Q3 के नतीजे: गिरावट और उछाल की कहानी
Firstsource Solutions ने Q3 FY2026 के नतीजे पेश किए, जहां रिपोर्टेड नेट प्रॉफिट में 25% की सालाना गिरावट दर्ज की गई और यह ₹1,203.29 मिलियन रहा (EPS: ₹1.71)। इस गिरावट का मुख्य कारण ₹913.53 मिलियन के नए लेबर कोड्स (Labour Codes) से जुड़े एकमुश्त खर्च और ₹87.92 मिलियन के इन्वेस्टमेंट इम्पेयरमेंट (investment impairment) जैसे बड़े 'एक्सेप्शनल आइटम्स' (exceptional items) थे।
हालांकि, कंपनी के रेवेन्यू (Revenue) ने दम दिखाया, जिसमें 17.2% की सालाना ग्रोथ के साथ ₹24,466.97 मिलियन का आंकड़ा छुआ। इन एकमुश्त खर्चों को हटा दें तो, कंपनी का परफॉरमेंस (performance) शानदार रहा। एडजस्टेड (Adjusted) EBIT मार्जिन (EBIT margin) 11.9% पर था, और EBIT में 24.9% की ग्रोथ के साथ यह ₹2,915 मिलियन पर पहुंचा। सबसे खास बात यह है कि एडजस्टेड नेट प्रॉफिट (Adjusted PAT) में 83% का जोरदार उछाल आया और यह ₹2,022 मिलियन दर्ज किया गया, जिसका मतलब है एडजस्टेड डाइल्यूटेड EPS ₹2.87 रहा। क्वार्टर के लिए फ्री कैश फ्लो (FCF) टू एडजस्टेड PAT 164% पर रहा।
इसी तरह, नौ महीनों (nine months) के नतीजे भी मजबूत रहे। 31 दिसंबर 2025 तक रेवेन्यू में 20.7% की सालाना बढ़ोतरी हुई और यह ₹70,030.76 मिलियन तक पहुंच गया। रिपोर्टेड PAT 8.2% बढ़कर ₹4,691.67 मिलियन (EPS: ₹6.65) हुआ, जबकि एडजस्टेड PAT ₹5,510 मिलियन (EPS: ₹7.81) दर्ज किया गया।
भविष्य की राह, डिविडेंड और अधिग्रहण
निवेशकों के लिए एक अच्छी खबर यह भी है कि कंपनी के बोर्ड ने ₹5.50 प्रति इक्विटी शेयर (equity share) के अंतरिम डिविडेंड (interim dividend) को मंजूरी दे दी है।
हाल ही में, कंपनी ने यूके (UK) की Pastdue Credit Solutions (PDC) को 22 मिलियन GBP में सफलतापूर्वक अधिग्रहित (acquire) किया है, जिसकी डील 11 दिसंबर 2025 को पूरी हो गई।
इन सबके बीच, कंपनी के मैनेजमेंट ने FY26 के लिए अपने आउटलुक (outlook) को और बेहतर किया है। अब 14.5% से 15.5% तक की कॉन्स्टेंट करेंसी रेवेन्यू ग्रोथ (constant currency revenue growth) का अनुमान है, जिसमें अधिग्रहण से 1.5% का योगदान शामिल होगा। FY26 के लिए अनुमानित EBIT मार्जिन को 11.5% से 12% के बीच रखा गया है। कंपनी ने इस तिमाही में पांच बड़ी डील्स पर हस्ताक्षर किए और नौ नए 'लोगो' (logos) जोड़े।
आगे चलकर, निवेशकों को PDC के सफल एकीकरण (integration) पर नजर रखनी होगी। साथ ही, लेबर कोड्स के चलते बढ़ते कर्मचारियों के खर्च (employee costs) और बताए गए मार्जिन बैंड (margin band) के भीतर परफॉरमेंस (performance) जैसे कारकों पर भी ध्यान देना अहम होगा।