US Inflation: एनर्जी की बढ़ी कीमतें, पर कोर इन्फ्लेशन में नरमी! फेडरल रिजर्व के लिए नई पहेली

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
US Inflation: एनर्जी की बढ़ी कीमतें, पर कोर इन्फ्लेशन में नरमी! फेडरल रिजर्व के लिए नई पहेली
Overview

अमेरिका में मार्च महीने में इन्फ्लेशन (Inflation) के आंकड़े मिले-जुले रहे हैं। जहां एक तरफ एनर्जी की कीमतों में भारी उछाल के चलते कुल महंगाई बढ़ी, वहीं खाने-पीने और एनर्जी को छोड़कर यानी कोर इन्फ्लेशन (Core Inflation) में उम्मीद से कम बढ़ोतरी देखी गई। मार्च में कुल महंगाई दर **0.9%** बढ़ी, जबकि कोर महंगाई **0.2%** रही।

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मार्च में अमेरिकी महंगाई का हाल

अमेरिका का कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) डेटा बताता है कि मार्च महीने में हेडलाइन इन्फ्लेशन (Headline Inflation) में 0.9% की बढ़ोतरी हुई, जो पिछले साल के मुकाबले 3.3% ज्यादा है। इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते एनर्जी यानी ऊर्जा की कीमतों में आई तेजी है।

हालांकि, इस रिपोर्ट का एक अहम पहलू कोर CPI का आंकड़ा है, जिसमें फूड (Food) और एनर्जी (Energy) जैसी अस्थिर वस्तुओं को शामिल नहीं किया जाता। मार्च में कोर CPI में सिर्फ 0.2% की बढ़ोतरी हुई, जबकि सालाना आधार पर यह 2.6% रहा। यह आंकड़ा विश्लेषकों की उम्मीदों से कम है, जो बताता है कि अर्थव्यवस्था में मूल महंगाई दबाव शायद कम हो रहा है।

बाजारों पर असर

इन आंकड़ों के जारी होने के बाद, Bitcoin की कीमत मामूली बढ़कर करीब $72,400 तक पहुंच गई, जबकि Nasdaq 100 जैसे स्टॉक इंडेक्स फ्यूचर्स में भी करीब 0.3% की बढ़त देखी गई। 10-year U.S. Treasury Yield अपने स्तर 4.29% के आसपास स्थिर बना रहा। यह बाजार की प्रतिक्रिया बताती है कि निवेशक एनर्जी की वजह से बढ़ी कुल महंगाई और अंतर्निहित महंगाई के नरम पड़ने के संकेतों के बीच संतुलन बना रहे हैं।

वैश्विक महंगाई और एनर्जी का सीधा कनेक्शन

अमेरिका की यह तस्वीर दुनिया के दूसरे बड़े इकोनॉमी से भी मेल खाती है। यूरोजोन (Eurozone) में मार्च में सालाना इन्फ्लेशन बढ़कर 2.5% हो गया, जो फरवरी में 1.9% था। इसमें भी एनर्जी की कीमतों में 4.9% की बढ़ोतरी जिम्मेदार रही, जो करीब एक साल में पहली बार इतनी बढ़ी है। यह सीधा असर मध्य पूर्व के संघर्ष का है।

फेडरल रिजर्व की दुविधा

यह डेटा फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करता है। एक तरफ एनर्जी की कीमतों में उछाल महंगाई को काबू में लाने के लिए और सख्त नीतियों की ओर इशारा कर रहा है। दूसरी तरफ, कोर इन्फ्लेशन के नरम पड़ने के संकेत बताते हैं कि अंदरूनी महंगाई शायद कंट्रोल में आ रही है।

हाल ही में फेडरल रिजर्व की मीटिंग के मिनट्स (Minutes) से पता चला है कि कई पॉलिसीमेकर्स इंटरेस्ट रेट (Interest Rate) में बढ़ोतरी पर विचार करने के लिए तैयार हैं, जो पहले रेट कट्स (Rate Cuts) की उम्मीदों के विपरीत है। बाजार अब 2026 तक रेट कट्स की उम्मीद कम कर रहा है और कुछ हद तक रेट हाइक्स (Rate Hikes) की संभावना देख रहा है। Treasury market में भी यही संकेत मिल रहा है, जहां 10-year Yield मार्च के अंत में 4.32% के करीब था।

आगे का रास्ता: stagflation का खतरा?

भले ही कोर इन्फ्लेशन के आंकड़ों ने कुछ राहत दी हो, लेकिन कुल महंगाई में एनर्जी की कीमतों का बढ़ता दखल एक अस्थिर माहौल बना रहा है। अगर मध्य पूर्व का संघर्ष लंबा खिंचता है, तो एनर्जी की कीमतें लगातार ऊंची बनी रह सकती हैं। ऐसे में फेडरल रिजर्व को सख्त कदम उठाने पड़ सकते हैं, जिससे 'stagflation' यानी मंदी के साथ-साथ ऊंची महंगाई का खतरा बढ़ सकता है।

फेडरल रिजर्व के लिए नीतिगत फैसले लेना आसान नहीं होगा। उन्हें महंगाई कम करने और बेरोजगारी बढ़ने से रोकने के बीच संतुलन बनाना होगा। बाजार की उम्मीदें, जो अब कम रेट कट्स या संभावित रेट हाइक्स की ओर इशारा कर रही हैं, इस अनिश्चितता को दर्शाती हैं।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.