ग्लोबल मार्केट से मिले खराब संकेतों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वजह से नौकरियों पर मंडरा रहे खतरे और अमेरिका की ट्रेड पॉलिसी को लेकर बढ़ी अनिश्चितता का नतीजा है यह बड़ी गिरावट। इन दोनों फैक्टर्स ने IT कंपनियों के वैल्यूएशन पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे मार्केट में बिकवाली का दौर शुरू हो गया।
मार्केट पर असर
मंगलवार को ट्रेडिंग के शुरुआती घंटों में BSE Sensex 572.60 अंक टूटकर 82,722.06 पर आ गया, जबकि NSE Nifty50 में 156.60 अंकों की गिरावट आई और यह 25,556.40 पर ट्रेड कर रहा था। Nifty IT Index तो 3.18% लुढ़क गया, जो वॉल स्ट्रीट पर आई कमजोरी का ही संकेत था।
AI का बढ़ता खौफ
AI की क्षमता, जैसे कि कोडिंग, टेस्टिंग और लीगल सर्विस जैसे कॉम्प्लेक्स काम ऑटोमेट करने की, इस बिकवाली की एक बड़ी वजह बनी हुई है। US की AI स्टार्टअप Anthropic के Claude प्लेटफॉर्म की तरक्की, जो महत्वपूर्ण कोड को ऑप्टिमाइज़ और लीगल वर्कफ़्लो को ऑटोमेट कर सकता है, IT सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए रेवेन्यू पर खतरे की आशंका बढ़ा रही है। यह टेक्नोलॉजिकल बदलाव पारंपरिक मैन-आवर पर आधारित रेवेन्यू मॉडल को प्रभावित कर सकता है, जिससे AI के तेज होने के कारण प्रॉफिट मार्जिन कम हो सकते हैं।
ट्रेड पॉलिसी की अनिश्चितता
साथ ही, अमेरिका की ट्रेड पॉलिसी को लेकर नई अनिश्चितता ने इन्वेस्टर्स को परेशान कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद, व्हाइट हाउस ने 24 फरवरी, 2026 से लागू होने वाले US इम्पोर्ट्स पर 15% का नया टैरिफ लगाने की योजना का ऐलान किया है। टैरिफ रेट्स और टाइमलाइन में बदलाव के बावजूद, बढ़े हुए टैरिफ और ट्रेड टेंशन की संभावना, साथ ही H-1B वीज़ा नियमों में संभावित बदलाव, भारतीय IT कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण ऑपरेशनल और कॉस्ट-संबंधी चिंताएं पैदा कर रहे हैं, खासकर वे जो US मार्केट पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं।
सेक्टर पर गहराता संकट
बड़े भारतीय IT प्लेयर्स के स्टॉक्स में भारी गिरावट देखी गई। Tata Consultancy Services (TCS) के शेयर अपने पीक से 44% तक गिर गए और पांच-सवा-पांच साल के निचले स्तर पर पहुंच गए। Infosys, HCL Technologies और Wipro जैसे स्टॉक्स में भी बड़ी गिरावट आई। Nifty IT इंडेक्स का P/E रेश्यो फिलहाल 22.4 पर है। बड़ी कंपनियों के वैल्यूएशन की बात करें तो TCS का P/E करीब 19.2-20.27, Infosys का 18.88-19.59, Wipro का लगभग 15.6-16.71 और HCL Technologies का 23.5-23.8 के आसपास ट्रेड कर रहा है। वहीं, Persistent Systems (P/E 46.40) और Coforge (P/E 34.23) जैसी कंपनियां ज्यादा वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रही हैं, जो ग्रोथ और रिस्क को लेकर इन्वेस्टर्स की अलग-अलग सोच को दर्शाता है।
इतिहास बनाम वर्तमान चुनौती
