अधिग्रहण से क्या बदलेगा?
CMS Info Systems ने Financial Software and Systems (FSS) के मैनेज्ड सर्विसेज डिवीजन को ₹115 करोड़ में अपने नाम कर लिया है। इस महत्वपूर्ण अधिग्रहण के बाद CMS के ATM नेटवर्क में 8,000 मशीनें बढ़ जाएंगी, जिससे कुल मशीनों की संख्या बढ़कर 39,000 हो जाएगी। कंपनी का लक्ष्य एंड-टू-एंड ATM मैनेजमेंट सेक्टर में अपनी धाक जमाना है, क्योंकि बैंक अब कम और बड़े सर्विस प्रोवाइडर्स के साथ काम करना पसंद कर रहे हैं। यह स्ट्रेटेजी CMS की पुरानी प्लानिंग का हिस्सा थी।
शेयर की गिरी चाल, एनालिस्टों में बंटवारा
लेकिन यह डील ऐसे समय में आई है जब CMS का शेयर अपने 52-हफ्ते के निचले स्तर के करीब पहुंच गया है। मार्च 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, शेयर पिछले एक साल में -11.74% का नेगेटिव रिटर्न दे चुका है। शेयर ने ₹267.6 का 52-हफ्ते का निचला स्तर छुआ है, जो इसके पीक से 50% से भी ज्यादा की गिरावट दर्शाता है।
भारतीय ATM मैनेज्ड सर्विसेज मार्केट में अच्छी ग्रोथ का अनुमान है। 2025 तक यह मार्केट करीब USD 1.94 बिलियन का हो सकता है और 2034 तक 5.56% से 6.53% की सालाना दर से बढ़ सकता है। इस सेक्टर में AGS Transact Technologies, Hitachi Payment Services और Radiant Cash Management Services जैसे बड़े खिलाड़ी मौजूद हैं।
CMS का P/E रेश्यो करीब 13.9x है, जो इंडस्ट्री एवरेज 17.3x और पीयर एवरेज 46.2x से काफी कम है। यह वैल्यूएशन बताता है कि निवेशकों का कंपनी पर भरोसा कम है। हालिया तिमाही (दिसंबर 2025 को समाप्त) में कंपनी के प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में 26.6% की गिरावट दर्ज की गई थी। इसके अलावा, हाल के छह महीनों में ROCE भी गिरकर 19.30% पर आ गया था।
निवेशकों की चिंता इस बात पर है कि क्या यह अधिग्रहण वाकई मुनाफा बढ़ा पाएगा और शेयरहोल्डर वैल्यू में इजाफा करेगा। खासकर तब जब मार्केट में कड़ी टक्कर है और इंटीग्रेशन की चुनौतियां भी हो सकती हैं।
पॉजिटिव आउटलुक भी मौजूद
हालांकि, कहानी का दूसरा पहलू भी है। चार एनालिस्टों ने CMS Info Systems को 'Strong Buy' रेटिंग दी है और उनका औसत 12 महीने का टारगेट प्राइस ₹389.00 है। यह दिखाता है कि कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि शेयर में काफी दम है और यह और ऊपर जा सकता है। अगर CMS इस FSS बिजनेस को सफलतापूर्वक इंटीग्रेट कर पाता है और ATM मैनेज्ड सर्विसेज मार्केट की ग्रोथ का फायदा उठा पाता है, तो यह टारगेट प्राइस हासिल हो सकता है। फिलहाल, कंपनी को अपनी परफॉरमेंस में सुधार दिखाकर मार्केट सेंटिमेंट को बदलना होगा।