Google Play India पर बड़ी देरी, देसी ऐप्स की चांदी?

TECH
Whalesbook Logo
AuthorNeha Patil|Published at:
Google Play India पर बड़ी देरी, देसी ऐप्स की चांदी?
Overview

Google अपने Play Store की नीतियों में बड़ा बदलाव करने जा रहा है, जिसमें डेवलपर्स के लिए कम कमीशन और फ्लेक्सिबल बिलिंग के विकल्प शामिल हैं। हालांकि, भारत के लिए इन बदलावों का रोलआउट पश्चिमी बाजारों से लगभग **15 महीने** पीछे है। इस देरी को लेकर भारतीय डेवलपर्स नाराज़ हैं और उन्हें डर है कि इससे उनकी कॉम्पिटिटिव पोजीशन कमज़ोर होगी और Indus Appstore जैसे लोकल ऐप्स को फायदा मिलेगा।

Instant Stock Alerts on WhatsApp

Used by 10,000+ active investors

1

Add Stocks

Select the stocks you want to track in real time.

2

Get Alerts on WhatsApp

Receive instant updates directly to WhatsApp.

  • Quarterly Results
  • Concall Announcements
  • New Orders & Big Deals
  • Capex Announcements
  • Bulk Deals
  • And much more

Google Play की नई पॉलिसी: क्या बदल रहा है?

Google Play Store अपने बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव ला रहा है, जिसका मकसद डेवलपर्स के लिए कमाई और ऐप डिस्ट्रीब्यूशन को आसान बनाना है। इन बदलावों में कम कमीशन और अल्टरनेटिव बिलिंग सिस्टम का इस्तेमाल करने में ज़्यादा फ्लेक्सिबिलिटी शामिल है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब ऐप की पहली बार की इंस्टॉल पर 15% सर्विस फीस लगेगी, जबकि पहले से मौजूद ऐप्स के लिए यह 20% होगी। अगर डेवलपर्स Google Play की बिलिंग सिस्टम का इस्तेमाल करते हैं, तो अमेरिका, यूके और ईईए (EEA) जैसे क्षेत्रों में अतिरिक्त 5% की मार्केट-स्पेसिफिक रेट लागू होगी। Google एक 'रजिस्टर्ड ऐप स्टोर्स' प्रोग्राम भी ला रहा है, जिससे थर्ड-पार्टी ऐप स्टोर इंस्टॉल करना आसान होगा। इन बदलावों का लक्ष्य डेवलपर्स के लिए कमाई और डिस्ट्रीब्यूशन के ज़्यादा ऑप्शन देना है, जो खासकर मोबाइल गेमिंग और डिजिटल एंटरटेनमेंट सेक्टर में स्टार्टअप्स के लिए फायदेमंद हो सकता है।

भारत में 15 महीने की देरी: डेवलपर्स क्यों परेशान?

Google Play Store के ग्लोबल रोलआउट शेड्यूल में भारत के लिए एक बड़ा गैप देखा जा रहा है। जहां अमेरिका और यूरोप जैसे देशों में ये पॉलिसी अपडेट 30 जून 2026 तक लागू हो जाएंगे, वहीं भारत में इसे 30 सितंबर 2027 तक लागू करने की योजना है। यह 15 महीने की लंबी देरी भारतीय टेक इंडस्ट्री के लीडर्स के लिए चिंता का विषय बन गई है। उनका कहना है कि तेज़ी से बदलते डिजिटल इकोनॉमी में, इतनी देरी अस्वीकार्य है। यह भारतीय डेवलपर्स के लिए एक अनइक्वल प्लेयिंग फील्ड तैयार करती है, जिससे उनकी ग्लोबल कंपनियों के मुकाबले कॉम्पिटिटिवनेस पर असर पड़ सकता है। बता दें कि भारत का स्मार्टफोन मार्केट तेज़ी से बढ़ रहा है, जो 2025 में 15.2 करोड़ यूनिट तक पहुंच गया था।

