Flipkart Layoffs: IPO की तैयारी में छंटनी! कंपनी को हुआ बड़ा घाटा, जानें क्या है वजह

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Flipkart Layoffs: IPO की तैयारी में छंटनी! कंपनी को हुआ बड़ा घाटा, जानें क्या है वजह
Overview

Flipkart ने अपनी IPO की तैयारी के तहत लगभग **250 से 300** कर्मचारियों की छंटनी की है। यह कदम कंपनी के परिचालन को सुव्यवस्थित करने का हिस्सा माना जा रहा है, क्योंकि कंपनी ने Financial Year 25 में अपने कंसोलिडेटेड घाटे को बढ़ाकर **₹5,189 करोड़** कर लिया है, भले ही रेवेन्यू **17.3%** बढ़कर **₹82,787.3 करोड़** हो गया।

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छंटनी और IPO की ओर कदम

Flipkart अपने IPO (Initial Public Offering) की राह पर तेजी से आगे बढ़ रही है, जिसके तहत कंपनी ने अपने कार्यबल में लगभग 250 से 300 कर्मचारियों की कटौती की है। यह छंटनी, जो कर्मचारियों के वार्षिक परफॉरमेंस रिव्यू का हिस्सा बताई जा रही है, कंपनी के कुल कार्यबल का लगभग 2-3% है। पिछले साल की शुरुआत में भी 1,000 कर्मचारियों की छंटनी हुई थी। इस बीच, कंपनी ने सीनियर लीडरशिप टीम को मजबूत करने पर भी ध्यान केंद्रित किया है, विभिन्न महत्वपूर्ण विभागों जैसे सप्लाई चेन, कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन, फाइनेंस, एचआर और टेक्नोलॉजी में नए एग्जीक्यूटिव्स की नियुक्ति की है।

वित्तीय नतीजों पर एक नज़र

Financial Year 25 में Flipkart के कंसोलिडेटेड नतीजे मिले-जुले रहे। कंपनी का नेट लॉस बढ़कर ₹5,189 करोड़ हो गया, जो पिछले वित्तीय वर्ष के ₹4,248.3 करोड़ से अधिक है। हालांकि, कंपनी के कंसोलिडेटेड रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशन्स में 17.3% की जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह ₹82,787.3 करोड़ तक पहुंच गया। यह बढ़ता हुआ घाटा मुख्य रूप से कुल खर्चों में 17.4% की वृद्धि के कारण है, जिसमें स्टॉक-इन-ट्रेड की खरीद और फाइनेंस कॉस्ट में भारी बढ़ोतरी शामिल है।

वहीं, कंपनी के मुख्य मार्केटप्लेस आर्म, Flipkart Internet, ने बेहतर प्रदर्शन किया। इसका नेट लॉस 37% घटकर ₹1,494 करोड़ रहा, जबकि रेवेन्यू 14% बढ़कर ₹20,493 करोड़ हो गया।

कड़ा मुकाबला और IPO की राह

भारतीय ई-कॉमर्स बाजार में Amazon India का मार्केटप्लेस ऑपरेटर, Amazon Seller Services, Financial Year 25 में बेहतर वित्तीय ट्रेंड दिखाता है। इसका रेवेन्यू 19% बढ़कर ₹30,139 करोड़ हुआ और नेट लॉस 89% घटकर ₹374.3 करोड़ हो गया। यह Flipkart के बढ़ते घाटे के विपरीत है और बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है। Reliance Retail भी एक बड़ा प्रतिस्पर्धी है।

Flipkart की IPO की योजना के लिए एक महत्वपूर्ण कदम दिसंबर 2025 में उठाया गया, जब नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने कंपनी के डोमिसाइल (Domicile) को सिंगापुर से भारत शिफ्ट करने की मंजूरी दे दी। इससे कंपनी की होल्डिंग स्ट्रक्चर सरल हो गई है और यह भारतीय रेगुलेटरी आवश्यकताओं के अनुरूप घरेलू लिस्टिंग की तैयारी में है। Flipkart ने 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत तक लिस्टिंग के लिए इन्वेस्टमेंट बैंक्स के साथ बातचीत शुरू कर दी है। हालांकि, 2026 की शुरुआत में IPO मार्केट में कुछ नरमी देखी जा रही है, जिससे वैल्यूएशन को लेकर चुनौतियां आ सकती हैं।

आगे की राह और चुनौतियां

Flipkart की वर्तमान रणनीति एक हाई-स्टेक्स गैंबल नजर आ रही है। रेवेन्यू ग्रोथ के बावजूद Financial Year 25 में कंसोलिडेटेड लॉस का बढ़ना मार्जिन पर दबाव या परिचालन लागतों में वृद्धि का संकेत देता है। स्टॉक-इन-ट्रेड खरीद और फाइनेंस कॉस्ट में बढ़ोतरी चिंता का विषय है। Amazon India के मुकाबले Flipkart का प्रदर्शन कमजोर दिखना, बाजार की कड़ी प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है।

IPO की यह दौड़ ऐसे समय में हो रही है जब IPO मार्केट थोड़ा ठंडा है। लिस्टिंग पर औसत गेन में कमी और कुछ आईपीओ के इश्यू प्राइस से नीचे ट्रेड करने की वजह से निवेशकों का रुझान सतर्क दिख रहा है। Flipkart की छंटनी की रणनीति, जिससे कंपनी लागत कम कर सके, पब्लिक मार्केट के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है। Tencent की माइनॉरिटी स्टेक के कारण भारतीय सरकारी नियमों (Press Note 3) के तहत अप्रूवल की आवश्यकता भी रेगुलेटरी जटिलताएं पैदा कर सकती है।

भविष्य का नज़रिया

भारतीय ई-कॉमर्स मार्केट में ग्रोथ जारी रहने की उम्मीद है। 2026 में इसके 12.4% बढ़कर ₹19.7 ट्रिलियन ($225.9 बिलियन) तक पहुंचने का अनुमान है। डिजिटल एडॉप्शन और AI जैसी टेक्नोलॉजी इसमें मुख्य भूमिका निभाएंगी। Flipkart की डोमिसाइल शिफ्ट और लीडरशिप में बदलाव जैसे कदम इसे इस बढ़ते बाजार का फायदा उठाने के लिए तैयार कर रहे हैं। हालांकि, IPO की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनी कितनी प्रभावी ढंग से भविष्य में प्रॉफिटेबिलिटी और कुशल संचालन की कहानी निवेशकों के सामने पेश कर पाती है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.