BigBasket का Quick Commerce पर दांव: क्या পারবে Zepto-Blinkit को टक्कर, घटेंगे घाटे?

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
BigBasket का Quick Commerce पर दांव: क्या পারবে Zepto-Blinkit को टक्कर, घटेंगे घाटे?
Overview

Tata Group की BigBasket ने Quick Commerce पर बड़ा दांव खेला है। कंपनी अगले **2** सालों में प्रॉफिट में लौटने और FY27 तक **60%** से ज़्यादा रेवेन्यू ग्रोथ का महत्वाकांक्षी लक्ष्य लेकर चल रही है। ये कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब कंपनी को FY25 में बड़ा नेट लॉस हुआ है और उसे Zepto व Blinkit जैसे दिग्गजों से कड़ी टक्कर मिल रही है।

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Quick Commerce की राह पर BigBasket

Tata Digital का हिस्सा BigBasket अब अपने बिजनेस मॉडल को पूरी तरह से Quick Commerce की ओर मोड़ रही है। कंपनी को उम्मीद है कि इस बदलाव से FY27 तक सालाना रेवेन्यू में 60% से ज़्यादा की ग्रोथ देखने को मिलेगी। इस तेजी को भुनाने के लिए BigBasket इस साल करीब 250 नए डार्क स्टोर्स खोलने की योजना बना रही है, खासकर बड़े मेट्रो शहरों में।

फिलहाल कंपनी का एवरेज ऑर्डर वैल्यू ₹525 के आसपास है, जिसे अगले 12-18 महीनों में बढ़ाकर ₹650 करने का लक्ष्य है। ये बढ़त अच्छे प्रोडक्ट सिलेक्शन, जिसमें प्राइवेट लेबल्स और ताज़े फल-सब्ज़ियां शामिल हैं, से आने की उम्मीद है। ये प्रोडक्ट पहले से ही BigBasket की कुल बिक्री का एक तिहाई से ज़्यादा का हिस्सा हैं। कंपनी का अनुमान है कि 8-9 महीनों में कंट्रीब्यूशन मार्जिन पॉजिटिव हो जाएगा और 18-24 महीनों में EBITDA ब्रेकईवन हासिल कर लिया जाएगा।

मार्केट में ज़बरदस्त कॉम्पीटीशन

भारत में Quick Commerce मार्केट तेज़ी से बढ़ा है। 2022 में जहां यह $300 मिलियन का था, वहीं 2025 तक इसके $7.1 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, और 2030 तक यह $35 बिलियन तक जा सकता है। इस सेक्टर में कड़ी प्रतिस्पर्धा और भारी निवेश देखा जा रहा है। Zepto जैसे प्रतिद्वंद्वी ने हाल ही में $7 बिलियन के वैल्यूएशन पर $450 मिलियन की फंडिंग जुटाई है और IPO की तैयारी में है। Zomato के मालिकाना हक वाली Blinkit फिलहाल मार्केट लीडर है, जिसका शेयर करीब 45-46% है और यह पहले ही पॉजिटिव एडजस्टेड EBITDA हासिल कर चुकी है।

क्वालिटी पर दांव

BigBasket अपने ताज़े फल-सब्ज़ियों के लिए फार्म सोर्सिंग पर मज़बूत पकड़ और प्राइवेट लेबल्स में अपनी लीडरशिप को एक बड़ा कॉम्पिटिटिव एज मानती है। क्वालिटी और प्रोडक्ट रेंज पर यह फोकस इसे उन प्रतिद्वंद्वियों से अलग करता है जो सिर्फ कीमत या स्पीड पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। कंपनी अपनी आय का 10-12% नॉन-ग्रोसरी आइटम्स से कमा रही है, जिसे पार्टनरशिप के ज़रिए 17-20% तक ले जाने का लक्ष्य है।

वित्तीय चुनौतियां और बढ़ता घाटा

रेवेन्यू ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी की योजनाओं के बावजूद, BigBasket के हालिया वित्तीय नतीजे चिंताजनक हैं। फाइनेंशियल ईयर 25 में कंपनी ने ₹2,006.8 करोड़ का नेट लॉस दर्ज किया, जो पिछले साल के मुकाबले 42% ज़्यादा है। वहीं, रेवेन्यू 2% घटकर ₹9,866.7 करोड़ रहा। ये घाटा Quick Commerce मॉडल से जुड़े भारी खर्चों, जैसे डार्क स्टोर्स और डिस्काउंट्स, के कारण बढ़ा है। कुछ पुराने ग्राहक भी तेज़ डिलीवरी पर ज़ोर देने के कारण कंपनी से अलग-थलग महसूस कर रहे हैं।

भविष्य की राह और IPO

BigBasket की योजना अपनी नई रणनीति और Tata Group की अन्य कंपनियों, जैसे Croma और 1mg, के साथ मिलकर एक कॉम्प्रिहेंसिव डिलीवरी प्लेटफॉर्म बनाने की है। कंपनी 2025 में IPO लाने की भी योजना बना रही है, जो प्रॉफिटेबिलिटी हासिल करने पर निर्भर करेगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.