रेगुलेटरी एक्शन और लोकल दिग्गजों की एंट्री

भारत में Google Play Store की नीतियों पर रेगुलेटरी एक्शन भी होता रहा है। कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) ने पहले Google पर डोमिनेंट पोजीशन के गलत इस्तेमाल के लिए लगभग ₹936.44 करोड़ का जुर्माना लगाया था। हालांकि, नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने मार्च 2025 में इस जुर्माने को घटाकर ₹216.69 करोड़ कर दिया था, जिस पर Google ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की है। ऐसे में, ऐप स्टोर प्रैक्टिसेज को लेकर Google और भारतीय अथॉरिटीज के बीच तनाव साफ दिखता है। इसी बीच, लोकल ऐप स्टोर्स तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं। PhonePe द्वारा फरवरी 2024 में लॉन्च किए गए Indus Appstore ने सितंबर 2025 तक 10 करोड़ (यानी 100 मिलियन) डिवाइस तक अपनी पहुंच बना ली है। रीजनल भाषाओं पर फोकस और इन-ऐप ट्रांजैक्शन पर ज़ीरो कमीशन का मॉडल इसे Google Play के लिए एक सीधा चैलेंजर बनाता है, खासकर छोटे शहरों और युवा डेमोग्राफिक्स के बीच।

Alphabet का वैल्यूएशन और आगे का रास्ता

Alphabet (Google) के शेयर की कीमत मार्च 2026 की शुरुआत में लगभग $300-$303 के आसपास ट्रेड कर रही थी। कंपनी की मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग $3.61 ट्रिलियन है और P/E रेश्यो करीब 27.8 है। एनालिस्ट्स का आउटलुक ज़्यादातर बुलिश (bullish) है, जिसमें 2026 के लिए $375.00 का मीडियन प्राइस टारगेट और 'स्ट्रॉन्ग बाय' (Strong Buy) की कंसेंसस रेटिंग है। अपनी मज़बूत फाइनेंशियल पोजीशन और एनालिस्ट्स के पॉजिटिव सेंटिमेंट के बावजूद, कंपनी को भारत जैसे बड़े ग्रोथ मार्केट में बदलते रेगुलेटरी माहौल और बढ़ती कॉम्पिटिशन से निपटना होगा। Play Store पॉलिसी में इस देरी से अनजाने में उभरते लोकल प्लेटफॉर्म्स को फायदा मिल सकता है।

जोखिम (Bear Case)

भारत में Play Store पॉलिसी के इम्प्लीमेंटेशन में 15 महीने की लंबी देरी एक बड़ा जोखिम पेश करती है। यह न केवल Google को अपने लेटेस्ट डेवलपर-फ्रेंडली टर्म्स को एक ज़रूरी मार्केट में पेश करने से रोकती है, बल्कि Indus Appstore जैसे लोकल कॉम्पिटिटर्स के लिए मार्केट शेयर और डेवलपर लॉयल्टी हासिल करने का सुनहरा मौका भी पैदा करती है। Play Store प्रैक्टिसेज को लेकर रेगुलेटर्स के साथ चल रहे लीगल बैटल, जुर्माने में कमी के बावजूद, भारत में Google के बिजनेस मॉडल पर भविष्य में पाबंदियों की संभावना को दर्शाते हैं। इसके अलावा, एडवरटाइजिंग रेवेन्यू पर निर्भरता, भले ही यह डोमिनेंट हो, Alphabet के लिए एक कंसंट्रेशन रिस्क बनी हुई है। ऐसे में, सभी ज़रूरी मार्केट्स में इफेक्टिव मोनेटाइजेशन और डेवलपर रिलेशन, सस्टेन्ड ग्रोथ के लिए बेहद अहम हैं।

Get stock alerts instantly on WhatsApp

Quarterly results, bulk deals, concall updates and major announcements delivered in real time.

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.