निर्यातकों को AI से मिलेगी रफ्तार
GS1 India ने भारतीय कारोबारियों को ग्लोबल मार्केट में आगे बढ़ाने के लिए चेन्नई में अपना चेन्नई डेवलपमेंट सेंटर बड़ा किया है। इस सेंटर में अब 2D बारकोड्स, पूरी सप्लाई चेन की ट्रैकिंग और AI जैसी एडवांस्ड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होगा। इसका सीधा फायदा भारतीय निर्यातकों को मिलेगा, जो EU डिजिटल प्रोडक्ट पासपोर्ट (DPP), फूड सेफ्टी मॉडर्नाइजेशन एक्ट (FSMA) और EU डिफॉरेस्टेशन रेगुलेशन (EUDR) जैसे जटिल अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करना चाहते हैं। ये नियम उत्पादों के बारे में सटीक जानकारी और उनके इतिहास का सबूत मांगते हैं। नए सेंटर में रोज़ाना अरबों प्रोडक्ट स्कैन के डेटा को ऑटोमेटेड तरीके से चेक किया जाएगा, जिससे सप्लाई चेन पर भरोसा बढ़ेगा।
SMEs के लिए क्या हैं सबसे बड़ी अड़चनें?
लेकिन, भारत के छोटे और मध्यम उद्योगों (SMEs) को ये नई और एडवांस्ड तकनीकें अपनाने में बड़ी मुश्किल आ रही है। भले ही 67% भारतीय SMEs डिजिटली तैयार हैं, लेकिन उनमें से केवल 23% ही AI जैसी नई तकनीकों का इस्तेमाल कर पा रहे हैं। कई SMEs को टेक्नोलॉजी में निवेश का सीधा फायदा नहीं दिखता ( 84% ) और उन्हें डेटा सुरक्षा को लेकर भी चिंता है ( 81% )। ऐसे में, केवल 29% SMEs ने ही अपने डिजिटल सिस्टम को पूरी तरह से इंटीग्रेट किया है। GS1 India के इस विस्तार की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे SMEs की इन चिंताओं को कैसे दूर करते हैं। SMEs, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, अलग-अलग स्तर की डिजिटल तैयारी के साथ काम करते हैं। कई अनौपचारिक सिस्टम में काम करते हैं, जहाँ EUDR जैसे नियमों के लिए ज़रूरी ट्रैकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद नहीं है।
ग्लोबल स्टैंडर्ड्स और मुकाबला
ट्रैकिंग और ट्रेसिंग सॉल्यूशंस का ग्लोबल मार्केट अरबों डॉलर का हो चुका है और तेज़ी से बढ़ रहा है। बारकोड्स का इस्तेमाल तो आम है, लेकिन RFID और सीरियलाइजेशन जैसी तकनीकें भी अपनी जगह बना रही हैं। GS1 स्टैंडर्ड्स पूरी दुनिया में प्रोडक्ट्स की ट्रेसिबिलिटी के लिए सबसे अहम भाषा माने जाते हैं, जो मेडिसिन से लेकर खाने-पीने की चीजों जैसे कई उद्योगों के लिए ज़रूरी हैं। GS1 India जहाँ FSSAI और BIS जैसे नियामकों के साथ काम कर रहा है, वहीं AI सप्लाई चेन टूल्स के मामले में IBM और Microsoft जैसी टेक कंपनियों से भी मुकाबले में है। GS1 India की सबसे बड़ी ताकत यही है कि वे इन वैश्विक रूप से मान्यता प्राप्त स्टैंडर्ड्स को उपलब्ध कराते हैं, जो अनुपालन (compliance) और विभिन्न पार्टनर्स के बीच स्मूथ ऑपरेशंस में मदद करते हैं।
असल में लागू करने की चुनौती
GS1 India के इस बड़े हुए सेंटर के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि क्या इसके टारगेट यूज़र्स, यानी भारत के SMEs, इन नए टूल्स का असल में इस्तेमाल कर पाएंगे। जब ज़्यादातर SMEs डेटा सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और टेक्नोलॉजी में निवेश के फायदों को लेकर अनिश्चित हैं, तो इस बात का खतरा है कि तकनीक को सिर्फ ऊपरी तौर पर अपनाया जाएगा। टेक्सटाइल और खेती जैसे क्षेत्रों में फैले सप्लाई चेन, EUDR जैसे नियमों के लिए ज़रूरी विस्तृत ट्रैकिंग को मुश्किल बनाते हैं। ऐसे में, यह संभव है कि एडवांस्ड डिजिटल पासपोर्ट सिस्टम, शुरुआती डेटा की खराब क्वालिटी के बिना ठीक से काम न करे।
आगे की राह
GS1 India का अपग्रेडेड चेन्नई सेंटर, मॉडर्न सप्लाई चेन मैनेजमेंट और रेगुलेटरी कंप्लायंस के लिए ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर मुहैया कराता है। AI और ग्लोबल स्टैंडर्ड्स का इस्तेमाल इंडस्ट्री की मौजूदा दिशाओं और भरोसेमंद, डेटा-आधारित ट्रेड के GS1 के लक्ष्य के अनुरूप है। इस पहल की असली सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि भारतीय उद्योग, खासकर SMEs, इन टूल्स का इस्तेमाल नियमों को पूरा करने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए कितनी अच्छी तरह कर पाते हैं। साधारण बारकोड्स से डिजिटल पासपोर्ट और AI चेक्स तक का सफर एक बड़ा बदलाव है। इसे सफल बनाने के लिए GS1 India को पूरे देश में व्यवसायों को इन सॉल्यूशंस को किफायती और सुरक्षित तरीके से अपनाने में मदद करनी होगी।
