BlackRock CEO Larry Fink: AI 'ज़रूरी', Bubble नहीं; बाज़ार में आएगी बड़ी उथल-पुथल

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Author Mehul Desai | Published at:
BlackRock CEO Larry Fink: AI 'ज़रूरी', Bubble नहीं; बाज़ार में आएगी बड़ी उथल-पुथल
Overview

BlackRock के CEO लैरी फिंक (Larry Fink) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में हो रहे भारी निवेश पर एक बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि यह कोई 'स्पेक्युलेटिव बबल' नहीं, बल्कि एक 'भू-राजनीतिक ज़रूरत' है। फिंक मानते हैं कि इस दौड़ में कई कंपनियाँ फेल होंगी, लेकिन भारत AI क्रांति का लाभ उठाने के लिए एक मज़बूत स्थिति में है।

AI: ज़रूरत या बबल?

लैरी फिंक, जिनके नेतृत्व में BlackRock दुनिया की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनियों में से एक है, का मानना है कि AI में हो रहा निवेश एक वैश्विक दौड़ का हिस्सा है, न कि कोई अंदाज़ों पर आधारित फंतासी। वे इस तकनीक को राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के लिए महत्वपूर्ण बताते हैं, खासकर अमेरिका और चीन जैसी महाशक्तियों के बीच। फिंक के अनुसार, AI में निवेश न करने का जोखिम, ज़रूरत से ज़्यादा खर्च करने के जोखिम से कहीं ज़्यादा है, भले ही कैपिटल के गतिशील स्वभाव के कारण कुछ कंपनियाँ सफल होंगी और कुछ को असफलता का सामना करना पड़ेगा।

बाज़ार में उथल-पुथल और AI का दबदबा

BlackRock, जिसके पास दिसंबर 2025 तक लगभग $14 ट्रिलियन की संपत्ति प्रबंधन (AUM) के तहत है, AI को विकास के इंजन के तौर पर अपना रहा है। कंपनी का अपना स्टॉक भी प्रीमियम वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहा है, जिसका ट्रेलिंग ट्वेल्व-मंथ पी/ई रेश्यो (P/E ratio) जनवरी 2026 तक करीब 31.3x है। यह उसके प्रतिस्पर्धियों जैसे T. Rowe Price (11.4x) या Invesco (18.6x) से काफी ज़्यादा है। यह निवेशकों के BlackRock के भविष्य के विकास में विश्वास को दर्शाता है, जो AI को उसकी सिस्टमैटिक एक्टिव इक्विटी (Systematic Active Equity) स्ट्रेटेजी में एकीकृत करने और Amazon AWS के साथ उसके अलारडीन (Aladdin) प्लेटफॉर्म पर साझेदारी से जुड़ा हो सकता है।

इस बीच, व्यापक बाज़ार में AI को लेकर अभूतपूर्व कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) देखा जा रहा है। Microsoft, Amazon, और Alphabet जैसी टेक दिग्गज कंपनियाँ AI इंफ्रास्ट्रक्चर में अरबों डॉलर लगा रही हैं। अनुमान है कि 2026 में यह कैपिटल एक्सपेंडिचर और 30% बढ़कर लगभग $562 बिलियन तक पहुँच सकता है। यह भारी निवेश इस धारणा को बल देता है कि AI भले ही एक मूलभूत तकनीकी बदलाव हो, लेकिन इस क्षेत्र में कई विशिष्ट निवेश किसी सट्टा 'बबल' का हिस्सा हो सकते हैं।

इतिहास का सबक: जब टेक्नोलॉजी ने पैदा किए बबल

इतिहास गवाह है कि जब भी कोई नई और क्रांतिकारी टेक्नोलॉजी आती है, तो उसके साथ बड़ी मात्रा में पूंजी का प्रवाह होता है और अक्सर एक वित्तीय 'बबल' बनता है। 1990 के दशक के अंत का डॉट-कॉम बबल (Dot-com bubble) इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। इंटरनेट जैसी नई टेक्नोलॉजी के व्यापक उपयोग के कारण Nasdaq Composite में 600% की ज़बरदस्त तेज़ी आई, लेकिन उसके बाद दो साल के भीतर ही यह 78% तक गिर गया। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि ऐसी क्रांतिकारी टेक्नोलॉजीज़ हमेशा सट्टा 'बबल' को जन्म देती हैं, जहाँ दावों और वैल्यूएशन्स में वास्तविकता से कहीं ज़्यादा वृद्धि हो जाती है। ये बबल, जो अक्सर छह साल तक विकसित होते हैं, जितनी तेज़ी से बढ़ते हैं, उससे कहीं तेज़ी से फट भी सकते हैं, जिससे शुरुआती निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है, भले ही अंतर्निहित टेक्नोलॉजी मज़बूत साबित हो। विश्लेषकों का कहना है कि वर्तमान AI बाज़ार में ऐसे 'बबल' के क्लासिक संकेत दिख रहे हैं, जहाँ परफॉरमेंस में बड़ा अंतर दिख रहा है और निवेशक इस प्रचार के बीच स्पष्ट लॉन्ग-टर्म विजेता की पहचान करने में संघर्ष कर रहे हैं।

