क्वांटम हमलों से बचाव का 'महंगा' तरीका
Quantum कंप्यूटर्स के आने वाले समय में Bitcoin की मौजूदा एन्क्रिप्शन को तोड़ने की आशंका है। इस खतरे से निपटने के लिए StarkWare के रिसर्चर Avihu Levy ने Quantum Safe Bitcoin (QSB) नामक एक नया तरीका पेश किया है। यह तकनीक Bitcoin के कोर प्रोटोकॉल को बदले बिना ट्रांजैक्शन्स को क्वांटम-रेसिस्टेंट (quantum-resistant) बनाती है। मौजूदा डिजिटल सिग्नेचर्स (digital signatures) की जगह QSB हैश-बेस्ड प्रूफ्स (hash-based proofs) का इस्तेमाल करती है, जिससे क्वांटम कंप्यूटर द्वारा Shor's algorithm का उपयोग करके सिग्नेचर्स को तोड़ना मुश्किल हो जाता है।
हर ट्रांजैक्शन पर ₹75 से ₹200 का भारी खर्च!
QSB की सबसे बड़ी चुनौती इसकी लागत है। अनुमान है कि एक QSB ट्रांजैक्शन बनाने में $75 से $200 तक का खर्च आ सकता है। यह लागत खास तौर पर ऑफ-चेन GPU कंप्यूटेशन (off-chain GPU computation) की वजह से है। इसकी तुलना में, Bitcoin की मौजूदा औसत ट्रांजैक्शन फी लगभग $0.33 है, और लाइटनिंग नेटवर्क (Lightning Network) पर तो यह फीस कुछ सेंट्स से भी कम होती है। इस prohibitive cost के कारण, QSB आम इस्तेमाल के लिए नहीं, बल्कि एक इमरजेंसी उपाय के तौर पर देखा जा रहा है, जब कोई यूजर क्वांटम खतरे का सामना कर रहा हो और इतनी बड़ी कीमत चुकाने को तैयार हो।
कब होगा क्वांटम कंप्यूटर से असली खतरा?
एक्सपर्ट्स इस बात पर बहस कर रहे हैं कि कब ऐसे शक्तिशाली क्वांटम कंप्यूटर उपलब्ध होंगे जो मौजूदा एन्क्रिप्शन को तोड़ सकें। कुछ का मानना है कि यह उम्मीद से पहले हो सकता है। हालांकि, Bernstein जैसे एनालिस्ट्स क्वांटम खतरे को एक 'मैनेजेबल अपग्रेड साइकिल' मानते हैं, न कि तत्काल संकट। उनका अनुमान है कि इंडस्ट्री के पास पोस्ट-क्वांटम सिक्योरिटी (post-quantum security) उपायों को लागू करने के लिए तीन से पांच साल का समय है।
यह समय-सीमा प्रोटोकॉल-लेवल सॉल्यूशंस (protocol-level solutions) को विकसित करने और एकीकृत करने का मौका देती है। BIP-360 जैसे प्रपोजल्स (proposals) का मकसद सॉफ्ट फोर्क (soft fork) के माध्यम से क्वांटम-रेसिस्टेंट सिग्नेचर स्कीम्स पेश करना है। यह QSB के तत्काल लेकिन आइसोलेटेड फंक्शन की तुलना में एक अधिक स्केलेबल, लॉन्ग-टर्म रणनीति है। Bitcoin का मार्केट कैप लगभग $1.44 ट्रिलियन है, और इसकी कीमत $71,878 के आसपास बनी हुई है।
QSB की प्रैक्टिकल मुश्किलें
अपनी अत्यधिक लागत के अलावा, QSB में कुछ और बड़ी व्यावहारिक दिक्कतें भी हैं। इस तरीके में ट्रांजैक्शन्स को सीधे माइनर्स (miners) को भेजना पड़ता है, जो सामान्य नेटवर्क रूट और लाइटनिंग नेटवर्क जैसी तेज लेयर्स को बायपास कर देता है। इससे नेटवर्क बंट सकता है और QSB ट्रांजैक्शन्स के लिए एक अलग, तेज लेकिन महंगा चैनल बन सकता है। इसके अलावा, QSB ट्रांजैक्शन्स की जटिलता आम यूजर के लिए वॉलेट ऑपरेशंस (wallet operations) को कठिन बना सकती है।
QSB की तुलना में, BIP-360 क्वांटम रेजिस्टेंस की ओर एक अधिक इंटीग्रेटेड, भले ही धीमी, राह प्रदान करता है। यह मौजूदा स्केलिंग सॉल्यूशंस के साथ कम्पैटिबिलिटी (compatibility) और व्यापक नेटवर्क एडॉप्शन (adoption) का लक्ष्य रखता है।