नतीजे क्या कहते हैं?
Hypersoft Technologies Limited ने 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त तिमाही और नौ महीनों के लिए अपने अनऑडिटेड वित्तीय नतीजे जारी किए हैं। कंसोलिडेटेड (समेकित) आधार पर कंपनी की तस्वीर काफी चिंताजनक है। तीसरी तिमाही (Q3 FY26) में, कंपनी का रेवेन्यू पिछले साल इसी अवधि के ₹33.79 करोड़ से 79% गिरकर मात्र ₹7.25 करोड़ रह गया। इससे भी बड़ी बात यह है कि कंपनी को ₹1.79 करोड़ का शुद्ध घाटा (Net Loss) हुआ है, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में ₹1.45 करोड़ का मुनाफा (Profit) था। तिमाही-दर-तिमाही (QoQ) आधार पर भी कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 56% घटकर ₹7.25 करोड़ हो गया और प्रॉफिट ₹2.41 करोड़ से घाटे में बदल गया।
स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड का अंतर
जहां कंसोलिडेटेड नतीजे चिंता बढ़ा रहे हैं, वहीं स्टैंडअलोन (अलग-अलग) प्रदर्शन में सुधार दिखा है। Q3 FY26 में स्टैंडअलोन रेवेन्यू पिछले साल के ₹0.77 करोड़ के घाटे से बढ़कर ₹0.18 करोड़ का शुद्ध लाभ (PAT) दर्ज किया गया। यह पिछले साल की इसी तिमाही के ₹0.77 करोड़ के लॉस के मुकाबले एक बड़ा सुधार है। हालांकि, QoQ आधार पर स्टैंडअलोन रेवेन्यू 86% गिरा और लाभ 81% कम होकर ₹0.18 करोड़ रह गया। नौ महीनों की बात करें तो स्टैंडअलोन रेवेन्यू ₹0.27 करोड़ से बढ़कर ₹1.97 करोड़ का लाभ हुआ है।
चिंताजनक 'Other Equity'
कंसोलिडेटेड वित्तीय नतीजों में एक गंभीर चेतावनी 'Other Equity' (रिजर्व) में भारी गिरावट के रूप में सामने आई है। 9M FY25 में ₹1.34 करोड़ था, जो 9M FY26 तक घटकर नेगेटिव ₹(0.44) करोड़ हो गया है। यह बताता है कि कंपनी के संचित घाटे ने उसके रिजर्व को खत्म कर दिया है और संभवतः उसके पेड-अप कैपिटल का भी कुछ हिस्सा कम कर दिया है। यह स्थिति गंभीर वित्तीय दबाव और कंपनी की नेट वर्थ के कमजोर होने का संकेत देती है।
मैनेजमेंट की चुप्पी
कंपनी ने अपने नतीजों के साथ कोई मैनेजमेंट कमेंट्री या भविष्य का कोई अनुमान (Guidance) जारी नहीं किया है। इससे निवेशकों को प्रदर्शन में बड़ी भिन्नताओं और इक्विटी में हुई चिंताजनक गिरावट के कारणों या भविष्य की दिशा के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई है।
आगे का रास्ता और जोखिम
मुख्य जोखिम कंसोलिडेटेड रेवेन्यू में भारी गिरावट, Q3 में शुद्ध घाटे में बदलना, स्टैंडअलोन तिमाही रेवेन्यू में तेज गिरावट और सबसे गंभीर रूप से कंसोलिडेटेड इक्विटी का नेगेटिव टेरिटरी में चले जाना है। भविष्य की ओर से कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश न होने से ये चिंताएं और बढ़ जाती हैं। निवेशकों को भविष्य के कंसोलिडेटेड नतीजों पर कड़ी नजर रखनी होगी ताकि रेवेन्यू और लाभप्रदता में स्थिरीकरण या सुधार के संकेत मिल सकें। कंपनी की नेगेटिव इक्विटी स्थिति को संभालने की क्षमता एक महत्वपूर्ण कारक होगी। वर्तमान वित्तीय स्थिति, खासकर कंसोलिडेटेड आधार पर, काफी जोखिम भरी नजर आ रही है।