भारत: AI के अवसरों का केंद्र

फिंक ने विशेष रूप से भारत को AI क्रांति से लाभ उठाने के लिए एक अनूठी स्थिति वाला देश बताया है। भारत की युवा आबादी, तेज़ डिजिटल अपनाना (जैसे डिजिटल पेमेंट सिस्टम) और नई टेक्नोलॉजी के प्रति रुझान इसे AI इनोवेशन और टैलेंट के लिए एक आकर्षक केंद्र बनाते हैं। भारत में डेटा सेंटर कैपेसिटी (Data Center Capacity) 2030 तक तीन गुना से ज़्यादा बढ़कर 4.5 गीगावाट तक पहुँचने का अनुमान है, जिसमें ग्लोबल और डोमेस्टिक फर्मों का भारी निवेश शामिल है। भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र में जेनरेटिव AI (Generative AI) अपनाने की दर में सबसे आगे है, जहाँ बड़ी संख्या में वर्कर और छात्र सक्रिय रूप से इस तकनीक का उपयोग कर रहे हैं।

हालांकि, इरादे मज़बूत होने के बावजूद, AI को बड़े पैमाने पर लागू करना एक चुनौती बनी हुई है। अभी भी अधिकांश भारतीय संगठन एक्सप्लोरेशन (Exploration) या पायलट स्टेज (Pilot Stage) में हैं, और एंटरप्राइज़-वाइड डिप्लॉयमेंट (enterprise-wide deployment) हासिल करने वाली कंपनियों की संख्या 10% से भी कम है। गवर्नेंस (Governance), एनालिटिक्स मैच्योरिटी (Analytics Maturity) और बिज़नेस अलाइनमेंट (Business Alignment) में कमियाँ लगातार बड़े पैमाने पर लागू होने में बाधा डाल रही हैं, और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर की जटिलता तथा सुरक्षा चिंताएँ बढ़ते दबाव का कारण बन रही हैं।

इंटेलिजेंस क्रांति को समझना

वर्तमान AI बूम केवल एक क्षणिक ट्रेंड नहीं है; यह एक 'इंटेलिजेंस रेवोल्यूशन' (Intelligence Revolution) है जो अर्थव्यवस्थाओं और उद्योगों को बदलने के लिए तैयार है। एसेट मैनेजर्स AI को अपनी प्रक्रियाओं में सक्रिय रूप से एकीकृत कर रहे हैं; 91% ग्लोबल मैनेजर्स निवेश स्ट्रेटेजी और रिसर्च के लिए AI का उपयोग कर रहे हैं या करने की योजना बना रहे हैं, इसे प्रतिस्पर्धात्मक लाभ का एक प्रमुख चालक मानते हुए। मशीन लर्निंग (Machine Learning) और नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (Natural Language Processing) जैसी AI तकनीकें डेटा एनालिसिस को बेहतर बना रही हैं, रिस्क एस्टिमेट्स (Risk Estimates) में सुधार कर रही हैं, और नई निवेश स्ट्रेटेजीज़ को सक्षम कर रही हैं।

हालांकि, आगे का रास्ता जटिल है। AI उत्पादकता बढ़ाने और वृद्ध होती आबादी वाले देशों में जीडीपी विकास का समर्थन करने का वादा करता है, लेकिन यह नौकरी के विस्थापन और लाभों के समान वितरण के बारे में भी चिंताएँ पैदा करता है। वित्तीय निहितार्थ बहुत गहरे हैं: निवेशकों को वास्तविक दीर्घकालिक तकनीकी प्रगति और ऐसे परिवर्तनकारी अवधियों के साथ अक्सर आने वाले सट्टा 'फ्रॉथ' (froth) के बीच अंतर करना होगा। ऐतिहासिक विश्लेषण बताता है कि स्थायी पूंजी की तैनाती के लिए यह अंतर महत्वपूर्ण है।

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