OpenAI Defence Deal: अमेरिकी रक्षा विभाग से OpenAI के AI कॉन्ट्रैक्ट में बड़ा बदलाव!

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
OpenAI Defence Deal: अमेरिकी रक्षा विभाग से OpenAI के AI कॉन्ट्रैक्ट में बड़ा बदलाव!
Overview

OpenAI ने अमेरिकी रक्षा विभाग (Department of War) के साथ अपने AI डिप्लॉयमेंट (deployment) कॉन्ट्रैक्ट में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। कंपनी ने माना है कि शुरुआती डील जल्दबाजी में हुई थी और अब डोमेस्टिक सर्विलांस (domestic surveillance) व ऑटोनोमस वेपन्स (autonomous weapons) के खिलाफ स्पष्ट सेफगार्ड्स (safeguards) जोड़े गए हैं।

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डील में बड़ा बदलाव क्यों?

OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन (Sam Altman) ने खुद माना है कि अमेरिकी रक्षा विभाग के साथ सीक्रेट नेटवर्क पर AI तैनात करने का शुरुआती कॉन्ट्रैक्ट जल्दबाजी और लापरवाही से हुआ था। इसके बाद कंपनियों और विशेषज्ञों के तीखे विरोध के चलते OpenAI को अपने नियमों में बड़ा बदलाव करना पड़ा है। मुख्य चिंता यह थी कि इस AI का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर डोमेस्टिक सर्विलांस (domestic surveillance) या ऑटोनोमस वेपन्स (autonomous weapons) बनाने में हो सकता है।

नई शर्तें और एथिकल दीवारें

नए संशोधनों के तहत, OpenAI ने साफ तौर पर कहा है कि उसकी AI सेवाओं का जानबूझकर अमेरिकी नागरिकों की डोमेस्टिक सर्विलांस (domestic surveillance) के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। साथ ही, NSA जैसी इंटेलिजेंस एजेंसियों को सेवाएं देने के लिए अलग से शर्तों को मंजूरी लेनी होगी। यह कदम काफी अहम है, खासकर तब जब OpenAI ने हाल ही में $110 बिलियन का एक बड़ा फंडिंग राउंड पूरा किया है, जिससे कंपनी का वैल्यूएशन (valuation) $840 बिलियन तक पहुँच गया है।

प्रतिद्वंदी और सरकारी निवेश

दूसरी ओर, OpenAI के प्रतिद्वंदी Anthropic ने शुरुआत से ही एथिकल सेफगार्ड्स पर जोर दिया था। इसके बावजूद, पेंटागन (Pentagon) ने Anthropic को 'सप्लाई चेन रिस्क' (supply chain risk) करार दिया, जिससे उन्हें सरकारी कॉन्ट्रैक्ट मिलने में दिक्कत आ रही है। पेंटागन का यह फैसला डिफेंस AI सेक्टर में बढ़ती जांच और रेगुलेटरी दबाव को दर्शाता है। बता दें कि अमेरिकी रक्षा विभाग (DoD) ने फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए AI और ऑटोनोमी (autonomy) पर रिकॉर्ड $13.4 बिलियन का बजट मांगा है, जो इस सेक्टर में सरकारी निवेश की रफ्तार दिखाता है।

डिफेंस AI सेक्टर का बढ़ता बाज़ार

जियोपॉलिटिकल टेंशन (geopolitical tensions) और टेक्नोलॉजिकल एडवांसेज (technological advancements) के चलते डिफेंस AI सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है। दुनिया भर में मिलिट्री स्पेंडिंग (military spending) बढ़ रही है और AI को फ्यूचर रेडीनेस (future readiness) का अहम हिस्सा माना जा रहा है। Palantir जैसी कंपनियां, जिनके DoD के साथ बड़े कॉन्ट्रैक्ट हैं, भारी मांग देख रही हैं और एनालिस्ट (analyst) उन्हें मजबूत ग्रोथ पोटेंशियल (growth potential) दे रहे हैं। C3.ai ने भी अपने टोटल बिज़नेस (total business) का आधे से ज़्यादा हिस्सा फेडरल, डिफेंस और एयरोस्पेस बुकिंग्स (bookings) से जोड़ लिया है। ऐतिहासिक रूप से, डिफेंस सेक्टर के शेयर जियोपॉलिटिकल इवेंट्स (geopolitical events) के दौरान अच्छा प्रदर्शन करते आए हैं।

रिस्क और सवाल?

हालांकि OpenAI ने सेफगार्ड्स बढ़ा दिए हैं, लेकिन कुछ लीगल एक्सपर्ट्स (legal experts) इन सुरक्षा उपायों की एनफोर्सबिलिटी (enforceability) पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि 'ऑल लॉफुल पर्पज' (all lawful purposes) क्लॉज (clause) अब भी व्यापक इस्तेमाल की इजाजत दे सकता है। कंपनी के पास अभी भी काफी डिस्क्रिशन (discretion) है, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या नेशनल सिक्योरिटी (national security) के नाम पर सरकार इन कंट्रोल्स को ओवरराइड (override) कर सकती है। Anthropic के मामले से यह भी साफ है कि पेंटागन के साथ किसी भी तरह का टकराव कंपनी के लिए बड़ा कमर्शियल रिस्क (commercial risk) बन सकता है। वहीं, OpenAI को अपनी नई AI इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए $600 बिलियन जैसी भारी-भरकम लागत लगानी है, जिससे उन पर जल्दी रेवेन्यू (revenue) बढ़ाने का दबाव है, जो शायद उन्हें एथिकल समझौता करने पर मजबूर करे।

आगे क्या?

डिफेंस AI का भविष्य एथिकल विचारों और सख्त रेगुलेटरी (regulatory) माहौल से तय होगा। जैसे-जैसे DoD AI में अपना निवेश बढ़ा रहा है, AI डेवलपर्स (developers) को एक जटिल माहौल से गुजरना होगा जहां कॉन्ट्रैक्ट, एथिकल स्टैंड्स (ethical stances) और जियोपॉलिटिकल रियलिटी (geopolitical reality) आपस में जुड़े हुए हैं। OpenAI और Anthropic जैसी कंपनियां इस मुश्किल रास्ते पर चल रही हैं, और उनके नतीजे भविष्य के लिए मिसालें कायम कर सकते हैं।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.