Eternal, जो Zomato और Blinkit की पेरेंट कंपनी है, इसके शेयरों में 3 फरवरी को जबरदस्त उछाल आया। शेयर 10% के ऊपरी सर्किट तक पहुंच गया। इसका मुख्य कारण ब्रोकरेज फर्म जेफरीज (Jefferies) का इसे अपने इंडिया मॉडल पोर्टफोलियो में शामिल करना था। जेफरीज का मानना है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता विदेशी निवेशकों की चिंताओं को दूर कर सकता है और भारतीय बाजारों से हो रहे लगातार आउटफ्लो को रोक सकता है। इस कदम के तहत, Eternal ने Godrej Consumer Products को पोर्टफोलियो में रिप्लेस किया, जो क्विक कॉमर्स और फूड डिलीवरी में Eternal की मजबूत ग्रोथ और मार्जिन सुधार की क्षमता को दर्शाता है। दिन के अंत में, शेयर 2% से ज्यादा बढ़कर ₹278.50 पर बंद हुआ।
विश्लेषकों की रेटिंग में सुधार के साथ ही, कंपनी में नेतृत्व परिवर्तन भी हुआ है। 1 फरवरी से Albinder Singh Dhindsa ग्रुप CEO बन गए हैं, जिन्होंने फाउंडर Deepinder Goyal की जगह ली है। Deepinder Goyal अब वाइस चेयरमैन की भूमिका संभालेंगे। Blinkit से Dhindsa का अनुभव क्विक कॉमर्स सेगमेंट पर कंपनी के रणनीतिक फोकस को दर्शाता है, जिसे Eternal के लिए सबसे बड़ा ग्रोथ अवसर माना जा रहा है। हालांकि, इस उम्मीद के बावजूद, कंपनी की वैल्यूएशन (Valuation) काफी ऊंची है। फरवरी 2026 तक Eternal का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो 1,139.03 के आसमान छूते स्तर पर है। यह सेक्टर के औसत से कहीं ज्यादा है, और दर्शाता है कि बाजार पहले से ही भारी भविष्य की ग्रोथ को कीमत में शामिल कर चुका है, जिससे कंपनी पर विस्तार और लाभप्रदता के लक्ष्य हासिल करने का जबरदस्त दबाव है।
क्विक कॉमर्स (Quick Commerce) और फूड डिलीवरी (Food Delivery) सेक्टर में ज़बरदस्त कॉम्पिटिशन है। Eternal के क्विक कॉमर्स आर्म, Blinkit ने Q3 FY26 में अपने नेट ऑर्डर वैल्यू (NOV) में 121% की जोरदार ग्रोथ दर्ज की, जो कंपनी के कुल रेवेन्यू में अहम योगदान दे रहा है। Blinkit का रेवेन्यू Q1FY26 में 155% बढ़कर ₹2,400 करोड़ हो गया। वहीं, Eternal के फूड डिलीवरी सेगमेंट का रेवेन्यू FY25 में 21% बढ़ा है। Q3 FY26 में कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 73% बढ़कर ₹102 करोड़ रहा। लेकिन, लगातार मुनाफा और सस्टेनेबल मार्जिन ग्रोथ इस कैपिटल-इंटेंसिव बिजनेस के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
मैक्रो इकोनॉमिक मोर्चे पर, भारत-अमेरिका व्यापार समझौता भारतीय इक्विटी के लिए एक पॉजिटिव संकेत है और FPI आउटफ्लो को रिवर्स कर सकता है। भारतीय ई-कॉमर्स सेक्टर 2030 तक $345 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, जो इस सेक्टर की विशाल क्षमता को दर्शाता है। विश्लेषकों का झुकाव अभी भी ज्यादातर पॉजिटिव है, कई 'Buy' रेटिंग और मौजूदा स्तरों से काफी ऊपर टारगेट प्राइस दे रहे हैं। उदाहरण के लिए, गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) ने 'Buy' रेटिंग और ₹375 का टारगेट दिया है। हालांकि, मैक्वेरी (Macquarie) जैसी कुछ फर्मों ने वैल्यूएशन और सेक्टर कॉम्पिटिशन को देखते हुए 'Underperform' रेटिंग बरकरार रखी है। Eternal द्वारा 25% फॉरेन ओनरशिप थ्रेशोल्ड पार करने से MSCI जैसे ग्लोबल इंडेक्स में शामिल होने की संभावना बढ़ जाती है, जिससे पैसिव फंड फ्लो आकर्षित हो सकता है।