आईटी सेक्टर के लिए बड़े राहत के संकेत
बजट 2026 के दौरान, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत के टेक्नोलॉजी सर्विसेज इंडस्ट्री को बड़ा सहारा देने के इरादे से ट्रांसफर-प्राइसिंग (Transfer Pricing) के सेफ हार्बर फ्रेमवर्क को मजबूत किया है।
पात्रता और मार्जिन में बड़ा इजाफा
सरकार ने सेफ हार्बर व्यवस्था के लिए पात्रता की सीमा को काफी बढ़ा दिया है। पहले जो सीमा ₹300 करोड़ थी, उसे अब बढ़ाकर ₹2,000 करोड़ कर दिया गया है। इसका मतलब है कि अब ज्यादा संख्या में मध्यम और बड़ी आईटी फर्में पहले से तय टैक्स मार्जिन का फायदा उठा सकेंगी।
इसके अलावा, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, आईटी-इनेबल्ड सर्विसेज और नॉलेज प्रोसेस आउटसोर्सिंग (Knowledge Process Outsourcing) जैसी सभी प्रकार की आईटी सर्विसेज के लिए अब एक ही सेफ हार्बर कैटेगरी लागू होगी। इस एकीकृत (unified) व्यवस्था में लगभग 15.5% का एकसमान मार्जिन रखा गया है, जो पहले की अलग-अलग दरों की जगह लेगा और टैक्स गणना को आसान बनाएगा।
व्यापार करने में आसानी और कम विवाद
उद्योग विशेषज्ञ इन नीतिगत बदलावों का स्वागत कर रहे हैं। उनका मानना है कि बढ़ाई गई पात्रता सीमा और सरल, एकीकृत मार्जिन स्ट्रक्चर व्यापार करने में आसानी (Ease of Doing Business) को काफी बेहतर बनाएगा। इससे आईटी एक्सपोर्टर्स के लिए ट्रांसफर प्राइसिंग से जुड़े विवादों (litigation) में कमी आने की उम्मीद है, और यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सर्विसेज डिलीवरी की हकीकत के साथ टैक्स अनुपालन को बेहतर ढंग से संरेखित करेगा।
स्वचालित अप्रूवल प्रक्रिया
दक्षता (efficiency) बढ़ाने के लिए, सेफ हार्बर अनुपालन के लिए अप्रूवल प्रक्रिया को भी स्वचालित (automated), नियम-आधारित सिस्टम में बदला जा रहा है। इस डिजिटल बदलाव का मकसद टैक्स अधिकारियों द्वारा सीधे जांच की आवश्यकता को खत्म करना है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में काम कर रही कंपनियों को ज्यादा निश्चितता और अनुमानितता (predictability) मिलेगी।