कंपनी ने SPVO Two Point O Ventures Tech Private Limited में 100% हिस्सेदारी ₹1 लाख में खरीदने को मंजूरी दे दी है। इसका मुख्य उद्देश्य इसे अपनी पूरी तरह से अपनी सब्सिडियरी (wholly-owned subsidiary) बनाना है, जो भविष्य में कंपनी के कामकाज के लिए एक नया और साफ-सुथरा प्लेटफॉर्म (new base for operations) साबित हो सकती है।
यह रणनीतिक कदम ऐसे वक्त उठाया गया है जब कंपनी अपने परिचालन (operations) से जुड़ी कई बड़ी चुनौतियों से जूझ रही है। इनमें GST और बैंक खातों का निष्क्रिय (inactive) होना, मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स (MCA) और इनकम टैक्स विभाग के साथ दिक्कतें, और एक विस्तृत फॉरेंसिक ऑडिट (forensic audit) की जरूरत शामिल है। इसके अलावा, कंपनी पूर्व निदेशकों (former directors) से जरूरी जानकारी और संपत्ति वापस पाने में भी परेशानियों का सामना कर रही है।
इन गंभीर वित्तीय और परिचालन जरूरतों को पूरा करने और संभावित रूप से कामकाज को फिर से पटरी पर लाने के प्रयासों का समर्थन करने के लिए, शेयरधारकों से पोस्टल बैलेट (postal ballot) के जरिए वोटिंग कराई जाएगी। शेयरधारकों से कंपनी की उधार लेने की क्षमता (borrowing powers) और संपत्ति बेचने के अधिकार (asset disposal powers) को ₹23.97 करोड़ तक बढ़ाने के प्रस्तावों पर विचार करने का अनुरोध किया जाएगा। ये वित्तीय अधिकार कंपनी को आवश्यक फंड जुटाने या पर्याप्त नकदी (liquid assets) हासिल करने में मदद करेंगे।
SPVO Two Point O Ventures Tech Private Limited का यह अधिग्रहण कंपनी की ओर से पुनर्गठन (restructuring) या टर्नअराउंड (turnaround) की गंभीर कोशिशों का संकेत देता है। एक नई सब्सिडियरी पिछली समस्याओं से मुक्त एक नई शुरुआत दे सकती है। साथ ही, बोर्ड ने शासन संबंधी चिंताओं (governance concerns) के चलते कुछ हितधारकों (stakeholders) के खिलाफ जांच (investigations) और शिकायतें (complaints) भी अधिकृत की हैं, ताकि चीजों को पारदर्शी बनाया जा सके।
इस पूरी कवायद के तहत, कंपनी सब्सिडियरी में ₹3.97 करोड़ का अतिरिक्त निवेश करने की योजना बना रही है, जबकि शुरुआती अधिग्रहण की लागत मात्र ₹1 लाख है। उधार लेने और संपत्ति बेचने की कुल सीमा ₹23.97 करोड़ तय की गई है।
अब सभी की निगाहें पोस्टल बैलेट के नतीजों पर होंगी, खासकर शेयरधारकों द्वारा वित्तीय शक्तियों के लिए दी जाने वाली मंजूरी पर। इसके अलावा, 2024-25 के फाइनेंशियल ईयर के वित्तीय परिणामों (financial results) और ऑपरेशनल तथा अनुपालन संबंधी मुद्दों को हल करने में कंपनी की प्रगति पर भी नजर रखी जाएगी।