AI के दम पर ग्लोबल टेक कंपनियों की तूफानी तेजी
ग्लोबल मार्केट में आज मिला-जुला कारोबार देखा गया, जहां एक तरफ अमेरिकी-ईरान तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया और ब्रेंट क्रूड $120 प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। लेकिन इन चिंताओं के बावजूद, Meta, Amazon और Alphabet जैसी बड़ी अमेरिकी टेक कंपनियों ने पहली तिमाही में उम्मीद से कहीं बेहतर नतीजे घोषित किए हैं। इनकी कमाई में AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की ग्रोथ का बड़ा योगदान रहा, खासकर क्लाउड, सर्च और एडवरटाइजिंग बिजनेस में। इसी तरह, Samsung Electronics ने भी रिकॉर्ड तिमाही मुनाफा दर्ज किया, जिसका मुख्य कारण AI डेटा सेंटर मेमोरी चिप्स की भारी डिमांड रही। इसके सेमीकंडक्टर यूनिट ने कंपनी की कमाई का 90% से अधिक हिस्सा दिया। यह AI-संचालित टेक रेवेन्यू की बूम, व्यापक बाजार की सतर्कता के विपरीत थी।
Mphasis के Q4 नतीजे: AI की मदद से शानदार परफॉरमेंस
दूसरी ओर, भारत में Mphasis Ltd. ने चौथी तिमाही में मजबूत नतीजे पेश किए हैं, जो देश की IT सर्विसेज में इसकी मजबूती को दर्शाता है। कंपनी का रेवेन्यू पिछली तिमाही की तुलना में 6% बढ़कर ₹4,243 करोड़ हो गया, जबकि नेट प्रॉफिट 15.3% उछलकर ₹510 करोड़ रहा। कंपनी का EBIT मार्जिन 15.4% पर स्थिर रहा। नितिन राकेश को फिर से CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त किया गया है, और बोर्ड ने ₹62 प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड (Dividend) देने का प्रस्ताव दिया है।
वैल्यूएशन पर सवाल, पर AI की ग्रोथ का भरोसा
हालांकि Mphasis के नतीजे AI पर सेक्टर के फोकस को दर्शाते हैं, लेकिन इसके वैल्यूएशन पर भी नजर रखने की जरूरत है। ₹42,948 करोड़ के मार्केट कैप वाली कंपनी का ट्रेलिंग पी/ई (P/E) 23.9x-29.2x है, जो Infosys, TCS और Wipro जैसे बड़े प्रतिद्वंद्वियों (14x-18x) से अधिक है। हालांकि, Coforge और Persistent Systems जैसी स्पेशलाइज्ड फर्मों के मुकाबले इसका पी/ई (P/E) बराबर या कम है, जो निवेशकों के इसके AI सर्विसेज ग्रोथ पर फोकस को दिखाता है।
AI से फायदे के साथ 'AI-डिफ्लेशन' का खतरा
AI सेक्टर में बूम की बात हो रही है, लेकिन एनालिस्ट्स 'AI-संचालित डिफ्लेशन' (AI-driven deflation) को लेकर आगाह कर रहे हैं। Kotak Institutional Equities का अनुमान है कि AI की दक्षता और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण पारंपरिक IT सर्विस कॉस्ट 3-5% तक कम हो सकती है, भले ही कुल टेक खर्च बढ़े। Gartner भी IT सर्विसेज ग्रोथ में धीमी गति की भविष्यवाणी करता है, और AI प्रस्तावों का एक मानक हिस्सा बन जाएगा, साथ ही AI-सेंट्रिक डील नए कॉन्ट्रैक्ट्स का एक बड़ा हिस्सा होंगी। कंपनियों को AI की मांग को मूल्य निर्धारण दबाव और बाजार हिस्सेदारी के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच संतुलित करना होगा।
कच्चे तेल और कमजोर रुपये का IT सेक्टर पर असर
लगातार बनी हुई भू-राजनीतिक तनाव, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास, कच्चे तेल की कीमतों को ऊंचा रखे हुए है और भारत की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रही है। कच्चे तेल की बढ़ी हुई लागत ने भारतीय रुपये को डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा दिया है, जो 94.85 के करीब है। इससे आयात लागत और महंगाई का जोखिम बढ़ गया है। यह आर्थिक कमजोरी IT सेवाओं के लिए एक कठिन परिचालन वातावरण बनाती है। IT सेवाओं के लिए एक और बड़ा जोखिम यह है कि ग्राहक आउटसोर्सिंग के बजाय इन-हाउस अधिक टेक्नोलॉजी क्षमताएं विकसित कर रहे हैं। Mphasis इस ट्रेंड को स्वीकार करता है और नए सौदे जीतकर इसका मुकाबला करने का लक्ष्य रखता है। प्रतिबंधों और नीतियों से वैश्विक बाजार का विखंडन भी जटिलता बढ़ाता है। एनालिस्ट्स यह भी चेतावनी देते हैं कि AI को अपनाने से राजस्व कम हो सकता है, खासकर कॉन्ट्रैक्ट रिन्यूअल पर, क्योंकि ग्राहक उत्पादकता लाभ को मूल्य निर्धारण में शामिल करेंगे।
भारतीय IT सेक्टर का भविष्य
इन चुनौतियों के बावजूद, भारत के IT सेक्टर से AI को अपनाने के कारण ग्रोथ की उम्मीद है। Nasscom का अनुमान है कि FY26 में इंडस्ट्री ग्रोथ 6.1% बढ़कर $315 बिलियन हो जाएगी, जिसमें AI रेवेन्यू का अनुमान $10-$12 बिलियन है। एनालिस्ट रेटिंग्स मिली-जुली हैं; ICICI Direct ने Mphasis को ₹2,550 के टारगेट प्राइस के साथ 'BUY' रेटिंग दी है, जो इसके AI-केंद्रित डिलीवरी पर प्रकाश डालता है। वहीं, Kotak ने Wipro और HCL Technologies जैसे कुछ साथियों को 'REDUCE' (कम करें) रेट किया है। आने वाली तिमाहियों में यह पता चलेगा कि Mphasis जैसी कंपनियां मुद्रा दबाव और संभावित AI-संचालित मूल्य कटौती का प्रबंधन करते हुए AI मांग को स्थिर रेवेन्यू और प्रॉफिट ग्रोथ में कैसे बदल पाती हैं।
