा में मूल्य बढ़ जाता है, जिससे कंपनियों का मुनाफा (Profit) बढ़ता है। इस तेजी में Infosys, Tata Consultancy Services (TCS), Wipro, HCL Technologies, और Tech Mahindra जैसी बड़ी IT कंपनियों के साथ-साथ Coforge, Persistent Systems, और Mphasis जैसे मिड-कैप शेयरों ने भी बढ़िया प्रदर्शन किया।
हालांकि, रुपये की इस करेंसी विन्ड-टेल (Currency Tailwind) से मिली फौरी राहत के बावजूद, IT सेक्टर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का गहरा साया मंडरा रहा है। AI जिस तरह से पारंपरिक आउटसोर्सिंग बिजनेस मॉडल को बदल रहा है, उसे लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। डर यह है कि AI, IT सेवाओं को ऑटोमेट करके रेवेन्यू में कमी ला सकता है और इंडस्ट्री को बड़े पैमाने पर रीस्ट्रक्चर करने पर मजबूर कर सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगले कुछ सालों में AI पारंपरिक IT सेवाओं के रेवेन्यू में सालाना 2% से 3% तक की कमी ला सकता है। OpenAI का अपने इंजीनियर्स को सीधे क्लाइंट कंपनियों में भेजना भी इस आउटसोर्सिंग मॉडल के लिए एक बड़ी चुनौती मानी जा रही है। इन चिंताओं के चलते ही 2026 में अब तक Nifty IT इंडेक्स करीब 25% गिर चुका है, जो इसे इस साल भारत का सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टर बना रहा है। निवेशक अब उन कंपनियों पर दांव लगा रहे हैं जो AI-संचालित डिमांड को भुनाने और हाई-वैल्यू डिजिटल सेवाएं देने में सक्षम हैं।
फिलहाल, प्रमुख भारतीय IT कंपनियों के वैल्यूएशन (Valuation) में काफी अंतर दिख रहा है। मई 2026 के मध्य तक, Infosys का P/E रेश्यो 14.65 से 15.54 के बीच था, जो सेक्टर के औसत 19.90 से काफी कम है। TCS का P/E रेश्यो लगभग 16.63-17.63 के आसपास है, जबकि Wipro करीब 15.10-15.69 पर ट्रेड कर रहा है। HCL Technologies का P/E रेश्यो 17.5 से 18.62 के दायरे में है। वहीं, Tech Mahindra अपने पीयर्स और इंडस्ट्री एवरेज से काफी ऊपर, 25.29 से 27.96 के P/E रेश्यो पर ट्रेड कर रहा है, जो शायद इसकी हाई ग्रोथ उम्मीदों को दर्शाता है। मार्केट कैप के मामले में TCS सबसे आगे है, जिसका बाजार पूंजीकरण लगभग 8.19 ट्रिलियन रुपये है। इसके बाद Infosys (4.57 ट्रिलियन रुपये), HCL Technologies (3.06 ट्रिलियन रुपये), Wipro (1.99 ट्रिलियन रुपये), और Tech Mahindra (1.34 ट्रिलियन रुपये) का नंबर आता है। हालिया तेजी के बावजूद, इस सेक्टर का साल-दर-तारीख (YTD) प्रदर्शन चिंताजनक है। Nifty IT इंडेक्स अब तक 25% गिर चुका है, जबकि Nifty 50 में सिर्फ 9.5% की गिरावट आई है। कुछ एनालिस्ट्स का मानना है कि निवेशक अब बैंकिंग स्टॉक्स की ओर रुख कर रहे हैं, जो मौजूदा मार्केट वोलेटिलिटी और आकर्षक वैल्यूएशन के कारण IT की जगह ज्यादा बेहतर दिख रहे हैं।
भारतीय IT सेक्टर के लिए एनालिस्ट्स की राय बंटी हुई है। जहां कुछ लोग करेंसी मूवमेंट और टेक्निकल बाउंस के चलते थोड़ी तेजी की उम्मीद कर रहे हैं, वहीं AI डिसरप्शन और क्लाइंट्स के खर्चे में संभावित कमी जैसी बड़ी अनिश्चितताओं के चलते व्यापक तौर पर सावधानी बरती जा रही है। ग्लोबल इकोनॉमी का धीमा होना और अमेरिका में बढ़ती ब्याज दरें भी उभरते बाजारों में फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टमेंट (FII) के फ्लो को प्रभावित कर सकती हैं। HCL Technologies के CEO के अनुसार, कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए बिजनेस इन्वेस्टमेंट में 25-30% की बढ़ोतरी की जरूरत, भी शॉर्ट-टर्म आउटलुक पर दबाव बना रही है। AI को अपनाने से पारंपरिक सेवाओं में सालाना 2-3% रेवेन्यू डिफ्लेशन का खतरा एक स्ट्रक्चरल चुनौती पेश कर रहा है। जिन कंपनियों की सेल्स ग्रोथ ऐतिहासिक रूप से धीमी रही है या रिटर्न ऑन इक्विटी कम है, जैसे कि Tech Mahindra, उन्हें इन बदलते हालात से निपटने में ज्यादा मुश्किल हो सकती है। हालांकि, कुछ मिड-कैप कंपनियां जैसे Mphasis और Persistent Systems को BFSI और AI से जुड़े ग्रोथ की वजह से एनालिस्ट्स से तारीफें मिल रही हैं, लेकिन AI के व्यापक जोखिमों को देखते हुए, ज़्यादातर सेक्टर-व्यापी सिफारिशें चुनिंदा हैं और न्यूट्रल से अंडरवेट (Neutral to Underweight) के दायरे में हैं।
भारतीय IT सेक्टर का भविष्य फिलहाल दोराहे पर खड़ा है। अल्पावधि में करेंसी की उठापटक से कुछ और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। लेकिन, लंबी अवधि में सेक्टर का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि वह AI क्रांति से कितनी जल्दी और कितनी अच्छी तरह सामंजस्य बिठा पाता है। एनालिस्ट्स इस बात पर पैनी नजर रखे हुए हैं कि कंपनियां कितनी तेजी से हाई-वैल्यू AI-संचालित सेवाओं और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन पहलों की ओर बढ़ पाती हैं, जिनसे 2030 तक एक बड़ी टोटल एड्रेसेबल मार्केट (TAM) बनने की उम्मीद है। मौजूदा माहौल में, चुनिंदा कंपनियों पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है, खासकर उन पर जिनकी एग्जीक्यूशन क्षमता मजबूत हो, अगले-पीढ़ी की तकनीकों में मजबूत डील पाइपलाइन हो और मार्जिन प्रोफाइल स्थिर रहे। जब तक AI के रेवेन्यू और बिजनेस मॉडल पर शुद्ध प्रभाव को लेकर तस्वीर साफ नहीं हो जाती, निवेशकों की सावधानी बने रहने की संभावना है, जो अल्पावधि की करेंसी-जनित तेजी के उत्साह को कुछ हद तक कम कर सकती है।