कोर्ट का मिला-जुला फैसला
दिल्ली हाईकोर्ट की एक बेंच ने Huawei Telecommunications (India) के इनकम टैक्स से जुड़े मामलों पर फैसला सुनाते हुए दो अलग-अलग सालों के लिए दो तरह के आदेश दिए हैं। 2013-14 के फाइनेंशियल ईयर के लिए, कोर्ट ने इनकम टैक्स डिपार्टमेंट (Income Tax Department) की ओर से जारी री-असेसमेंट नोटिस और स्पेशल ऑडिट के आदेश को खारिज कर दिया। ऐसा माना जा रहा है कि डिपार्टमेंट के पास इस अवधि के लिए पर्याप्त आधार और सबूत नहीं थे, या वह री-असेसमेंट के लिए तय छह साल की समय-सीमा का पालन करने में विफल रहा।
इसके विपरीत, 2015-16 के फाइनेंशियल ईयर के लिए, कोर्ट ने री-असेसमेंट की कार्यवाही और स्पेशल ऑडिट के आदेशों को बरकरार रखा है। कोर्ट ने Huawei के खातों की जटिलता और संभावित छूटे हुए आय (escaped income) का हवाला देते हुए इनकम टैक्स एक्ट की Section 142(2A) के तहत स्पेशल ऑडिट का आदेश दिया। इसका मतलब है कि Huawei India को 2015-16 की अवधि के लिए गहन जांच का सामना करना पड़ेगा और संभावित टैक्स देनदारियां भी उठानी पड़ सकती हैं।
चीनी कंपनियों पर बढ़ती टैक्स की नज़र
Huawei India जैसी चीनी टेक कंपनियों पर भारत में लगातार कड़ी निगरानी रखी जा रही है। Xiaomi जैसी कंपनियों ने भी बड़े टैक्स विवादों, अवैध रेमिटेंस के आरोपों और फ्रीज किए गए बैंक खातों का सामना किया है। यह जांच भू-राजनीतिक तनाव और 'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा देने के सरकारी प्रयासों से प्रभावित है। विदेशी टेक कंपनियां अक्सर टैक्स, कस्टम और विदेशी मुद्रा नियमों पर जांच के दायरे में आती हैं। कई चीनी कंपनियां, जैसे Xiaomi, अब स्थानीय संचालन पर वित्तीय दबाव के संकेत के तौर पर मूल कंपनियों से लोन के जरिए फंड जुटा रही हैं।
वैश्विक मजबूती के मुकाबले भारत में संघर्ष
दुनिया भर में Huawei Technologies Co. Ltd. ने एक मजबूत वापसी की है। कंपनी ने 2025 के लिए $127 बिलियन से अधिक का रेवेन्यू दर्ज किया है, जो अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद उसकी ताकत को दिखाता है। कंपनी R&D में भारी निवेश करती है और चीन के स्मार्टफोन बाजार में अपनी अग्रणी स्थिति वापस पा चुकी है।
इस वैश्विक सफलता के विपरीत, Huawei India की स्थिति काफी अलग है। कंपनी का 2025 के फाइनेंशियल ईयर के लिए रेवेन्यू सिर्फ ₹15.1 करोड़ रहा, जो पिछले साल की तुलना में -94% की भारी गिरावट है। भारत में सुरक्षा चिंताओं के चलते Huawei और ZTE जैसी चीनी टेलीकॉम उपकरण निर्माताओं पर सख्त प्रतिबंध भी लागू हैं। 'ट्रस्टेड सोर्स' पॉलिसी के तहत उन्हें 5G रोलआउट और मौजूदा नेटवर्क में सीमित भूमिका दी गई है।
Huawei India के सामने महत्वपूर्ण जोखिम बने हुए हैं। 2015-16 के लिए जारी री-असेसमेंट तत्काल वित्तीय और परिचालन खतरा पैदा करता है। यह कंपनी की मुश्किल स्थिति को और गहराता है, जहाँ उसे भारी टैक्स देनदारियों, जुर्माने और लंबी कानूनी लड़ाइयों का सामना करना पड़ सकता है। वैश्विक स्तर पर मजबूत वित्तीय स्थिति और भारत में चुनौतीपूर्ण रेवेन्यू के बीच का यह अंतर, कंपनी को स्थानीय सब्सिडियरी स्तर पर महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करने के लिए रणनीतिक अनुकूलन की आवश्यकता को उजागर करता है।