AI का बढ़ता साया: IT कंपनियों पर क्यों मंडरा रहा खतरा?
बाजार में आई इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह IT सेक्टर में मची अफरातफरी रही। जहां फाइनेंसियल और PSU बैंकों जैसे दूसरे सेक्टरों ने बढ़त हासिल की, वहीं IT सेक्टर 5.5% तक लुढ़क गया, जो पिछले दस महीनों का सबसे निचला स्तर है। यह बिकवाली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के चलते स्थापित बिजनेस मॉडल के लिए पैदा हो रहे खतरों की आशंकाओं से उपजी है, जिसने बाजार की चाल को पूरी तरह बदल दिया।
AI के बढ़ते कदमों ने दुनिया भर के टेक शेयरों को हिला दिया है, और भारतीय IT सेक्टर भी इससे अछूता नहीं रहा। स्टार्टअप्स जैसे Anthropic की AI क्षमताएं, जो कोडिंग, लीगल, सेल्स और मार्केटिंग जैसे कामों को ऑटोमेट कर सकती हैं, ने स्थापित IT सर्विस दिग्गजों के पारंपरिक बिजनेस मॉडल के लिए एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। इन चिंताओं के चलते Infosys, TCS और Tech Mahindra जैसी बड़ी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई। Tata Consultancy Services (TCS) का मार्केट कैप तो पहली बार दिसंबर 2020 के बाद ₹10 लाख करोड़ के नीचे चला गया।
वैल्यूएशन और पिछला प्रदर्शन: क्या IT सेक्टर 'ओवरवैल्यूड' था?
फिलहाल, कई बड़ी IT कंपनियां अपने सेक्टर के औसत P/E (Price to Earnings) रेशियो से नीचे कारोबार कर रही हैं। Infosys का P/E करीब 21.3-22.6, TCS का 20.58-21.5 और Tech Mahindra का 31.7-32.8 के आसपास है, जबकि इंडस्ट्री का औसत P/E लगभग 25.3-25.59 है। यह स्थिति तब है जब पिछले दो सालों से IT शेयर लगातार पिछड़ रहे हैं। TCS 32% से ज्यादा, Infosys 17% और Wipro 13% से ज्यादा गिरे हैं। Nifty IT इंडेक्स खुद 2026 में अब तक 11-14% और फरवरी महीने में ही 6% से ज्यादा टूट चुका है। इसके मुकाबले Nifty 50 में उतनी बड़ी गिरावट नहीं देखी गई, हालांकि उसने भी अपनी चार दिन की तेजी का सिलसिला 25,807 पर तोड़ दिया।
मैक्रो इकोनॉमिक फैक्टर और विश्लेषकों की राय
IT सेक्टर की मुश्किलें सिर्फ AI तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि मैक्रो इकोनॉमिक फैक्टर भी इसमें भूमिका निभा रहे हैं। हाल ही में अमेरिका से आए बेहतर जॉब डेटा ने फेडरल रिजर्व (Fed) से जल्द ब्याज दरें घटाने की उम्मीदों को झटका दिया है। इससे यह आशंका बढ़ गई है कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं, जिसका असर टेक जैसे ग्रोथ-सेंसिटिव शेयरों के वैल्यूएशन पर पड़ता है। वैश्विक बाजार में भी टेक से निकलकर वैल्यू-ओरिएंटेड सेक्टरों की ओर रुझान देखा जा रहा है।
हालांकि, कुछ विश्लेषकों का मानना है कि Nifty 50 के लिए मौजूदा गिरावट छोटी अवधि की हो सकती है। टेक्निकल चार्ट्स के अनुसार, Nifty के लिए 25,750-25,800 का स्तर सपोर्ट का काम कर सकता है, जबकि 26,000 पर रेजिस्टेंस (Resistance) देखा जा रहा है। IT सेक्टर के लिए राय बंटी हुई है; कुछ Tech Mahindra और Infosys जैसे शेयरों में गिरावट को खरीदारी का मौका मान रहे हैं, वहीं कुछ विश्लेषक अधिक स्पष्टता आने तक सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं।
'AI बूम' या 'IT बस्ट'?
विश्लेषकों का एक वर्ग AI को IT सर्विसेज मॉडल के लिए एक 'एक्जििस्टेंशियल थ्रेट' (Existential Threat) यानी अस्तित्व का संकट मान रहा है। यह मॉडल मुख्य रूप से वर्कफोर्स और बिलिंग आवर्स पर निर्भर करता है। AI टूल्स की तेजी से बढ़ती क्षमताएं, जो जटिल वर्कफ़्लो को ऑटोमेटिकली पूरा कर सकती हैं, रेवेन्यू में कमी और मार्जिन पर दबाव ला सकती हैं, जिसकी उम्मीद अभी से कहीं ज्यादा हो सकती है। हालांकि बाजार की प्रतिक्रिया को कुछ लोग अत्यधिक व्यापक मान रहे हैं, लेकिन AI द्वारा विशेष व्यावसायिक क्षेत्रों, खासकर BPO और लीगल सर्विसेज में व्यवधान (Disruption) का जोखिम काफी महत्वपूर्ण है।
अमेरिकी दिग्गजों के विपरीत, जो AI के नींव वाले मॉडल बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, भारतीय IT कंपनियों ने मुख्य रूप से सेवाएं और डिप्लॉयमेंट पर ध्यान दिया है। ऐसे में, वे AI कंपनियों द्वारा अपने प्रतिस्पर्धी सॉफ्टवेयर बनाने या व्यवसायों को कस्टम इन-हाउस सॉल्यूशन बनाने में सक्षम बनाने से पिछड़ सकती हैं। इस तरह की निर्भरता उन्हें AI कंपनियों के विकसित होते इकोसिस्टम के सामने कमजोर बना सकती है। शेयरों में यह तेज और अंधाधुंध बिकवाली इस बात का संकेत है कि निवेशक, अल्पावधि के उछाल के बावजूद, लंबी अवधि में बड़े नुकसान का अनुमान लगा रहे हैं। पिछले दो सालों में इस सेक्टर का लगातार पिछड़ना, पिछली अवधि के शानदार प्रदर्शन के बिल्कुल विपरीत, एक चक्रीय मंदी के बजाय एक संरचनात्मक बदलाव (Structural Shift) का संकेत देता है।
आगे का रास्ता: अनिश्चितता के बीच सावधानी भरी उम्मीद
IT सेक्टर का तत्काल भविष्य AI से जुड़ी अनिश्चितताओं और मैक्रो इकोनॉमिक दबावों से घिरा हुआ है। जहां Nifty 50 को तकनीकी सपोर्ट मिल सकता है, वहीं IT इंडेक्स का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि यह AI को अपनी सेवाओं में कितनी प्रभावी ढंग से एकीकृत कर पाता है और ऑटोमेशन के खतरों के खिलाफ कितना मजबूत साबित होता है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे AI को अपनाने और संभावित व्यवधानों से निपटने के लिए कंपनियों की ठोस रणनीतियों को जानने के लिए कॉर्पोरेट नतीजों पर बारीकी से नजर रखें। बाजार की आम राय सतर्क रहने की है, और इस सेक्टर में बड़ा निवेश करने से पहले दीर्घकालिक प्रभाव पर स्पष्टता की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है।