नतीजे उम्मीद से रहे कमजोर, डील वैल्यू में उछाल
HCL Technologies ने अपने चौथी तिमाही (Q4 FY26) के नतीजे जारी किए, जो बाजार की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे। कंपनी के कॉन्स्टेंट करेंसी (CC) रेवेन्यू में पिछली तिमाही की तुलना में 3.3% की गिरावट दर्ज की गई, जबकि एनालिस्ट्स 0.9% की गिरावट का अनुमान लगा रहे थे। इसके साथ ही, ईबीआईटी (EBIT) मार्जिन भी घटकर 16.5% रह गया, जो अनुमानित 17.2% से कम है।
हालांकि, एक अच्छी बात यह रही कि इस तिमाही में कंपनी को मिले नए डील्स की कुल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू (TCV) में सालाना आधार पर 35.4% का जोरदार उछाल आया और यह $1.9 बिलियन तक पहुंच गई। लेकिन, भविष्य की यह मजबूत डील पाइपलाइन मौजूदा रेवेन्यू और मार्जिन की कमजोरी को दूर नहीं कर पाई। मैनेजमेंट ने कहा कि अमेरिका के दो बड़े क्लाइंट्स द्वारा खर्च में कटौती के कारण रेवेन्यू पर असर पड़ा है।
FY27 का आउटलुक और पीयर कंपनियों से तुलना
आने वाले फाइनेंशियल ईयर 2027 (FY27) के लिए HCL Technologies ने कॉन्स्टेंट करेंसी (CC) में 1% से 4% तक की रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान लगाया है, जबकि सर्विसेज रेवेन्यू 1.5% से 4.5% CC बढ़ने की उम्मीद है। यह अनुमान भारतीय आईटी सर्विसेज सेक्टर के लिए अनुमानित 10% से 13.4% की ग्रोथ से काफी कम है। FY27 के लिए 17.5% से 18.5% तक ईबीआईटी मार्जिन का लक्ष्य भी मौजूदा तिमाही के 16.5% से काफी बेहतर प्रदर्शन की मांग करता है।
शेयरों में गिरावट के बाद, HCL Technologies का वैल्यूएशन भी चर्चा में है। कंपनी का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो फिलहाल 23x-24x के आसपास है। यह टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के 19.3x और विप्रो (Wipro) के 16.2x जैसे प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों से ज्यादा है। एनालिस्ट्स का मानना है कि कमजोर FY27 ग्रोथ फोरकास्ट के बावजूद HCL Tech का वैल्यूएशन TCS से ज्यादा प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है।
एनालिस्ट्स की चेतावनी और एग्जीक्यूशन रिस्क
नतीजों के बाद कई एनालिस्ट्स ने HCL Technologies के स्टॉक पर चिंता जताई है। जेफरीज (Jefferies) ने स्टॉक की रेटिंग को 'अंडरपरफॉर्म' (Underperform) कर दिया है और टारगेट प्राइस ₹1,165 तय किया है। उनका मानना है कि FY27 के लिए केवल 2.4% की अनुमानित ऑर्गेनिक रेवेन्यू ग्रोथ कंपनी के हाई वैल्यूएशन को सही नहीं ठहराती।
बाजार की मुख्य चिंता एग्जीक्यूशन रिस्क को लेकर है। मजबूत डील पाइपलाइन के बावजूद रेवेन्यू और मार्जिन में गिरावट यह दर्शाती है कि कंपनी को मिले हुए सौदों को मुनाफे में बदलने में दिक्कत आ रही है। यह समस्या तब और बढ़ जाती है जब मैनेजमेंट स्वीकार करता है कि प्रमुख क्लाइंट्स अपने 'डिस्क्रिशनरी खर्च' (वैकल्पिक खर्च) में कटौती कर रहे हैं। इसके अलावा, कंपनी अपने FY26 ग्रोथ गाइडेंस ( 3.9% बनाम 4.0-4.5% टारगेट) को भी पूरा नहीं कर पाई, जिससे भविष्य के अनुमानों पर संदेह पैदा हो गया है।
