GlobalFoundries का Kolkata में बड़ा दांव! India के चिप बनाने के सपने को मिलेगी नई उड़ान

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AuthorMehul Desai|Published at:
GlobalFoundries का Kolkata में बड़ा दांव! India के चिप बनाने के सपने को मिलेगी नई उड़ान
Overview

US की दिग्गज सेमीकंडक्टर कंपनी GlobalFoundries ने Kolkata में अपने डिज़ाइन और टेस्टिंग सेंटर का विस्तार करने का ऐलान किया है। यह विस्तार **12,000 स्क्वायर फीट** के एरिया में होगा और यह कंपनी के भारत में बढ़ते दखल को दर्शाता है।

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Kolkata बना सेमीकंडक्टर का नया हब

भारत को सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की महत्वकांक्षी योजना को एक और बड़ा सहारा मिला है। US की प्रमुख चिप निर्माता कंपनी GlobalFoundries ने Kolkata के STPI हब के भीतर अपने डिज़ाइन और टेस्टिंग सेंटर का विस्तार करने की घोषणा की है। यह विस्तार इसी मौजूदा बिल्डिंग में ही किया जाएगा, जो भारत के बढ़ते टैलेंट पूल का फायदा उठाने के GlobalFoundries के इरादे को साफ करता है। यह कदम सितंबर 2024 में भारत-US के बीच हुए एक संयुक्त बयान के अनुरूप है, जिसमें चिप मैन्युफैक्चरिंग में रिसर्च और डेवलपमेंट पर जोर दिया गया था।

गैलियम नाइट्राइड (GaN) और RF डिज़ाइन पर फोकस

इस विस्तार का मुख्य कारण कंपनी का एडवांस्ड टेक्नोलॉजी जैसे गैलियम नाइट्राइड (GaN) और रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) डिज़ाइन पर फोकस करना है। GaN सेमीकंडक्टर, पारंपरिक सिलिकॉन की तुलना में बेहतर एफिशिएंसी और छोटे साइज के कारण इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs), AI, डेटा सेंटर्स और कनेक्टेड सिस्टम्स जैसे अगली पीढ़ी के इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए बेहद ज़रूरी माने जाते हैं। GlobalFoundries, जो दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इंडिपेंडेंट सेमीकंडक्टर फाउंड्री है, का यह निवेश भारत के उस लक्ष्य को सीधे तौर पर सपोर्ट करता है जिसके तहत देश डिज़ाइन और असेंबली से आगे बढ़कर मैन्युफैक्चरिंग में भी अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है।

GlobalFoundries की खास जगह

जहां TSMC ग्लोबल फाउंड्री मार्केट में 70% से ज़्यादा हिस्सेदारी के साथ राज करती है और Samsung दूसरे नंबर पर है, वहीं GlobalFoundries की अपनी एक खास जगह है। कंपनी मार्केट का करीब 4-6% हिस्सा रखती है। GlobalFoundries लीडिंग एज (3nm/5nm) पर सीधे मुकाबला करने की बजाय मैच्योर प्रोसेस नोड्स और स्पेशल टेक्नोलॉजी पर फोकस करती है। Kolkata सेंटर, जो डिज़ाइन और टेस्टिंग पर केंद्रित है, कंपनी को ऑटोमोटिव, IoT और कम्युनिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे मार्केट्स के लिए चिप्स डेवलप करने में मदद करेगा, जिसके लिए बड़े फॅब्रिकेशन प्लांट्स की भारी पूंजी की ज़रूरत नहीं होती।

भारत की सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षाएं: चुनौतियां और उम्मीदें

GlobalFoundries का यह विस्तार ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) के तहत घरेलू सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए ₹76,000 करोड़ का भारी निवेश कर रही है। प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) और डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव (DLI) जैसी सरकारी स्कीमें फॅब्रिकेशन, असेंबली, टेस्टिंग और डिज़ाइन में मदद कर रही हैं। हालांकि, भारत की सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षाओं के रास्ते में कई बड़ी बाधाएं हैं। देश अपनी 80-90% से ज़्यादा सेमीकंडक्टर ज़रूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी, स्पेशलाइज्ड मैन्युफैक्चरिंग टैलेंट की कमी और सिलिकॉन वेफर्स व स्पेशल केमिकल्स जैसे ज़रूरी रॉ मटेरियल्स की सप्लाई चेन पर निर्भरता प्रमुख चुनौतियां हैं।

खतरे का संकेत: जोखिम और हकीकत

सकारात्मक संकेतों के बावजूद, भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र का रास्ता चुनौतियों से भरा है। भारत की आयात पर भारी निर्भरता और वर्तमान में डिज़ाइन, असेंबली, टेस्टिंग और पैकेजिंग तक सीमित रहना, मैन्युफैक्चरिंग की गहराई और डिज़ाइन की मज़बूती के बीच की खाई को दर्शाता है। फॅब्रिकेशन प्लांट्स के लिए भारी पूंजी, भरोसेमंद बिजली और अल्ट्रा-प्योर वाटर जैसे मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर की ज़रूरत होती है। GlobalFoundries जैसी बड़ी कंपनी के लिए भी TSMC जैसे दिग्गजों से कड़ी वैश्विक प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा, भारत के सेमीकंडक्टर मिशन की सफलता सरकारी नीतियों की स्थिरता, इंसेंटिव्स के प्रभावी कार्यान्वयन और इंफ्रास्ट्रक्चर व टैलेंट की कमी को दूर करने की क्षमता पर निर्भर करती है।

आगे का रास्ता

Kolkata सेंटर का विकास भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग को आत्मनिर्भर बनाने के विज़न को साकार करने की दिशा में एक अहम कदम है। यह स्थानीय टैलेंट के विकास को बढ़ावा दे सकता है और पूर्वी भारत के टेक परिदृश्य में और अधिक निवेश आकर्षित कर सकता है। हालांकि, इसका दीर्घकालिक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि GlobalFoundries अपनी डिज़ाइन और टेस्टिंग क्षमताओं को भारत में व्यापक मैन्युफैक्चरिंग साझेदारी में कैसे बदल पाती है, और भारत अपने स्वदेशी सेमीकंडक्टर उत्पादन इंफ्रास्ट्रक्चर में मौजूदा महत्वपूर्ण कमियों को कितनी जल्दी दूर कर पाता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.