गुजरात में भारत की पहली GaN चिप फैक्ट्री! 3936 करोड़ का निवेश, 2200+ नौकरियां पक्की

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AuthorAditya Rao|Published at:
गुजरात में भारत की पहली GaN चिप फैक्ट्री! 3936 करोड़ का निवेश, 2200+ नौकरियां पक्की
Overview

गुजरात, भारत के सेमीकंडक्टर (Semiconductor) सपने को पंख लगने वाले हैं! राज्य में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (India Semiconductor Mission) के तहत दो बड़ी मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटीज को मंजूरी मिल गई है। Crystal Matrix Limited देश की पहली कमर्शियल GaN-आधारित Mini/Micro-LED डिस्प्ले यूनिट लगाएगी, वहीं Suchi Semicon Private Limited चिप पैकेजिंग के लिए एक अहम OSAT फैसिलिटी स्थापित करेगी। इन प्रोजेक्ट्स में **₹3,936 करोड़** का भारी निवेश होगा और **2,200 से ज़्यादा** नौकरियां पैदा होंगी।

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गुजरात अब देश का नया सेमीकंडक्टर हब बनने के लिए तैयार है। केंद्र सरकार ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) के तहत दो एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटीज को हरी झंडी दिखा दी है। इन प्रोजेक्ट्स में कुल मिलाकर करीब ₹3,936 करोड़ का निवेश किया जाएगा। यह कदम भारत को महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स के स्वदेशी उत्पादन की ओर बढ़ाएगा और आयात पर निर्भरता को कम करने में मदद करेगा। स्वीकृत इकाइयों में Crystal Matrix Limited (CML) शामिल है, जो भारत की पहली कमर्शियल GaN-आधारित Mini/Micro-LED डिस्प्ले फैसिलिटी स्थापित करेगी, और Suchi Semicon Private Limited (SSPL), जो चिप पैकेजिंग के लिए एक OSAT फैसिलिटी पर ध्यान केंद्रित करेगी।

खास प्रोजेक्ट्स: GaN डिस्प्ले और चिप पैकेजिंग

Crystal Matrix Limited (CML) का इंटीग्रेटेड कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन और असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग (ATMP) फैसिलिटी ढोलेरा में स्थापित होगी। यह भारत को एडवांस्ड डिस्प्ले टेक्नोलॉजी में आगे ले जाएगा। यह यूनिट 6-इंच वेफर्स का उपयोग करके Mini/Micro-LED डिस्प्ले मॉड्यूल बनाएगी और GaN फाउंड्री सर्विसेज भी देगी। इस फैसिलिटी का लक्ष्य सालाना 72,000 वर्ग मीटर डिस्प्ले पैनल और 24,000 सेट RGB GaN एपिटैक्सी वेफर्स का उत्पादन करना है, जिनका इस्तेमाल बड़े कमर्शियल स्क्रीन्स, ऑटोमोटिव डिस्प्ले और एक्सटेंडेड रियलिटी (XR) ग्लासेस व स्मार्टवॉच के लिए माइक्रो-डिस्प्ले जैसे हाई-डिमांड एप्लीकेशन्स में होगा। वहीं, Suchi Semicon Private Limited (SSPL) सूरत में एक आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्ट (OSAT) फैसिलिटी लगाएगी। यह यूनिट भारत की बैकएंड सेमीकंडक्टर क्षमता को बढ़ावा देगी, जिसका लक्ष्य सालाना 1,033 मिलियन से ज़्यादा डिस्क्रीट सेमीकंडक्टर का उत्पादन करना है। यह फैसिलिटी ऑटोमोटिव, इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे महत्वपूर्ण सेक्टर्स, खासकर पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और एनालॉग इंटीग्रेटेड सर्किट्स में काम आएगी।

भारत का सेमीकंडक्टर बूस्ट

ये मंजूरियां इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हैं। अब तक कुल बारह प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिल चुकी है, जिनमें निवेश करीब ₹1.64 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। दो ISM-अनुमोदित प्रोजेक्ट्स पहले ही अपना कमर्शियल शिपमेंट शुरू कर चुके हैं, जो देश की सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग की महत्वाकांक्षाओं में ठोस प्रगति का संकेत देता है। अनुमान है कि ग्लोबल सेमीकंडक्टर मार्केट 2026 तक करीब $1 ट्रिलियन तक पहुंच जाएगा, जिसका मुख्य कारण AI और डेटा सेंटर्स की मांग है। वहीं, भारत का सेमीकंडक्टर मार्केट 2030 तक $100 बिलियन और 2035 तक $189 बिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है, जो घरेलू बाजार में बड़ी संभावनाओं को दर्शाता है। अकेले GaN LED चिप्स मार्केट 2034 तक $74 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, जो कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोटिव सेक्टर्स में माइक्रो-LED की बढ़ती मांग से प्रेरित है। भारत का OSAT मार्केट भी विस्तार के लिए तैयार है, जिसके 2032 तक $3 बिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है। OSAT सेक्टर में, भारत टाटा ग्रुप और CG पावर जैसी कंपनियों के साथ अपने इकोसिस्टम का विकास कर रहा है, जो ASE Technology और Amkor Technology जैसे वैश्विक दिग्गजों से प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।

चिप मैन्युफैक्चरिंग की चुनौतियाँ

सरकारी समर्थन और महत्वाकांक्षी लक्ष्यों के बावजूद, एक प्रमुख सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग राष्ट्र बनने में कई बड़ी बाधाएं हैं। फैब्रिकेशन प्लांट्स (Fabs) बनाने में भारी पूंजी लगती है; एक सिंगल फैब की लागत अरबों डॉलर हो सकती है और इसे लगातार अपग्रेड करने की आवश्यकता होती है, जिसमें उच्च जोखिम शामिल हैं। कुशल श्रमिकों की गंभीर कमी भी एक चिंता का विषय है, जिसके लिए अनुमान है कि जल्द ही 200,000 से अधिक विशेषज्ञों की आवश्यकता होगी। इंफ्रास्ट्रक्चर की कमियां, जैसे अविश्वसनीय बिजली आपूर्ति और खराब लॉजिस्टिक्स, कुशल उत्पादन में बाधा डाल सकती हैं। भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई चेन के मुद्दे अस्थिरता बढ़ाते हैं, जो कच्चे माल की सोर्सिंग और दीर्घकालिक स्थिरता को प्रभावित करते हैं। CML और SSPL की सफलता मजबूत निष्पादन (execution), नई तकनीक अपनाने और उद्योग-व्यापी चुनौतियों पर काबू पाने पर निर्भर करेगी।

भविष्य के चिप इकोसिस्टम का निर्माण

इन नवीनतम अनुमोदनों से भारत की फैब्रिकेशन से लेकर असेंबली और टेस्टिंग तक एक संपूर्ण सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन बनाने की रणनीति को बढ़ावा मिला है। ISM और प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) जैसी पहलों के माध्यम से सरकारी समर्थन का उद्देश्य अधिक निवेश आकर्षित करना और नवाचार को प्रोत्साहित करना है। जैसे-जैसे अधिक ISM प्रोजेक्ट्स कमर्शियल ऑपरेशंस की ओर बढ़ रहे हैं, भारत खुद को वैश्विक सेमीकंडक्टर बाजार में एक बड़ा हिस्सा हासिल करने के लिए तैयार कर रहा है, जो घरेलू जरूरतों और निर्यात दोनों अवसरों से प्रेरित है।

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