Deutsche Bank India: AI हब में Startup का जलवा! 100 दिन में आए **100+** नए आइडिया!

TECH
Whalesbook Logo
AuthorAditi Chauhan|Published at:
Deutsche Bank India: AI हब में Startup का जलवा! 100 दिन में आए **100+** नए आइडिया!
Overview

Deutsche Bank India अपने AI इनोवेशन सेंटर, 'AI Forward' के लिए एक स्टार्टअप जैसा मॉडल अपना रहा है। लॉन्च के पहले **100** दिनों में ही, कर्मचारियों ने **100** से ज़्यादा नए आइडियाज़ पेश किए हैं। यह बैंक की टेक्नोलॉजी ऑपरेशंस में अंदरूनी टैलेंट और एंड-टू-एंड ओनरशिप को तेज़ी से अपनाने का संकेत देता है।

सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से ओनरशिप तक: Deutsche Bank India का टेक्नोलॉजी में बड़ा बदलाव

Deutsche Bank के ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) इंडिया अब सिर्फ 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' (Center of Excellence) बनकर नहीं रह गया है, बल्कि महत्वपूर्ण फैसले लेने और डीप ओनरशिप (Deep Ownership) को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा रहा है। यह बदलाव वर्कफोर्स में भी दिख रहा है, जहाँ अब 70% स्टाफ इंटरनल है, जो पहले सिर्फ 30% था। टेक्नोलॉजी टैलेंट में 70% इंजीनियर्स हैं। एक नई चार-साल की स्ट्रैटेजी के तहत, इंडिया के बड़े टेक्नोलॉजी हब्स में 50% पोर्टफोलियो ओनर्स (Portfolio Owners) और 30% सीनियर लीडरशिप को इंटीग्रेट करने का लक्ष्य है।

AI Forward: स्टार्टअप स्टाइल की इनोवेशन को बढ़ावा

बैंक का AI को आगे बढ़ाने का पुश 'AI Forward' प्रोग्राम के ज़रिए हो रहा है, जिसे पूरे संगठन में AI को इंटीग्रेट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। अब तक 20,000 से ज़्यादा कर्मचारियों को लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (Large Language Models) और उनके सुरक्षित इस्तेमाल पर ट्रेनिंग दी जा चुकी है। 'कैटेलिस्ट' (Catalyst) के ज़रिए AI एक्सपर्ट्स को मौजूदा टीमों में शामिल किया जा रहा है ताकि वे प्रोटोटाइप (Prototypes) बना सकें। सबसे खास बात यह है कि यह इनक्यूबेटर किसी भी कर्मचारी को AI आइडियाज़ प्रपोज़ करने की सुविधा देता है, जिससे बॉटम-अप इनोवेशन (Bottom-up Innovation) को बढ़ावा मिल रहा है। लॉन्च के पहले 100 दिनों में ही इस प्रोग्राम को 100 से ज़्यादा कर्मचारी आइडियाज़ मिले हैं, जो इतने बड़े और स्थापित संस्थान के लिए एक तेज़ प्रतिक्रिया है।

AI सफलता के लिए टूल्स और टीम वर्क

Deutsche Bank AI डेवलपमेंट के लिए खास 'सैंडबॉक्स एनवायरनमेंट' (Sandbox Environments) प्रदान करता है। कर्मचारी 'DB Lumina' जैसे टूल्स का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो Google Gemini का इंटरनल वर्शन है। इसका उपयोग डॉक्यूमेंट क्रिएशन (Document Creation) को ऑटोमेट करने जैसे कामों के लिए किया जा सकता है। एंटरप्राइज AI प्रोजेक्ट्स को ग्लोबल वर्कफ़्लोज़ (Global Workflows) में इंटीग्रेट किया जाता है, जिसमें अक्सर कई इंटरनेशनल लोकेशंस शामिल होती हैं। यह तरीका ग्लोबल हब्स के बीच कॉम्पिटिशन को रोकता है। इंडिया से हुई कुछ खास इनोवेशंस में AI-ड्रिवन कस्टमर रिलेशनशिप मैनेजमेंट (CRM) टूल शामिल है, जो प्रोएक्टिव सेल्स के लिए है, और 'DBTextract' टूल, जो इनवॉइस (Invoices) और कॉन्ट्रैक्ट्स (Contracts) जैसे डॉक्यूमेंट्स से डेटा को एफिशिएंटली एक्सट्रेक्ट (Extract) करता है।

बैंकिंग में AI की बढ़ती भूमिका: आगे क्या?

Deutsche Bank India के MD & CEO Stefan Schaffer बताते हैं कि एंटरप्राइज डेटा को मैनेज करने के लिए कोर प्लेटफॉर्म्स की ज़रूरत लगातार बनी रहेगी, जो रेगुलेटरी कंप्लायंस (Regulatory Compliance) के लिए ज़रूरी है। उनका मानना है कि AI टूल्स कॉन्फ़िगरेशन (Configuration) के फाइनल स्टेप्स को ज़्यादा से ज़्यादा हैंडल करेंगे, जिससे ज़्यादा फ्लेक्सिबिलिटी मिलेगी। भले ही मौजूदा रेगुलेशन में 'ह्यूमन इन द लूप' (Human in the loop) की ज़रूरत होती है, Schaffer को उम्मीद है कि भविष्य में ऑटोनोमस AI सिस्टम्स (Autonomous AI Systems) को भी स्वीकार किया जाएगा, क्योंकि वे ज़्यादा सुरक्षित और विश्वसनीय साबित होंगे। बैंक की लॉन्ग-टर्म स्ट्रैटेजी लगातार इन्वेस्टमेंट साइकल्स (Investment Cycles) पर केंद्रित है, जो जियोपॉलिटिकल इवेंट्स (Geopolitical Events) या रुपए के कमजोर होने जैसी करेंसी शिफ्ट्स से अप्रभावित रहेगी।

Disclaimer:This content is for informational purposes only and does not constitute financial or investment advice. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making decisions. Investments are subject to market risks, and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors are not liable for any losses. Accuracy and completeness are not guaranteed, and views expressed may not reflect the publication’s editorial stance.