Gen Z की पहली पसंद Tech Giants! Google, Microsoft को तरजीह, India की कंपनियां पीछे क्यों?

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Gen Z की पहली पसंद Tech Giants! Google, Microsoft को तरजीह, India की कंपनियां पीछे क्यों?
Overview

भारत में Gen Z युवा Google, Microsoft और Amazon जैसी टेक कंपनियों को अपनी पहली पसंद बता रहे हैं। वे सैलरी (11-13%) से ज्यादा सीखने और ग्रोथ (60-65%) को अहमियत देते हैं। हालांकि, सैलरी की जानकारी न होने के कारण करीब 27% युवा जॉब एप्लीकेशन छोड़ देते हैं। वहीं, 36% HR लीडर्स Gen Z को संभालने के लिए तैयार नहीं हैं, जिससे जल्दी टर्नओवर (turnover) हो रहा है।

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Gen Z की करियर पसंद में आया बड़ा बदलाव

भारत के युवा पेशेवरों की करियर की महत्वाकांक्षाओं में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। वे अब पारंपरिक कंसल्टिंग और कंज्यूमर गुड्स की नौकरियों से हटकर टेक करियर और ग्लोबल अनुभव के अवसरों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। इस बदलाव से कंपनियां प्रतिभाओं को आकर्षित करने के तरीके पर पुनर्विचार करने को मजबूर हो रही हैं।

टेक दिग्गजों का दबदबा

Google, Microsoft और Amazon जैसी ग्लोबल टेक कंपनियां अब भारत में Gen Z के लिए टॉप चॉइस बन गई हैं। इंजीनियरिंग और बिजनेस, दोनों तरह के ग्रेजुएट्स में यह रुचि डिजिटल स्किल्स, इनोवेटिव रोल्स और अंतरराष्ट्रीय करियर पाथ की चाहत से जुड़ी है। ये कंपनियां, जिनकी मार्केट वैल्यूAlphabet (Google की पेरेंट) लगभग $3.70 ट्रिलियन, Microsoft $3.00 ट्रिलियन, और Amazon $2.30 ट्रिलियन (मार्च 2026 तक) है, top talent को आकर्षित करती हैं।

सैलरी से ऊपर 'सीखना और तरक्की'

डेटा साफ दिखाता है कि Gen Z नौकरी में क्या वैल्यू करता है। 60% से 65% Gen Z जॉब सीकर्स सीखने और स्किल डेवलपमेंट को सबसे महत्वपूर्ण मानते हैं, जबकि सैलरी सिर्फ 11-13% लोगों के लिए मायने रखती है। यह एक बड़े ट्रेंड का हिस्सा है, जहां 91% Gen Z प्रोफेशनल्स सीखने के मौकों को प्राथमिकता देते हैं। 90% से ज्यादा युवा तेजी से करियर एडवांसमेंट, बेहतर लर्निंग और वर्क-लाइफ बैलेंस के लिए कम सैलरी लेने को भी तैयार हैं।

पे ट्रांसपेरेंसी: हायरिंग में सबसे बड़ी रुकावट

ग्रोथ की चाहत के बावजूद, सैलरी ट्रांसपेरेंसी (pay transparency) में एक बड़ी खाई है। लगभग 27% कैंडिडेट सैलरी की स्पष्ट जानकारी न होने के कारण हायरिंग प्रोसेस से बाहर हो जाते हैं, जो नौकरी छोड़ने का सबसे बड़ा कारण है। यह एक बड़ी समस्या को उजागर करता है: HR लीडर्स शायद सैलरी को सेकेंडरी मानते हों, लेकिन कैंडिडेट्स अब ट्रांसपेरेंसी को एक बेसिक रिक्वायरमेंट मानते हैं। इस कमी के कारण कंपनियां कीमती टैलेंट खो देती हैं।

Gen Z को संभालने में पिछड़ रहीं कंपनियां

कंपनियां Gen Z की बदलती जरूरतों को पूरा करने में संघर्ष कर रही हैं। सर्वे में शामिल केवल 36% HR लीडर्स इस जनरेशन को हायर और मैनेज करने के लिए पूरी तरह तैयार महसूस करते हैं। यह संगठनात्मक कमी जल्दी टर्नओवर का कारण बनती है, जहां लगभग आधी नई नियुक्तियां ग्रोथ के सीमित अवसरों के कारण नौकरी छोड़ देती हैं, यह सैलरी से भी बड़ी वजह है। Gen Z युवा आमतौर पर दो से तीन साल से ज्यादा उस रोल में नहीं रुकते जहां ग्रोथ रुकी हुई लगे।

भर्ती के तरीके बदलने की जरूरत

कई कंपनियां इंटर्नशिप (internship) ऑफर करती हैं, लेकिन इन इंटर्न्स को फुल-टाइम कर्मचारी में बदलना अक्सर मुश्किल साबित होता है। वहीं, पारंपरिक कैंपस प्लेसमेंट सिस्टम कम महत्वपूर्ण होता जा रहा है, क्योंकि 95% छात्र कैंपस प्लेसमेंट के बाहर के जॉब ऑफर्स के लिए तैयार हैं। कंपनियों को कैंपस ड्राइव के अलावा डिजिटल चैनल्स और पर्सनलाइज्ड आउटरीच का इस्तेमाल करके इस जनरेशन को खोजना होगा।

ग्लोबल कॉम्पिटिशन और अवसर

Gen Z की बदलती प्राथमिकताएं जॉब मार्केट की असमानताओं को भी उजागर करती हैं। जिस कैंपस में ज्यादा रिक्रूटर्स जाते हैं, वहां के छात्रों को बेहतर जॉब ऑफर्स मिलते हैं। 78% कंपनियां इंटर्नशिप देती हैं, लेकिन केवल 16% ही ज्यादातर इंटर्न्स को फुल-टाइम स्टाफ में बदल पाती हैं। 51% भारतीय Gen Z विदेश में बेहतर सैलरी वाली रिमोट जॉब्स लेने को तैयार हैं, जो स्थानीय नियोक्ताओं के लिए एक बड़ा ग्लोबल चैलेंज है।

कंपनियों के लिए आगे का रास्ता

भारतीय कंपनियों को यह समझना होगा कि सिर्फ एम्प्लॉयर ब्रांड (employer brand) और सैलरी Gen Z को न तो आकर्षित कर सकती है और न ही बनाए रख सकती है। भविष्य के लिए स्पष्ट सैलरी, दिखने वाले करियर पाथ (career paths), शुरुआती दौर से ही सार्थक काम और निरंतर सीखने के अवसरों वाली एक व्यापक रणनीति की जरूरत है। आज के प्रतिस्पर्धी बाजार में, सफलता उच्च सैलरी देने की बजाय तेजी से डेवलपमेंट दिखाने पर निर्भर करती है। जो कंपनियां नहीं बदलेंगी, वे टैलेंट खो देंगी और अगली पीढ़ी के वर्कर्स को आकर्षित करने में संघर्ष करेंगी।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.