लीडर्स की सोच और ग्राहकों का अनुभव: बड़ा अंतर
रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है कि कंपनियां अपने कस्टमर एक्सपीरियंस को लेकर जो सोच रखती हैं, वह ग्राहकों के असली अनुभव से कोसों दूर है। जहां 84% कंपनी लीडर्स का मानना है कि ग्राहक उनके प्रोडक्ट्स की सिफारिश करेंगे, वहीं सिर्फ 45% ग्राहक ही ऐसा महसूस करते हैं। इसी तरह, 77% लीडर्स को लगता है कि ग्राहक प्रोडक्ट की क्वालिटी को लेकर कॉन्फिडेंट हैं, जबकि हकीकत में सिर्फ 14% ग्राहक ही इससे सहमत हैं।
खराब CX का सीधा असर: ग्राहक छोड़ रहे साथ
ये गलतफहमी सीधे बिजनेस के नतीजों पर असर डालती है। खराब कस्टमर एक्सपीरियंस की वजह से 63% ग्राहक प्रतिस्पर्धियों के पास चले जाते हैं और 61% अपनी खर्च की रकम कम कर देते हैं। इसके उलट, अगर ग्राहक का अनुभव अच्छा रहता है, तो 70% लोग बार-बार खरीदारी करते हैं और 65% खुद को वैल्यूड महसूस करते हैं।
CX ट्रांसफॉर्मेशन में बड़ी रुकावटें
प्रगति में सबसे बड़ी रुकावटें सिस्टमैटिक समस्याएं हैं, जिनमें 40% कंपनियों में परफॉरमेंस मापने के लिए स्पष्ट KPIs (Key Performance Indicators) का न होना और सिर्फ 23% कंपनियों में एक एकीकृत कस्टमर एक्सपीरियंस स्ट्रेटेजी का अभाव शामिल है। इसके अलावा, 60% फर्में मानती हैं कि कस्टमर चैनल का फ्रेगमेंटेशन (विखंडन) और बढ़ेगा।
AI और भरोसे का बढ़ता फासला
जैसे-जैसे कंपनियां AI का इस्तेमाल बढ़ा रही हैं, भरोसे को लेकर एक बड़ी खाई पैदा हो गई है। 83% ग्राहक अपनी डेटा रिकॉर्डिंग को लेकर असहज हैं, जबकि यह चिंता सिर्फ 38% एग्जीक्यूटिव्स को है। 81% ग्राहकों के लिए डेटा सिक्योरिटी अहम है, लेकिन सिर्फ 8% लीडर्स इसे एक मुख्य रिस्क के तौर पर देखते हैं।
आगे का रास्ता: 'ह्यूमन-लेड, AI-पावर्ड' मॉडल
रिपोर्ट 'ह्यूमन-लेड, AI-पावर्ड' कस्टमर एक्सपीरियंस मॉडल अपनाने की सलाह देती है। इस अप्रोच में एकीकृत स्ट्रेटेजी, ऑटोमेटेड सर्विस को ह्यूमन इंटरैक्शन के साथ संतुलित करना और लगातार सुधार के लिए AI फीडबैक का उपयोग करना शामिल है। जो कंपनियां इन भरोसे और एग्जीक्यूशन गैप को भरने में नाकाम रहेंगी, वे ग्राहक निष्ठा (loyalty) खोने का जोखिम उठाएंगी।