'Minutes' को मिलेगी नई रफ्तार!
Flipkart ने Kunal Gupta को सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (SVP) के पद पर प्रमोट किया है। यह प्रमोशन कंपनी की 'Minutes' नाम की क्विक कॉमर्स सर्विस में आक्रामक विस्तार की ओर इशारा कर रहा है। Flipkart अब 'Minutes' के लिए एक अलग मोबाइल ऐप लाने की तैयारी में है, जिससे ग्राहकों को बेहतर अनुभव मिल सके। साथ ही, कंपनी जल्द ही अपने डार्क स्टोर्स (dark stores) की संख्या को दोगुना करके 1,600 तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। इस विस्तार का मकसद डिलीवरी स्पीड को और बढ़ाना और मार्केट में अपनी पोजीशन मजबूत करना है।
कॉम्पिटिशन और मुनाफे की दौड़
Kunal Gupta की यह नई भूमिका ऐसे समय में आई है जब भारतीय क्विक कॉमर्स मार्केट में कॉम्पिटिशन काफी बढ़ गया है। Flipkart को Blinkit से कड़ी टक्कर मिल रही है, जिसका मार्केट शेयर अनुमानित 44-46% है। Zepto करीब 30% शेयर के साथ दूसरे पायदान पर है, जबकि Swiggy Instamart का मार्केट शेयर लगभग 23% है। Amazon India भी Amazon Now क्विक कॉमर्स ऑपरेशंस को बढ़ाने के लिए $300 मिलियन का निवेश कर रही है।
खास बात यह है कि अब यह सेक्टर तेज ग्रोथ और भारी डिस्काउंट से हटकर प्रॉफिटेबिलिटी (profitability) पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। यह ट्रेंड Flipkart की पेरेंट कंपनी Walmart के नतीजों में भी दिखा, जिसने Q1 FY26 में $165.6 बिलियन का रेवेन्यू दर्ज किया, जिसमें ई-कॉमर्स में 22% की ग्रोथ रही। हालांकि, डार्क स्टोर्स के लिए मेट्रो शहरों में प्रॉफिटेबिलिटी दिख रही है, लेकिन छोटे शहरों (tier-two cities) में ब्रेक-ईवन (break-even) हासिल करना अभी भी एक चुनौती बना हुआ है।
आक्रामक विस्तार के जोखिम और भविष्य
Flipkart की यह आक्रामक विस्तार योजना, भले ही मार्केट शेयर बढ़ाने का लक्ष्य रखती हो, इसमें कुछ महत्वपूर्ण जोखिम भी हैं। तेजी से स्केल करने, जैसे हर महीने 100 नए डार्क स्टोर्स जोड़ना, ऑपरेशनल जटिलता और लागत को बढ़ा सकता है। यह तब हो रहा है जब Blinkit और Swiggy Instamart जैसे प्रतिस्पर्धी भी प्रॉफिटेबिलिटी पर ध्यान देने के लिए अपनी ग्रोथ धीमी कर रहे हैं।
Quick Commerce मार्केट के $6.64 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, और 2026 तक यह कुल ई-कॉमर्स GMV का 15% तक हो सकता है। Flipkart की 'Minutes' सर्विस का विस्तार इसे एक प्रमुख दावेदार के रूप में खड़ा करता है, लेकिन इसकी सफलता लागतों को प्रबंधित करने और इस कैपिटल-इंटेंसिव (capital-intensive) और प्रतिस्पर्धी बाजार में मुनाफा कमाने की क्षमता पर निर्भर करेगी। गैर-मेट्रो बाजारों में विस्तार ग्राहक आधार बनाने में मदद कर सकता है, लेकिन छोटे शहरों में स्टोर्स को प्रॉफिटेबल बनने में अधिक समय लग सकता है।
