IDfy का बड़ा दांव: ₹476 करोड़ जुटाए, ग्लोबल विस्तार और अधिग्रहण पर करेगी खर्च!

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AuthorAditya Rao|Published at:
IDfy का बड़ा दांव: ₹476 करोड़ जुटाए, ग्लोबल विस्तार और अधिग्रहण पर करेगी खर्च!
Overview

मुंबई की टेक कंपनी IDfy ने ₹476 करोड़ ($53 मिलियन) का बड़ा फंड जुटा लिया है। Neo Asset Management की अगुआई में हुई इस सीरीज F फंडिंग का इस्तेमाल कंपनी अपनी ग्लोबल विस्तार योजनाओं, रणनीतिक अधिग्रहणों (Acquisitions) और टेक्नोलॉजी को और बेहतर बनाने में करेगी।

RegTech सेक्टर में 'कंजर्वेटिव ग्लोबल कंसॉलिडेटर' बनने की राह पर IDfy

IDfy के लिए यह फंडिंग एक बड़ी 'स्ट्रैटेजिक मूव' है। हाल ही में प्रॉफिटेबल (Profitable) बनी यह कंपनी अब ग्लोबल RegTech सेक्टर में बड़े अधिग्रहण (Acquisitions) और विस्तार पर ध्यान केंद्रित करेगी। बढ़ते ग्लोबल फ्रॉड (Global Fraud) और डेटा प्राइवेसी जैसे नियमों (Regulations) को देखते हुए, कंपनी खुद को इस सेक्टर का एक बड़ा प्लेयर बनाना चाहती है।

$272 मिलियन के वैल्यूएशन (Valuation) पर जुटाया फंड

IDfy ने इस सीरीज F राउंड में कुल ₹476 करोड़ (लगभग $53 मिलियन) जुटाए हैं। इस फंडिंग के बाद कंपनी का पोस्ट-मनी वैल्यूएशन (Post-Money Valuation) बढ़कर लगभग $272 मिलियन तक पहुंच गया है। इस राउंड का नेतृत्व Neo Asset Management ने किया, जबकि Blume Ventures और Kae Capital जैसे मौजूदा निवेशकों ने भी इसमें अपना भरोसा जताया।

ग्लोबल विस्तार और अधिग्रहण (M&A) पर फोकस

कंपनी का मुख्य फोकस अब इंटरनेशनल मार्केट्स में आक्रामक विस्तार (Aggressive International Expansion) करना है। IDfy दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य-पूर्व और अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में अधिग्रहण (Acquisitions) के अवसरों की तलाश कर रही है। लक्ष्य 'डिजिटल इकोनॉमी' के लिए एक मजबूत 'ट्रस्ट इंफ्रास्ट्रक्चर' तैयार करना है।

AI से फ्रॉड पर वार, रेगुलेशन का सहारा

IDfy की ग्रोथ के पीछे तीन मुख्य कारण हैं: कंपनी का अपना एग्जीक्यूशन (Execution), भारत जैसे देशों में कड़े होते रेगुलेटरी फ्रेमवर्क (Regulatory Frameworks) (जैसे DPDP Act) और बढ़ता हुआ ग्लोबल डिजिटल फ्रॉड। भारत के डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट ने कंप्लायंस (Compliance) सॉल्यूशंस की मांग बढ़ा दी है। वहीं, फ्रॉड करने वाले भी AI का इस्तेमाल कर रहे हैं, इसलिए IDfy भी AI-बेस्ड 'काउंटरमेजर' (Countermeasures) में भारी निवेश कर रही है, क्योंकि 'AI को पकड़ने के लिए AI ही चाहिए'। कंपनी सालाना 500 मिलियन से अधिक चेक करती है और 500 से अधिक बड़े क्लाइंट्स के लिए काम करती है।

वैल्यूएशन और प्रतिस्पर्धा पर सवाल

हालांकि, $272 मिलियन का वैल्यूएशन कुछ सवाल खड़े करता है, खासकर तब जब कंपनी ने हाल ही में FY25 में ₹1.6 करोड़ का नेट प्रॉफिट (Net Profit) ₹186 करोड़ के रेवेन्यू (Revenue) पर दर्ज किया है। ऐसे में वैल्यूएशन मौजूदा कमाई की तुलना में थोड़ा ज्यादा लग सकता है। कंपनी को Signzy, HyperVerge जैसे डोमेस्टिक प्लेयर्स और अन्य ग्लोबल RegTech कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा। विभिन्न देशों के रेगुलेशन और फ्रॉड पैटर्न को समझना भी एक बड़ी चुनौती होगी।

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