Groww Share Price: नेट प्रॉफिट में तूफानी तेजी, पर **43x** वैल्यूएशन पर निवेशकों की नजर!

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Groww Share Price: नेट प्रॉफिट में तूफानी तेजी, पर **43x** वैल्यूएशन पर निवेशकों की नजर!
Overview

Groww की पैरेंट कंपनी Billionbrains Garage Ventures ने Q4 FY26 में **122%** का जबरदस्त मुनाफा दर्ज किया है, जिसके बाद कंपनी के शेयर को लेकर निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ गई है।

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Billionbrains Garage Ventures, Groww की पैरेंट कंपनी, ने Q4 FY26 के नतीजे पेश किए हैं, जो बेहद दमदार रहे। 81% बढ़कर ₹1,536 करोड़ की कुल इनकम पर, कंपनी का नेट प्रॉफिट 122% की तूफानी तेजी के साथ ₹686 करोड़ पर पहुंच गया। यह प्रॉफिट ग्रोथ कंपनी की इनकम ग्रोथ से काफी ज़्यादा है, जो इसके मजबूत ऑपरेशनल लेवरेज (operational leverage) और बढ़ी हुई एफिशिएंसी (efficiency) को दर्शाता है। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट ₹309 करोड़ था। Groww ने इस दौरान अपने यूजर्स और एसेट्स (assets) में भी अच्छा खासा इजाफा किया है। वहीं, इसके प्रतिद्वंद्वी Angel One ने भी 40% ज़्यादा नेट सेल्स पर अपना नेट प्रॉफिट लगभग दोगुना करके ₹351 करोड़ दर्ज किया, हालांकि Groww की प्रॉफिट ग्रोथ की रफ्तार कहीं ज़्यादा तेज रही।

Groww का वैल्यूएशन (valuation) इस समय ज़बरदस्त चर्चा में है। यह 43 गुना फॉरवर्ड अर्निंग्स (forward earnings) पर ट्रेड कर रहा है, जो इसे दुनिया का सबसे महंगा ब्रोकरेज स्टॉक (brokerage stock) बनाता है। यह ग्लोबल पीयर्स जैसे Robinhood Markets और Interactive Brokers, और लोकल कॉम्पिटिटर Angel One से काफी ऊपर है। Groww का यह प्रीमियम वैल्यूएशन 28.3% मार्केट शेयर (FY26) और करीब 1.3 करोड़ एक्टिव क्लाइंट्स (active clients) के दम पर है, जिससे यह भारत का सबसे बड़ा ब्रोकर बन गया है। तुलनात्मक रूप से, Angel One का मार्केट कैप लगभग ₹29,000 करोड़ है और यह 31-32x P/E रेश्यो पर ट्रेड कर रहा है। Angel One जहां लेंडिंग, वेल्थ मैनेजमेंट और इंश्योरेंस जैसे बिज़नेस में डाइवर्सिफाई कर रहा है, वहीं Groww भी वेल्थ मैनेजमेंट और लेंडिंग में विस्तार कर रहा है, लेकिन उसका मुख्य फोकस डिजिटल ब्रोकिंग पर बना हुआ है।

भारतीय सिक्योरिटीज ब्रोकरेज मार्केट डिजिटल एडॉप्शन (digital adoption) के चलते लगातार बढ़ रहा है। हालांकि, इस सेक्टर को रेगुलेटरी बदलावों (regulatory changes) से जुड़े कुछ चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है। डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग (derivatives trading) पर नियमों में बदलाव और मार्जिन (margin) बढ़ाने के साथ-साथ सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (securities transaction tax) में Hike ने FY25 में ट्रेडिंग वॉल्यूम और ब्रोकर प्रॉफिट को प्रभावित किया था। ज़ीरो-ब्रोकरेज प्राइसिंग (zero-brokerage pricing) जैसी कड़ी प्रतिस्पर्धा के चलते कंपनियाँ नए इनकम सोर्स तलाश रही हैं। Groww का 43 गुना फॉरवर्ड अर्निंग्स का वैल्यूएशन काफी ज़्यादा है। इसमें थोड़ी सी भी कमी, जैसे यूजर एक्वीजीशन (user acquisition) की रफ्तार धीमी होना या कोई अनपेक्षित रेगुलेटरी बदलाव, इसके वैल्यूएशन में बड़ी गिरावट ला सकती है। Groww की कमाई 84.5% ब्रोकरेज इनकम (FY25) पर निर्भर करती है, जो इसे Angel One जैसे डाइवर्सिफाइड प्लेयर्स की तुलना में ज़्यादा सेंसिटिव बनाती है।

इन ज़बरदस्त वैल्यूएशन चिंताओं के बावजूद, BofA Securities जैसे एनालिस्ट्स Groww के लॉन्ग-टर्म आउटलुक (long-term outlook) को लेकर पॉजिटिव बने हुए हैं। उनका अनुमान है कि मार्च 2028 तक कंपनी की एनुअल रेवेन्यू ग्रोथ (annual revenue growth) 30% रह सकती है। Groww द्वारा वेल्थ मैनेजमेंट और कंज्यूमर लेंडिंग (consumer lending) में किए जा रहे प्रयास एक ब्रॉड रेवेन्यू बेस बनाने और ब्रोकरेज फीस पर निर्भरता कम करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। अब इन्वेस्टर्स इस बात पर बारीकी से नज़र रखेंगे कि Groww अपनी मार्केट लीडरशिप कैसे बनाए रखता है, अपने प्रीमियम वैल्यूएशन को कैसे जस्टिफाई करता है, और बदलते मार्केट में अपनी डाइवर्सिफिकेशन स्ट्रैटेजी (diversification strategy) को कितनी सफलतापूर्वक लागू करता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.