ऐतिहासिक रूप से, IT सेक्टर ने काफी मजबूती दिखाई है। Nifty IT इंडेक्स पहले भी 34% तक करेक्ट हुआ है, जिसके बाद अक्सर नई ऊंचाइयां देखी गई हैं। 2008 की फाइनेंशियल क्राइसिस और COVID-19 महामारी के दौरान भी, शुरुआती गिरावट के बाद IT स्टॉक्स ने शानदार रिटर्न दिया, क्योंकि कंपनियों ने डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन को अपनाया था। हालांकि, मौजूदा स्थिति एक अनोखी चुनौती पेश करती है, क्योंकि AI डिसरप्शन को एक साइक्लिकल डाउनटर्न के बजाय एक स्ट्रक्चरल खतरा माना जा रहा है। कुछ एनालिस्ट्स का अनुमान है कि जेनरेटिव AI पारंपरिक IT सर्विसेज के रेवेन्यू का 25-30% हिस्सा प्रभावित कर सकता है, जिससे अगले तीन से चार सालों में 10-12% की कमी आ सकती है।
स्ट्रक्चरल कमजोरियां
IT सेक्टर का एक्सपोर्ट्स पर, खासकर US पर (जो सेक्टर की कमाई का 60% से ज्यादा हिस्सा है), भारी निर्भर होना इसे जियो-पॉलिटिकल बदलावों और ट्रेड डिस्प्यूट्स के प्रति स्वाभाविक रूप से संवेदनशील बनाता है। भले ही कुछ लोगों का तर्क है कि US में IT सर्विसेज पर सीधे टैरिफ नहीं हैं, लेकिन व्यापक इकोनॉमिक प्रोटेक्शनिज़्म और अनिश्चितता क्लाइंट्स के बजट और प्रोजेक्ट टाइमलाइन को प्रभावित कर सकती है। HCL Technologies और Wipro जैसी कंपनियां TCS और Infosys जैसे साथियों की तुलना में कम P/E रेश्यो पर ट्रेड कर रही हैं, जो संभावित रूप से मार्केट की भविष्य की ग्रोथ ट्रैजेक्टरी को लेकर चिंताओं या इन हेडविंड्स के प्रति अधिक संवेदनशीलता का संकेत देता है। इसके अलावा, AI की ओर शिफ्ट के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर और टैलेंट में महत्वपूर्ण निवेश की आवश्यकता है, जो एग्जीक्यूशन चैलेंजेज़ और ट्रांजिशन के दौरान मार्जिन कंप्रेशन का खतरा पैदा करता है, भले ही TCS जैसी कंपनियां अपनी रणनीतियों को आक्रामक रूप से आगे बढ़ा रही हों। AI द्वारा रेवेन्यू को 'डीफ्लेट' करने की संभावना, यानी मैन-आवर बिलिंग से आउटकम-बेस्ड प्राइसिंग की ओर बढ़ना, स्थापित बिजनेस मॉडल के लिए एक मूलभूत चुनौती पेश करती है।
भविष्य की राह
वर्तमान वोलेटिलिटी के बावजूद, एनालिस्ट्स का मानना है कि डिसरप्शन का एक बड़ा हिस्सा पहले ही प्राइस-इन हो चुका है, और मौजूदा करेक्शन हिस्टोरिकल एवरेज के करीब पहुंच रही है। US-इंडिया का अंतरिम ट्रेड एग्रीमेंट फ्रेमवर्क, जो डिजिटल ट्रेड और टेक्नोलॉजी कोलैबोरेशन पर केंद्रित है, भारत को AI हब के रूप में स्थापित करने और इसके डिजिटल इकोसिस्टम को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखता है। AI की मांग के कारण भारत का डेटा सेंटर मार्केट भी महत्वपूर्ण विस्तार के लिए तैयार है। शॉर्ट-टर्म वोलेटिलिटी की उम्मीद है, लेकिन प्रमुख IT कंपनियां AI इंटीग्रेशन और इनोवेशन में भारी निवेश कर रही हैं, और ऐतिहासिक रूप से, उन्होंने टेक्नोलॉजी के विकास के साथ खुद को ढाला है। रिस्क-एवरस इन्वेस्टर्स के लिए, IT ETF के जरिए एक स्टैगर्ड इन्वेस्टमेंट अप्रोच अपनाने की सलाह दी जाती है, जो बदलते ग्लोबल इक्विटी मार्केट कंडीशंस के बीच ग्रोथ और वैल्यू सेक्टर्स के बीच संतुलन पर जोर देता है।